औरंगाबाद कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में बच्ची की मौत:एक दिन बाद परिजनों ने किया सड़क जाम, वार्डन पर लापरवाही का आरोप
औरंगाबाद में मदनपुर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल की एक स्टूडेंट की मौत के बाद दूसरे दिन परिजनों ने जमकर बवाल काटा। विद्यालय प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप है। परिजनों का कहना है कि छात्रा की मौत के बाद परिजनों को बिना जानकारी दिए पोस्टमार्टम करा दिया गया। बच्ची का सही से इलाज नहीं कराया गया। मंगलवार को प्रखंड कार्यालय के पास एनएच-19 को जाम कर दिया। लगभग 5 घंटे तक सड़क जाम रहा, जिसके कारण सड़क के दोनों और वाहनों की लंबी कतार लग गई। लगभग 20 किलोमीटर लंबा जाम लगने के कारण लोगों को आवाजाही करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सड़क जाम की जानकारी मिलते ही बीडीओ अतुल्य कुमार आर्य, सीओ मोहम्मद अकबर हुसैन, थानाध्यक्ष राजेश कुमार, बीईओ संजीव कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। लोगों को समझाने पर जाने का प्रयास किया। परिजन उनकी बात मानने को तैयार नहीं थे। आक्रोशित लोग लापरवाही करने वाले कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल के वार्डन व शिक्षिका पर कार्रवाई और मुआवजा की मांग पर अड़े थे। 5 घंटे तक बवाल के बाद लोग शांत हुए व सड़क जाम हटाया गया। एक दिन पहले ही हुई थी स्टूडेंट की मौत बता दें कि एक दिन पहले सोमवार को ही स्कूल में आवासित छठी वर्ग की स्टूडेंट 11 साल की नेहा की मौत हो गई थी। मृतका गयाजी जिले के डुमरिया प्रखंड के खरदाग गांव की रहने वाली थी। स्कूल की वार्डन प्रीति कुमारी ने बताया गया था कि जब वह सुबह स्कूल पहुंची, तो 10 से 12 बच्चियों को वायरल फीवर होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद आरबीएसके टीम के कर्मी अनुज कुमार को स्कूल जाकर छात्राओं का इलाज करने को कहा गया था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंच सकी। बेहोश होकर स्कूल में ही गिरी थी लकड़ी छात्रा नेहा कुछ देर के बाद बेहोश होकर स्कूल में ही गिर गई। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन ने आनन- फानन में उसे इलाज के लिए मदनपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया। जहां ड्यूटी में तैनात डॉक्टर कुमार जय ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने बताया कि जब स्टूडेंट को अस्पताल लाया गया था, उसी समय उसके शरीर की तापमान काफी बढ़ा हुआ था। स्कूल प्रबंधन ने इसकी जानकारी मृतका के परिजनों को दी। सूचना पर मृतका का एक रिश्तेदार वहां पहुंचा। शव को देखकर बिना कुछ कहे चला गया। इसके बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया गया। लेकिन शव को लेने कोई नहीं पहुंचा। दूसरे दिन मृतका के पिता समेत अन्य लोग स्कूल परिसर में पहुंचे और हंगामा करने लगे। घटना की सूचना पर पहुंचे अधिकारियों के काफी समझाने-बुझाने व मुआवजा दिलाए जाने का आश्वासन के बाद परिजन तैयार हुए व शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए। मृतका के पिता शिवकुमार कुमार भुईयां ने बताया कि 2 साल पहले बेटी का नामांकन कस्तूरबा गांधी स्कूल में कराया था। वार्डन का मोबाइल नंबर बंद था पहले विद्यालय प्रबंधन की ओर से फोन कर जानकारी दी गई कि आपकी बेटी बहुत शरारत करती है। आप स्कूल आए, मैं पटना में मजदूरी करता हूं। अपनी पत्नी को विद्यालय पहुंचने के लिए बोलकर मैं खुद भी पटना से मदनपुर के लिए रवाना हो गया। लेकिन सुबह जब विद्यालय पहुंचा तो वार्डन का मोबाइल नंबर बंद था। लगभग 8 बजे उनका मोबाइल ऑन होने का मैसेज आया, तो मैं दोबारा कॉल किया। उनके कहने पर जब मैं स्कूल पहुंचा, तो मेरी बेटी मृत थी। उसका पोस्टमार्टम करा दिया गया था। उसने बताया कि उसका सपना था कि उसकी बेटी पढ़ लिख कर ऑफिसर बने। लेकिन प्रबंधन की लापरवाही के कारण उसकी जान चली गई। उसने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है। इस संबंध में थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि मृतका के पिता की ओर से एक आवेदन प्राप्त हुआ है, जिसमें मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। जाम छुड़वाने के बाद सुचारू रूप से आवाजाही शुरू करा दिया गया है। मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।
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