यूजर्स बढ़ रहे, बीटीएस नहीं; नतीजा... नेटवर्क समस्या
मोबाइल, टीवी, वाशिंग मशीन, सीसीटीवी कैमरा से लेकर अब घर की सुरक्षा भी मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर हो गया है। लेकिन, मोबाइल टावर और बीटीएस की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। एक टावर पर चार-चार कंपनियों के बीटीएस लगे हैं। एक का एंटीना ठीक होता है तो दूसरे का खराब हो जाता है। इसका खामियाजा मोबाइल उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। 4जी और 5जी नेटवर्क आने के बाद भी बोरिंग रोड, गांधी मैदान, स्टेशन और कोचिंग संस्थान वाले इलाकों में शाम होते ही मोबाइल नेटवर्क का बैंड बज जाता है। मोबाइल नेटवर्क के विशेषज्ञ और बीएसएनएल के अधिकारी मयंक कुमार बताते हैं-एक नेटवर्क से ही मोबाइल के साथ टीवी, सीसीटीवी कैमरा और पंखा भी काम कर रहा है। इससे एक बीटीएस पर डेटा का दबाव बढ़ गया है। पहले एक बीटीएस पर 1000 मोबाइल उपभोक्ताओं का मानक था, अब 2000 का हो गया है। उपभोक्ताओं के अनुरूप बीटीएस नहीं बढ़ रहे हैं। इसका नतीजा है कि शाम छह के बाद और सुबह 10 से 12 बजे के बीच कॉल ड्रॉप, वॉयस क्लियर नहीं होना और कॉल नहीं लगने की समस्या आम हो गई है। एंटीना का ऑप्टिमाइजेशन नहीं होने से समस्या किसी खास समय और मौकों पर उपभोक्ताओं का जनसंख्या घनत्व अचानक बढ़ जाता है। अथवा छात्र-छात्राओं वाली जगह या कॉरपोरेट संस्थान वाले इलाकों में मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल अधिक होता है। इन जगहों पर नेटवर्क की समस्या सबसे अधिक आती है। यहां शिकायतों के आधार पर बीटीएस के एंटीना का ऑप्टिमाइजेशन करना चाहिए। ऑप्टिमाइजेशन में एंटीना का एंगल ठीक करना होता है। अपार्टमेंट के बेसमेंट और फ्लैट में नेटवर्क नहीं पकड़ पा रहा है। इसके लिए टेलीकॉम कंपनियों की ओर से इन बिल्डिंग सॉल्यूशन के तहत अपार्टमेंट के रूप में टावर लगाने के बजाय हर फ्लोर पर बीटीएस और छोटे-छोटे रिपीटर लगाने होंगे। पटना में सिर्फ सरदार पटेल भवन में ऐसा सिस्टम लगा है। अन्य मॉल में छोटे-छोटे रिपीटर लगाए गए हैं।
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