शेरशाहवादी समुदाय को 'बांग्लादेशी' कहने पर भड़का आक्रोश:किशनगंज में पूर्व विधायक गोपाल अग्रवाल के खिलाफ प्रदर्शन, नेता बोले- सार्वजनिक माफी मांगे या सबूत दें

Aug 3, 2025 - 20:30
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शेरशाहवादी समुदाय को 'बांग्लादेशी' कहने पर भड़का आक्रोश:किशनगंज में पूर्व विधायक गोपाल अग्रवाल के खिलाफ प्रदर्शन, नेता बोले- सार्वजनिक माफी मांगे या सबूत दें
किशनगंज के ठाकुरगंज में रविवार को ऑल बिहार शेरशाहवादी एसोसिएशन के बैनर तले पूर्व विधायक गोपाल अग्रवाल के खिलाफ जोरदार शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन अग्रवाल द्वारा एक राष्ट्रीय समाचार चैनल पर शेरशाहवादी समुदाय को “बांग्लादेशी” और “घुसपैठिया” कहे जाने के विरोध में किया गया। हजारों की भीड़, सीमांचल के कई विधायक मौजूद प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। मौके पर किशनगंज विधायक इजहारूल हुसैन, बहादुरगंज विधायक अंजार नईमी, अमौर विधायक अख्तरुल ईमान, और ठाकुरगंज विधायक सऊद आलम समेत सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कई नेता मौजूद रहे। हरिश्चंद्रपुर (बंगाल) के विधायक मुश्ताक आलम, पूर्व मंत्री नौशाद आलम और पूर्व विधायक कमरूल होदा भी कार्यक्रम में पहुंचे। 'शेरशाहवादी और सुरजापुरी एकता जिंदाबाद' के नारे प्रदर्शन के दौरान "शेरशाहवादी व सुरजापुरी एकता जिंदाबाद" और "हिन्दुस्तान जिंदाबाद" जैसे नारे लगाए गए। लोगों ने गोपाल अग्रवाल के बयान को समुदाय की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान पर सीधा हमला बताया। "या सबूत दो या माफी मांगो" की चेतावनी वक्ताओं ने अग्रवाल से या तो अपने बयान के पक्ष में सबूत देने या सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। अन्यथा उन्होंने राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी।एसोसिएशन के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सैयदुर रहमान ने कहा, "किशनगंज गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है। ऐसे बयानों से सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश हो रही है।" जिला अध्यक्ष डॉ. मिस्बाहउद्दीन बुखारी ने कहा, "शेरशाहवादी समुदाय का देश के आजादी के आंदोलन और सीमांचल के विकास में ऐतिहासिक योगदान रहा है। यह अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" पुलिस बल तैनात, यातायात रहा सुचारू SDPO मंगलेश कुमार सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। एनएच 327ई पर यातायात सुचारू रखने के लिए वालंटियर्स की मदद ली गई। सांप्रदायिक मानसिकता का आरोप लोजपा जिलाध्यक्ष हबीबुर रहमान ने बयान को सांप्रदायिक मानसिकता से प्रेरित बताया। वहीं मुखिया इकरामुल हक ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक प्रतिष्ठा पर हमला करार देते हुए कहा कि समुदाय के लोग शांति और संविधान के दायरे में रहकर अपना विरोध जारी रखेंगे। निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि शेरशाहवादी समुदाय पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और झूठा प्रचार करने वालों को दंडित किया जाए। साथ ही समुदाय की सकारात्मक और ऐतिहासिक पहचान को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई।

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