इंडियन ऑयल के निदेशक (अनुसंधान और विकास) डॉ. आलोक शर्मा ने बरौनी रिफाइनरी के 2 दिवसीय भ्रमण के दौरान अनुसंधान के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की है। उनके साथ कार्यकारी निदेशक (RT) आरके कौशिक सिन्हा, अनुसंधान और विकास टीम भी थी। यहां आने पर कार्यकारी निदेशक और रिफाइनरी प्रमुख सत्य प्रकाश ने कार्यकारी निदेशक (परियोजना और कोर ग्रुप) संजय रायजादा व बरौनी रिफाइनरी की वरिष्ठ प्रबंधन टीम के साथ अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान निदेशक डॉ. आलोक शर्मा ने सूर्य सरोवर के नजदीक पौधरोपण भी किया। बैठक में रिफाइनरी प्रमुख सत्य प्रकाश ने निदेशक को बताया कि अनुसंधान और विकास आज के शोधन परिदृश्य की जीवन रेखा है। जहां ऊर्जा परिवर्तन, पर्यावरण चेतना और उत्पाद रणनीति को पुनर्परिभाषित कर रहे हैं। वहीं, निदेशक ने बरौनी रिफाइनरी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ समीक्षा बैठक को भी संबोधित किया। बैठक में रिफ़ाइनरी के टेक्निकल परफॉर्मेंस पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। जिसके बाद नई तकनीकी प्रगति, अनुसंधान और भविष्य के नवाचारों पर चर्चा हुई है। जिसमें डॉ. आलोक शर्मा ने ईंधन और पेट्रोकेमिकल के बीच संतुलन बनाए रखने के संबंध में अपनी चिंता व्यक्त की। ईंधन आपूर्ति में व्यवधान हो रहे कहा कि आज के परस्पर विरोधी वैश्विक परिदृश्य में ईंधन आपूर्ति में व्यवधान हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि अनुसंधान और विकास से विकसित पॉलीप्रोपाइलीन कैटेलिस्ट जैसी नई तकनीकों से कैसे रिफाइनरियों के लिए बेहतर अनुप्रयोग प्रदर्शित कर सकती हैं। विमानन ईंधन (एसएएफ), कार्बन डाइऑक्साइड से कार्बन मोनोऑक्साइड निष्कर्षण, जैव-उपचार और जैव प्रौद्योगिकी, एथेनॉल संयंत्र विकास के क्षेत्र में नए नवाचारों के साथ-साथ इंडेन XTRATEJ और PROPANET जैसे उत्पाद आने वाले दिनों में हमें लाभ की स्थिति में लाएंगे। उन्होंने बताया कि कैसे इंडियन ऑयल राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के तहत 10 हजार टन प्रति वर्ष क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट स्थापित करके हरित परियोजनाओं में योगदान दे रहा है। इसके अलावा मौजूदा तकनीकों की प्रयोज्यता, तकनीकी विकास के लिए भविष्य के नवाचार और तकनीकी प्रगति तथा बरौनी रिफाइनरी के सुदृढ़ उत्कृष्टता पर भी चर्चा हुई।