फतुहा में स्कूल, लेकिन पहुंचने के लिए सड़क नहीं:जलजमाव के बीच खेत से होकर पहुंचते हैं स्टूडेंट्स, BEO बोलें- समाजिक स्तर पर कर रहे समाधान

Aug 5, 2025 - 12:30
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फतुहा में स्कूल, लेकिन पहुंचने के लिए सड़क नहीं:जलजमाव के बीच खेत से होकर पहुंचते हैं स्टूडेंट्स, BEO बोलें- समाजिक स्तर पर कर रहे समाधान
पटना में लगातार हो रही बारिश से कई इलाकों में जलजमाव से परेशानी हो रही है। स्कूल आने-जाने वाले स्टूडेंट्स को भी काफी समस्या हो रही है। पूरा मामला जिले के फतुहा प्रखंड के मकसूदपुर गांव का है, जहां कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की छात्राओं को रोज आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। दरअसल, इस स्कूल तक पहुंचने के लिए कोई सीधा रास्ता नहीं है। छात्राओं को दूसरों की निजी ज़मीन, खेतों और कीचड़ भरे रास्तों से होकर गुज़रना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। तब पूरे खेत में पानी जमा रहता है और छात्राओं को गंदे पानी से होकर जाना पड़ता है। स्कूल, लेकिन आने-जाने का रास्ता नहीं इस आवासीय विद्यालय में कक्षा 6, 7 और 8 की कुल 100 छात्राएं रहती हैं। इनकी पढ़ाई बगल के मध्य विद्यालय मकसूदपुर में होती है। सरकार की ओर से छात्राओं को भोजन, ड्रेस और प्रोत्साहन राशि जैसी सुविधाएं मिलती हैं। वहीं स्कूल के चारों ओर निजी जमीनें होने के कारण आने-जाने का रास्ता नहीं है। इन्फेक्शन के डर से स्कूल नहीं आते हैं स्टूडेंट्स वार्डन कंचन कुमारी ने बताया कि वह 2017 से इस विद्यालय में हैं और तब से यह समस्या बनी हुई है। आस-पास के लोग स्कूल के पास आकर उन्हें बुरा-भला भी कहते हैं। कभी-कभी बच्चे इन्फेक्शन के डर से स्कूल जाने से मना कर देते हैं। वार्डन ने राज्य और ज़िला कार्यालय को इस समस्या की जानकारी दी है और हर बैठक में यह मुद्दा उठाती रही हैं। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि बिना उचित पहुंच मार्ग के यह स्कूल कैसे बन गया। पैरों में इन्फेक्शन का भी डर : छात्रा छात्रा रूपम कुमारी ने बताया कि हमारा स्कूल यहां से 200 मीटर दूर है और हमें दिन में तीन-चार बार इसी रास्ते से आना-जाना पड़ता है। कचरे के ढेर पर होकर हमें स्कूल तक पहुंचना पड़ता है। बरसात के दिनों में बहुत ज़्यादा परेशानी होती है। इतना समय हो गया, लेकिन सरकार हम पर कोई ध्यान नहीं दे रही है, जबकि हमने कई बार अधिकारियों को बताया है। उन्होंने यह भी ज़िक्र किया कि कीचड़ वाले रास्ते से चलने के कारण पैरों में इन्फेक्शन का भी डर रहता है। स्कूल बना तो रास्ते का नहीं रखा ध्यान : प्रिंसिपल प्रिंसिपल राजेश कुमार ने कहा कि जब यह स्कूल बना था, तब यह ध्यान नहीं दिया गया कि इसका रास्ता किधर से होगा। अब बरसात में बच्चियों को आने-जाने के लिए गंदे पानी और खेतों से होकर गुज़रना पड़ता है। इससे ज़मीन मालिकों से भी सुनना पड़ता है, जिससे और परेशानी होती है। बच्चियां इसी गंदे रास्ते से कम से कम चार बार आती-जाती हैं। वरीय अधिकारी भी आते रहे हैं और हमने उन्हें इसके बारे में बताया है, लेकिन फिर भी रास्ता नहीं मिला है। यह संस्थान 2011 से चल रहा है, लेकिन अब तक रास्ते की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई। इस आवासीय विद्यालय में दो शिक्षिकाएं भी हैं, जिन्हें छात्राओं की तरह ही इस दुर्गम रास्ते से गुज़रना पड़ता है। समाज सेवी सुधीर यादव ने बताया कि यह एक गंभीर मुद्दा है कि छात्राओं को स्कूल तक पहुंचने का रास्ता भी नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस समस्या पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। BEO बोलें- समाजिक स्तर पर निदान का प्रयास वहीं फतुहा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुजीत कुमार ने बताया कि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय जो फतुहा प्रखंड में स्थित है। यहां जाने के लिए रास्ता नहीं है। विद्यालय के आसपास ग्रामीणों की निजी जमीन है। हम लोग सामाजिक स्तर पर भी इसके निदान के लिए प्रयास कर रहे हैं। अपने वरीय पदाधिकारी को भी इस बाबत अवगत कराया गया है।

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