समस्तीपुर में रियल स्टेट के कारोबार पर अप्रत्यक्ष रूप से कुख्यातों के कब्जे की बात सामने आई है। कुख्यात कारोबार में अपना पैसा लगा भी रहे हैं। मोहनपुर में करोंड़ों की जमीन कब्जा मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ के बाद कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए है। मोहनपुर में जमीन कब्जा करने की योजना समस्तीपुर मंडल कारा में बनी थी। जेल में सालों से बंद कुख्यात अपने गुर्गों के माध्यम से जमीन पर कब्जा चाह रहा था। माना जाता है कि सत्ता में बैठे एक नेता का उसके सिर पर हाथ है। जिसके बल पर वह कई जमीन को कब्जा कर खरीदारों को दिला चुका है। इस बात की पुष्टि खुद एएसपी संजय पांडेय ने पत्रकारों के सामने की है। उन्होंने माना है कि इस कारोबार में सफेद पोश का भी हाथ है। जिसकी पहुंच सत्ता तक है। उन्हें चिह्नित किया जा रहा है। जरूरत होगी तो गिरफ्तारी भी की जाएगी। वैसे चर्चा यह भी है कि जिले के कुछ पुलिस पदाधिकारी भी इस कारोबार में लिप्त हैं और पीछे के रास्ते से उनका पैसा लगा हुआ है। बदमाशों ने जमीन में पैसा लगाने की कही बात पुलिस के सामने गिरफ्तार बदमाशों का कहना है कि जमीन कारोबार में अप्रत्यक्ष रूप से जेल में बंद कुख्यात का भी पैसा लगा है। भले ही कागज पर दूसरे का नाम होता है। पूरे कारोबार की जानकारी उसे देनी होती है। मुनाफा का 75 फीसदी हिस्सा उसी का होता है। शेष 25 फीसदी राशि ही कारोबारी बांटते हैं। जमीन कब्जा में स्थानीय पुलिस की भी मिली भगत होती है। इसके अलावा भी कई कुख्यात जमीन कारोबार में जुडे़ हैं। किसी न किसी रूप से सत्ता के करीब रह रहे हैं। जमीन कारोबार में जा चुकी है कई लोगों की जान शहर और आसपास के इलाके में जमीन कारोबार का सिंडीकेट हो गया है। जिसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई अपराधी प्रवृत्ति के लोग शामिल है। जिसके बल पर कारोबारी अच्छी जमीन को भी विवादित बनाकर उस पर पहले कब्जा करते हैं फिर खरीदार को बेचते हैं। इस दौरान छोटे कारोबारी जो आका की बात नहीं मानते हैं कि उनकी हत्या तक कर दी जाती है। इससे पहले भी मोहनपुर क्षेत्र में हाल के सालों में रिंकु ठाकुर,रंजन वर्मा ,जमीन कारोबारी सौरव मोहन के चालक व एक अन्य कर्मी की पूर्व में हत्या हो चुकी है। इसके अलावा पिछले साल मुक्तापुर क्षेत्र में जमीन कारोबारी विजय गुप्ता और टोटा चालक की हत्या हो चुकी है। शहर में भी कब्जा को लेकर चल चुकी है गोली शहर के पुरानी पोस्टऑफिस रोड में जमीन कब्जा को लेकर पिछले सप्ताह पहले ही एक रेल कर्मी के मकान को जेसीबी से ढाह दिया गया। दो साल पहले मारबाड़ी बाजार में गोलीबारी की घटना में कई लोग घायल हो चुके हैं।