विश्व पुस्तकालय का प्रथम ग्रंथ है वेद: चिदात्मन

Aug 29, 2025 - 04:30
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विश्व पुस्तकालय का प्रथम ग्रंथ है वेद: चिदात्मन
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सिद्धाश्रम सिमरिया धाम के प्रांगण में स्वामी चिदात्मन जी महाराज की उपस्थिति में विधिपूर्वक सप्त ऋषियों का पूजन व हवन किया गया। इस अवसर पर स्वामी चिदात्मनजी महाराज ने कहा इस दिवस को ऋषि पंचमी भी कहा जाता है। प्रत्येक वर्ष भाद्र महीना के ऋषि पंचमी को इनकी विधिवत पूजा होती है। कहा कि भारत एक महान देश है जिसे आध्यात्मिक देश भी कहा गया है। जहां की संस्कृति सनातनी है,जहां का धर्म सनातन है और जहां का ज्ञान अपौरुषेय है। विश्व पुस्तकालय का प्रथम ग्रंथ वेद है जिसे समझने के लिए अच्छा शास्त्र है जिसे वेदांग कहा जाता है। वेदांगों में एक ज्योतिष शास्त्र है जिसके अनुसार प्रकृति के साथ-साथ कर्म निर्धारित है। जिसमें चातुर्मास श्रावण,भाद्र अश्विनी कार्तिक का समय कहा गया है। उन्होंने कहा कि आज भी ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचांग में हमें प्राप्त होता है। ज्योतिष के अनुसार प्रतिवर्ष भाद्रा में शुक्ल पक्ष के पंचमी को सप्त ऋषियों का पूजन करने का विशेष महत्व है। यह प्रत्यक्ष देवता है जिन्हें प्रमाण की कोई आवश्यकता नहीं है, इनका पूजन करने वाला दीर्घजीवी, यशस्वी और सफल मनोरथ को सिद्ध करने वाला होता है। यह बड़े सौभाग्य की बात है कि बेगूसराय आदिकुंभस्थली सिमरिया धाम में सप्त ऋषियों का विधिवत पूजन होता आया है। साथ ही बेगूसराय में मुख्य रूप से रुदौली, पनसल्ला, भैरवार चक में भारद्वाज ऋषि विद्यमान हैं। वही खम्हार चौक पर गौतम ऋषि की स्थापना एवं पूजन होता है। वैसे ही बेगूसराय के पहसारा में वत्स ऋषि, अहियापुर में शांडिल्य ऋषि और दादपुर व मंझौल में कश्यप ऋषि की स्थापना व पूजन होता है। सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में पुंडरीक ऋषि विद्यमान हैं। आज बड़े ही सौभाग्य की बात है कि विश्व ब्रह्मांड के कल्याणार्थ आदि कुंभस्थली सिमरिया धाम में सभी सप्तर्षियों की विधिवत् पूजा संपन्न हुई। जिसके मुख्य यजमान सर्वमंगला केंद्रीय समिति के सचिव दिनेश प्रसाद सिंह व पूनम देवी थी। जिसमें सिद्धाश्रम के व्यवस्थापक रविंद्र ब्रह्मचारी, नवीन प्रसाद सिंह, मीडिया प्रभारी नीलमणि, सुशील चौधरी, पप्पू त्यागी, तरुण सिंह, राधेश्याम चौधरी, संजयानंद, मनोज कुमार, राम किशोर सहाय, निपेन्द्र सिंह, आचार्य नारायण झा, दिनेश झा, रमेश झा, पवन कुमार, राम झा, श्याम झा, सुरेश झा, सुनीता देवी, रूबी देवी, रंजना देवी, रितु देवी सहित अन्य लोगों की सहभागिता रही।

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