गृह प्रवेश से पहले अपना घर तोड़ रहे लोग:भागलपुर में नदी में समाए 4 घर, तटबंध पर चूड़ा-गुड़ खाकर बिता रहे समय

Aug 2, 2025 - 08:30
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गृह प्रवेश से पहले अपना घर तोड़ रहे लोग:भागलपुर में नदी में समाए 4 घर, तटबंध पर चूड़ा-गुड़ खाकर बिता रहे समय
भागलपुर के सबौर में गंगा नदी का लगातार कटाव हो रहा है। जल संसाधन विभाग की ओर से कटाव की रोकथाम को लेकर काम किया जा रहा है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। 10 करोड़ की लागत से कटावरोधी काम डेढ़ महीने पहले करवाया गया था। इसके बावजूद गंगा नदी में कटाव जारी है। स्थिति यह है कि 4 घर गंगा नदी में समा चुके है। लोग गृह प्रवेश से पहले अपना घर तोड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जल संसाधन विभाग के अधिकारी बालू के बदले बोरी में मिट्टी भरकर कटावरोधी काम कराया, जिससे पानी का दबाव नहीं रुका। रोजाना अलग-अलग पॉइंट्स पर कटाव हो रहे है। इस कटाव की वजह से स्थानीय ग्रामीण डरे सहमे हैं। हालांकि, जल संसाधन विभाग के इंजीनियर ने बताया, नदी में अंडरग्राउंड प्रेशर अधिक है। इससे कटाव हो रहा है। इसको रोकने के लिए कोशिश की जा रही है। सैकड़ों की संख्या में डरे-सहमे हैं लोग सबौर प्रखंड के मामलखा पंचायत स्थित चायचक गांव के सैकड़ों लोग डरे-सहमे हैं। लोग अपने-अपने घर छोड़कर गंगा के तट पर बैठे है। महिलाएं फूट-फूट कर रो रही है। ग्रामीणों ने बताया, 'जो काम बारिश से पहले कर लेना चाहिए था, वह काम जल संसाधन विभाग बारिश शुरू होने के बाद किया है।' 'जिला प्रशासन से इन लोगों की मांग है कि हमलोगों को उच्च स्थान पर बसाया जाए। मुआवजे के रूप में जमीन दी जाए, ताकि अपने लिए छत का निर्माण कर सकें।' कई घर गंगा नदी में समा चुके है बौर प्रखंड के चायचक में पिछले 10 दिनों से गंगा नदी के किनारे लोग आंसू बह रहे हैं। घर नदी में समा चुके है। पीड़िता बेबी देवी ने बताया, 'घर अगले साल कटाव की भेंट चढ़ गया था। हमलोग झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। यह घर भी बह गया। अब कहां जाएंगे, कहां रहेंगे?' बेबी देवी ने आगे बताया, 'सरकार हम लोगों की मदद नहीं कर रही है। सरकार से मांग है कि कुछ उपाय करें। गुजरात में पति मजदूरी करते है और बच्चे गांव में खेती कर घर बनाए थे।' बालू के बदले मिट्टी का किया गया इस्तेमाल गीता देवी ने कहा, 'भूखे-प्यासे गंगा तट पर बैठी हूं, कटाव को देख रही हूं, डर है कि कहीं घर को अपनी चपेट में ना ले ले। सरकार इसका कुछ उपाय करें। 1 इंच भी अपनी जमीन नहीं है। कटाव रोधी कार्य में बालू के बदले मिट्टी का इस्तेमाल किया गया। इसके कारण कटाव रुका नहीं।' सीता देवी ने कहा, 'लगातार कटाव हो रहा है, अब हम लोग कहां जाएंगे, बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे? रात-दिन गंगा तट पर बैठी रहती हूं। मेरे सामने पड़ोस के रहने वाले दो लोगों का घर गंगा में समा गया। अभी हाल में ही घर बनवाए थे। सोचा था कि गेट लगाएंगे, तब गृह प्रवेश करवाएंगे।' गंगा तट पर बैठ कर महिला देख रही कटाव मासूम को गोद में लिए साके देवी कहती हैं, 'गंगा का पानी बढ़ रहा है, जिससे कटाव हो रहा है। इस कटाव की वजह से घर बह रहे है। बच्चे को खाने के लिए कुछ नहीं है, सूखा राशन खिलाकर अभी पाल रहे हैं। सुबह से ही गंगा तट पर बैठी हूं। मेरा घर अभी बचा है, लेकिन डर के कारण घर छोड़कर तटबंध पर बैठे है।' बच्चों की पढ़ाई हो रहा प्रभावित गंगा के तटबंध पर कटाव की वजह से सरोज मंडल परिवार के साथ बैठे है। बेटे को स्कूल नहीं भेज रहे है। सरोज मंडल के बेटे की तरह दर्जनों बच्चे हैं, जो स्कूल नहीं जा रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बच्चों ने बताया, कटाव के डर से स्कूल नहीं जा रहे हैं। चारों तरफ पानी ही पानी है। तीन दिन से घर में चूल्हा नहीं चला है। खाने पर आफत है। चूड़ा-गुर खाकर किसी तरह रह रहे हैं। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर चंचल ने बताया, 'बॉर्डर पिचिंग का काम अभी भी जारी है। डेढ़ महीने से कटावरोधी काम चलाए जा रहे हैं। लेकिन पानी का दबाव अधिक होने के कारण कई पॉइंट्स पर कटाव हो रहे हैं।' उन्होंने कहा कि 'बालू दो तरह के हैं, एक लोकल बालू और दूसरा कंस्ट्रक्शन बालू होता है। दोनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन पानी का दबाव इतना तेज है कि कटाव रुक नहीं रहा है।'

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