भोजपुर जिले के कुख्यात अपराधी बूटन चौधरी को STF ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। बिहार पुलिस मुख्यालय ने उस पर 2 लाख का इनाम घोषित कर रखा था। हत्या, आर्म्स एक्ट समेत एक दर्जन संगीन मामले दर्ज है। 6 अप्रैल 2025 को उदवंतनगर थाना क्षेत्र के बेलाउर गांव स्थित बूटन चौधरी के घर से AK-47, 2 मैगजीन, AK-47 के 43 कारतूस, 2 हैंड ग्रेनेड, इंसास राइफल के दो मैगजीन बरामद हुए थे। मौके से बड़े भाई उपेंद्र चौधरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उपेंद्र की पत्नी उर्मिला देवी बेलाउसर पंचायत की मुखिया है। भोजपुर एसपी राज ने कहा कि बूटन और उपेंद्र चौधरी के आपराधिक नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। उनके तार कई सफेदपोश लोगों से जुड़े होने की आशंका है। गिरफ्तारी से जिले में आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगेगी। पंचायत चुनाव से लेकर खौफनाक वारदातों तक बूटन का इतिहास बूटन चौधरी हथियारों का शौकीन रहा है। 2016 में भी पुलिस ने उसे एके-47 और पिस्तौल के साथ पकड़ा था। उस वक्त पंचायत चुनाव में दबंगई दिखाने के लिए उसने हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन किया था। तब कोर्ट ने बूटन को सात साल और उसके भाई उपेंद्र सहित चार अन्य को तीन साल की सजा सुनाई थी। उसका आपराधिक इतिहास लंबा है। बीडीसी सदस्य दीपक साह की हत्या, गोलीबारी समेत कई गंभीर मामलों में वह नामजद है। फिलहाल बेलाउर पंचायत के कई पुराने मामलों में भी वांटेड था। भाई पर संगीन मामले दर्ज बूटन के भाई उपेंद्र चौधरी पर भी हत्या और आर्म्स एक्ट समेत आधा दर्जन गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस उससे यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घर में एके-47 और हैंड ग्रेनेड क्यों रखे गए थे। हथियार कहां से आए। राइफल के नंबर के आधार पर अन्य एजेंसियों की मदद से जांच की जा रही है। करीब डेढ़ दशक पहले बूटन और रंजीत चौधरी की घनिष्ठता दुश्मनी में बदल गई थी। इसके बाद बेलाउर और आसपास का इलाका लगातार खूनी संघर्ष का गवाह बना। 2013 में बूटन पर हमला हुआ था। उसी साल मुखिया चंपा देवी की हत्या का आरोप रंजीत पर लगा था।2016 में चुनाव प्रचार के दौरान हेमंत चौधरी और बाद में उसके बेटे मनीष राय की हत्या कर दी गई। 2017 में वार्ड पार्षद के पति की बस से खींचकर गोली मार हत्या की गई। 2021 में बूटन का भतीजा दीपू चौधरी आरा कोर्ट से लौटते वक्त गोलियों से भून दिया गया। इन घटनाओं में कई परिवारों की खुशियां उजड़ गईं। किसी की मांग सूनी हो गई, तो किसी की गोद।