मनसा देवी मंदिर में विषहरी पूजा पर उमड़ी भीड़:डलिया चढ़ाने के लिए पहुंच रहे हैं श्रद्धालु; सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, CCTV से निगरानी

Aug 17, 2025 - 12:30
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मनसा देवी मंदिर में विषहरी पूजा पर उमड़ी भीड़:डलिया चढ़ाने के लिए पहुंच रहे हैं श्रद्धालु; सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, CCTV से निगरानी
अंग क्षेत्र के लोक महापर्व विषहरी पूजा के अवसर पर चंपानगर मनसा मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों और आसपास के जिलों से हजारों भक्त मां मनसा के दर्शन के लिए पहुंचे हैं। मंदिर परिसर से बाहर तक श्रद्धालुओं की काफी भीड़ है। माता को डलिया चढ़ाकर पान-प्रसाद अर्पित कर रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चौक-चौराहों पर पुलिस बल तैनात किए गए हैं। शनिवार देर रात देवी मनसा की प्रतिमा पिंड पर स्थापित की गई। रविवार सुबह समाज की ओर से सर्वप्रथम डलिया चढ़ाया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए गए। मंदिर समिति की ओर से पंडित संतोष झा ने सुबह पांच बजे पूजा-अर्चना की। देर शाम देवी भव्य महाआरती होगी। मंदिर में मनसा देवी को छोटे-छोटे बारी कलश अर्पित किए गए। ऐसी मान्यता है कि मां मनसा देवी से मांगे हुए मन्नतें पूरी होने पर डलिया चढ़ाया जाता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की हर सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए एक दर्जन से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। रात मे होगी बाला लखेंद्र और बिहुला का विवाह मनसा मंदिर में धार्मिक रीति-रिवाज से बाला लखेंद्र और सती बिहुला का विवाह कराया आज देर रात्रि की जाएगी । विवाह देखने के लिए भागलपुर, बांका, नवगछिया, सुल्तानगंज, बंगाल, झारखंड समेत कई इलाकों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते है। विवाह उपरांत मध्य रात्रि में सिंह नक्षत्र के प्रवेश की बेला में नाग मनियार से बाला लखेंद्र का दंश कराया जाएगा। इस मार्मिक दृश्य को देखने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते है। सती बिहुला से जुड़ी कथाओं को सुनने के लिए श्रद्धालु मंदिर में रात भर जमे रहते हैं। विशेष तौर पर महिला श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर में अधिक देखी जाती है। शहर के अन्य पूजा पंडालों का भी यही नजारा रहता है। मंदिर में स्थापित है प्राचीन शिवलिंग चंपानगर मनसा मंदिर का इतिहास चांदो सौदागर से जुड़ा हुआ है। मंदिर निर्माण के क्रम में शिवलिंग मिला था। जिसे मंदिर के उत्तरी दिशा में स्थापित किया गया है। ऐसा माना जाता है कि बाला लखेंद्र के पिता चांदो सौदागर इसी शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते थे।

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