पटना पुलिस ने मोतिहारी के घोड़ासहन थाना क्षेत्र में शुक्रवार को टेरर फंडिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने भूषण चौधरी और उसके बेटे गोलू कुमार को गिरफ्तार किया है। दोनों साइबर कैफे की आड़ में पिछले दो सालों से अवैध गतिविधियां चला रहे थे। पटना पुलिस मुख्यालय की विशेष टीम और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से इनके साइबर कैफे पर छापेमारी की, जहां से कई महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए। इनमें विदेशी मुद्राएं, पांच रोलेक्स घड़ियां और कई जाली दस्तावेज शामिल हैं। पुलिस को 98 आधार कार्ड, 8 ड्राइविंग लाइसेंस, 16 वोटर आईडी और अन्य पहचान पत्र मिले। साथ ही 9 स्कैनर और लेन-देन से जुड़ी खाता-बहियां भी जब्त की गई। 2 साल पहले विदेशी फंडिंग की थी शुरू जांच में पता चला कि गोलू कुमार दो साल पहले कुछ लोगों के संपर्क में आया। उन्होंने उसे क्रिप्टोकरेंसी और बाइनेंस आईडी से धन भेजने का तरीका सिखाया। इसके बाद उसने साइबर ठगी और हवाला नेटवर्क के जरिए विदेशी फंडिंग शुरू कर दी। 101 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन धंधे को बढ़ाने के लिए गोलू ने अपने पिता भूषण चौधरी और अन्य व्यक्तियों की बाइनेंस आईडी बनवाई और उनके माध्यम से विदेशी लेन-देन को अंजाम दिया। आरोपियों ने पांच भारतीय और एक नेपाली बाइनेंस आईडी से करीब 101 करोड़ रुपए विदेश भेजे। इनमें सबसे अधिक ट्रांजेक्शन गोलू की आईडी से हुआ, जबकि उसके पिता की आईडी से दूसरी सबसे बड़ी राशि भेजी गई। शेष तीन भारतीय आईडी और एक नेपाली आईडी की जांच अभी जारी है। यूपी में साइबर ठगी का मामला हुआ था दर्ज इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब उत्तर प्रदेश निवासी विकास कुमार ने साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। जांच के क्रम में नवादा जिले के पथरा इंग्लिश गांव से पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई। इन्हीं की निशानदेही पर पुलिस ने 18 अगस्त को घोड़ासहन के गोलू और उसके पिता भूषण को हिरासत में लिया। इसके बाद यूपी पुलिस दोनों को साइबर फ्रॉड मामले में जेल भेज दी। अब इन्हें उत्तर प्रदेश से रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। वहीं, इस पूरे नेटवर्क से जुड़े एक अन्य फरार अभियुक्त आलोक कुमार की गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां बरामद दस्तावेजों और लेन-देन की जांच में गहराई से जुटी हुई हैं। नेपाल से जुड़ी बाइनेंस आईडी की जानकारी के लिए संबंधित कंपनी से डेटा भी मांगा गया है।