सीतामढ़ी के सुप्पी प्रखंड क्षेत्र के बरहरवा पंचायत के जमला परसा गांव में बागमती नदी से हो रहे कटाव का निरीक्षण शनिवार को राज्य के फ्लड चेयरमैन संजय कुमार और कार्यपालक अभियंता भास्कर कुमार ने टीम के साथ किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों की शिकायतें सुनी और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद धरातल पर काम अधूरा है, जिससे घर और जमीन लगातार नदी में समाहित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ठोस कार्यवाही नहीं होने से सरकार का पैसा बर्बाद हो रहा है। ग्रामीण विकास यादव और फेकन दास ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की मांग उठाई। वहीं अन्य ग्रामीणों ने कटाव रोधी कार्य में लापरवाही और नेपाल के ब्रम्हपुरी बांध पर ठोकर बनाए जाने से कटाव बढ़ने की बात कही। इस पर फ्लड चेयरमैन ने टेक्निकल टीम के साथ ब्रम्हपुरी बांध का निरीक्षण भी किया। सहायक अभियंता सतेंद्र कुमार ने बताया कि फिलहाल फ्लड फाइटिंग के अंतर्गत जो संभव है, वही कार्य किया जा रहा है। नदी के ढलान कटाव स्थल की ओर होने से परेशानी बढ़ी है। दिसंबर से शुरू होगा बोल्डर पिचिंग का काम चेयरमैन संजय कुमार ने आश्वासन दिया कि दिसंबर से कटाव स्थल से रेलवे पुल तक बोल्डर पिचिंग का कार्य शुरू होगा। साथ ही कार्यपालक अभियंता भास्कर कुमार ने कहा कि 1980 में जिन लोगों को पुनर्वास की जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई थी, उन्हें अब जमीन दी जाएगी। इसके बाद ग्रामीणों ने संवेदकों को कटाव स्थल पर कार्य शुरू करने की अनुमति दी। आपदा सहायता राशि का लाभ नहीं मिला ग्रामीण रामधेनी महतो और रामगेनी महतो ने बताया कि विस्थापन के बाद अब तक उन्हें केवल पॉलीथिन शीट मिली है, जबकि आपदा सहायता राशि का लाभ नहीं मिल पाया। कर्मचारियों से संपर्क करने पर राजस्व महाअभियान में व्यस्त होने की बात कहकर मदद टाल दी जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते राहत मिलती तो नया आशियाना बनाने में सहूलियत होती। कटाव रोधी कार्य शुरू होने और पुनर्वास की जमीन उपलब्ध कराने की घोषणा से अब ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि दशकों से चली आ रही समस्या का समाधान जल्द होगा।