गोपालगंज में सावन महीने की समाप्ति के साथ ही मछली बाजारों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। करीब एक महीने तक शाकाहार रहने के बाद अब लोग मांसाहारी भोजन की शुरुआत करने के लिए बड़ी संख्या में मछली खरीदने पहुंच रहे हैं। हिंदू धर्म को मानने वाले अधिकांश लोग सावन माह में मांसाहारी भोजन से परहेज करते हैं। सावन खत्म होते ही उनकी पहली पसंद मछली होती है। गोपालगंज के विभिन्न बाजारों में रविवार की सुबह से ही मछली खरीदने वालों की भीड़ देखी गई। 70 क्विंटल मछली की खपत इन दिनों रोहू, कतला, प्यासी जैसी मछलियों की मांग काफी बढ़ गई है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि मांग में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण मछलियों की आवक कम पड़ रही है। इससे कीमतें बढ़ गई हैं।मछली कारोबारी ने बताया कि सिर्फ एक बाजार में अभी तक करीब 70 क्विंटल मछली की खपत हो चुकी है। 17 किलो का कतला मछली मछली बाजार में आकर्षण का केंद्र 17 किलो का कतला मछली रहा। इसे बोली लगाकर 750 रुपए प्रति किलो तक खरीदा गया। दरियाव की मछली लोगों के लिए पसंदीदा होती है। लोग इसे प्राथमिकता के आधार पर खरीदते हैं और कीमत की परवाह किए बिना मुंह मांगी कीमत देते हैं। बड़ी मछलियां 400-450 रुपए प्रति किलो वर्तमान में रोहू मछली 300 से 350 रुपए प्रति किलोग्राम तक बिक रही है। सावन से पहले इसकी कीमत 200 से 250 रुपए प्रति किलोग्राम थी। कतला और अन्य बड़ी मछलियां भी 400 से 450 रुपए प्रति किलोग्राम तक बेची जा रही हैं। पटेंया, झींगा और टेंगड़ा 1000 से 1500 रुपए प्रति किलो छोटे आकार की मछलियां भी 200 से 250 रुपए प्रति किलोग्राम से कम नहीं मिल रही हैं। ग्रास और विकेट 300 से 320 रुपए, रूप चंदा 200 से 250 रुपए में बिक रही है। सबसे ज्यादा कीमत पटेंया, झींगा और टेंगड़ा मछली की है,जिनकी कीमत 1000 से 1500 रुपए प्रति किलो है। खुशी-खुशी मछलियां खरीद रहे लोग मछली के दामों में हुई वृद्धि के बावजूद लोग खुशी-खुशी मछलियां खरीद रहे हैं। उनका कहना है कि एक महीने के संयम के बाद अब वे अपने पसंदीदा भोजन का स्वाद लेना चाहते हैं, भले ही इसके लिए थोड़ी अधिक कीमत चुकानी पड़े। ग्राहकों के माने तो एक माह शाकाहार रहने के बाद इसकी शुरुआत मछली से ही करते है क्योंकि मछली को शुभ माना जाता है।