जमुई सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पिछले पांच दिनों में तीन अलग-अलग मामलों में मरीजों को स्ट्रेचर नहीं मिला। मजबूर परिजनों को मरीजों को गोद में उठाकर इमरजेंसी और वार्ड तक ले जाना पड़ा। गर्भवती पत्नी को गोद में लेकर चढ़ी सीढ़ियां 18 अगस्त को पूरन तुरी अपनी गर्भवती पत्नी सविता देवी को अस्पताल लाए। स्ट्रेचर न मिलने के कारण उन्हें पत्नी को गोद में उठाकर दूसरी मंजिल तक जाना पड़ा। यह नजारा देखकर लोग हैरान रह गए। प्रसूता को गोद में उठाकर पहुंचाया इमरजेंसी 21 अगस्त को लक्ष्मीपुर के चिनवेरिया गांव की रूपा देवी का मामला सामने आया। प्रसव के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और दौरे पड़ने लगे। परिजन उन्हें सदर अस्पताल लाए। यहां भी स्ट्रेचर नहीं मिला। स्वास्थ्यकर्मियों से मदद मांगी, लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला। चार लोगों ने मिलकर प्रसूता को गोद में उठाया और इमरजेंसी वार्ड तक ले गए। लगातार हो रही हैं घटनाएं स्थानीय लोगों का कहना है कि स्ट्रेचर की किल्लत या लापरवाही की समस्या लगातार बनी हुई है। अस्पताल में स्ट्रेचर तो हैं, लेकिन उनका सही इस्तेमाल और रखरखाव नहीं होता। अस्पताल प्रबंधन का दावा सदर अस्पताल प्रबंधक रमेश कुमार पांडेय का कहना है कि स्ट्रेचर की कोई कमी नहीं है। “मरीजों के परिजन स्ट्रेचर को जहां-तहां छोड़ देते हैं, जिससे दिक्कत होती है। स्वास्थ्यकर्मियों को स्ट्रेचर सही जगह रखने का निर्देश दिया गया है।” मरीजों की सुरक्षा पर सवाल लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने जिला मुख्यालय के सबसे बड़े अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि अगर आपात स्थिति में मरीज को तुरंत स्ट्रेचर न मिले तो उसकी जान भी जा सकती है।