बाढ़ में डूबे श्मशान घाट, सड़क किनारे हो रहा संस्कार:पटना, मनेर-फतुहा में लोग बोले- रास्ता इतना खराब कि पैर फिसल रहा, नगर निगम ऑफिस भी डूबा

Aug 8, 2025 - 08:30
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बाढ़ में डूबे श्मशान घाट, सड़क किनारे हो रहा संस्कार:पटना, मनेर-फतुहा में लोग बोले- रास्ता इतना खराब कि पैर फिसल रहा, नगर निगम ऑफिस भी डूबा
बिहार में लगातार गंगा-सोन नदी के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन के साथ अंतिम संस्कार जैसी जरूरी प्रक्रिया को भी बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। पटना के दीघा घाट, बांस घाट, मनेर, फतुहा क्षेत्रों में स्थिति गंभीर होती जा रही है। मृतकों के परिजन को दाह संस्कार के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी में कई परिवार मरीन ड्राइव के पास सड़क के किनारे बैठकर शवदाह कर रहे हैं। घाटों पर पानी भर जाने से लोग विवश हैं। दैनिक भास्कर ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में विभिन्न घाटों का जायजा लिया है। सड़क किनारे शव जलाने को मजबूर लोग भास्कर संवाददाता ने दीघा घाट और बांस घाट का जायजा लिया तो स्थिति बेहद मार्मिक और दयनीय दिखी। दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से इतना ज्यादा बढ़ा हुआ है कि मरीन ड्राइव के ठीक नीचे तक पानी की धारा बह रही है। दीघा घाट पर बने श्मशान घाट पूरी तरह पानी में डूबे हैं, न तो वहां जाया जा सकता है और न ही शवों को जलाया जा सकता है। परिजन शवों को लेकर लोग मरीन ड्राइव और गंगा के बीच बची थोड़े जमीन पर ही शवदाह करने को विवश हैं। खराब रास्ते की वजह से हो रहा एक्सीडेंट शेखपुरा राजा बाजार से अपने परिजन का शव लेकर पहुंचे राजकुमार ठाकुर ने बताया कि घाट का रास्ता इतना खराब हो चुका है कि मेरा पैर फिसल गया। मोच आ गई। शवदाह गृह तो डूब ही चुका है, लोगों के सुविधाओं के लिए बना शौचालय भी जलमग्न हो गया है, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं, शवदाह गृह के साथ ही नगर निगम का ऑफिस भी जलमग्न हो गया है, जिसकी वजह से नगर निगम के कर्मचारी को सड़क किनारे एक टेंट में अपना ऑफिस बनाना पड़ा है। नगर निगम का शवों के जलाने का सर्टिफिकेट देने वाले कर्मचारी विक्रम कुमार ने भी बताया कि शवदाह गृह और शौचालय के डूबने के कारण लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। बांस घाट पर विद्युत शवदाह गृह के होने से लोगों को थोड़ी राहत भास्कर संवाददाता जब जायजा लेने बांस घाट पहुंचीं तो वहां भी बढ़े जलस्तर का असर देखने को मिला। बांस घाट के किनारे बना श्मशान घाट का तीन चौथाई इलाका पानी में डूब गया है। थोड़े से बचे जमीन पर ही शवदाह करने पर लोग मजबूर है। हालांकि बांस घाट पर बने विद्युत शवदाह गृह के होने से लोगों को थोड़ी राहत मिल रही है। बांस घाट पर मौजूद स्थानीय निवासी उमेश कुमार सिंह ने बताया कि पानी बढ़ने से शवों को जलाने में परेशानी है अगर 10 शव आ जाए तो जगह मिलना मुश्किल है। मनेर के हल्दी छपरा घाट पर ठप पड़ा शवदाह कार्य मनेर के दियारा क्षेत्र में स्थित हल्दी छपरा श्मशान घाट अब पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। गंगा और सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से इस घाट का रास्ता पूरी तरह पानी में डूब गया है। जिसकी वजह से स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल घाट पर शवदाह करने पर रोक लगा दी है। स्थिति यह हो गई है कि अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोग अब मनेर के बजाय पटना शहर के दीघा घाट का रुख कर रहे हैं। हल्दी छपरा घाट जाने वाले रास्ते में चारों तरफ पानी भर गया है, जिससे न केवल शवदाह प्रभावित हुआ है, बल्कि दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी आवाजाही में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फतुहा में श्मशान घाट पर भी हालात बदतर इधर फतुहा में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। गंगा का पानी फतुहा के मुख्य श्मशान घाट तक पहुंच गया है, जिससे शवदाह की प्रक्रिया बुरी तरह बाधित हो रही है। इस घाट का उपयोग प्रतिदिन पटना, नालंदा, जहानाबाद और गया जिलों से आए करीब 50 से 60 शवों के दाह संस्कार के लिए किया जाता है। अब स्थिति यह हो गई है कि घाट का अधिकांश हिस्सा पानी में डूब गया है, जिससे शवदाह स्थल की जगह बहुत सीमित हो गई है। परिजनों को सड़क किनारे ही दाह संस्कार करने को मजबूर होना पड़ रहा है। कई मामलों में लोगों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। व्यापारियों पर भी असर श्मशान घाट के पास मौजूद दुकानों पर भी इस बाढ़ का असर साफ देखा जा सकता है। लकड़ी, कफन, हुमाद, चंदन की लकड़ी और घी जैसी शवदाह सामग्री बेचने वाली कई दुकानें पानी में आधी डूब चुकी हैं। नतीजन, अधिकतर दुकानों को बंद करना पड़ा है, जबकि कुछ दुकानदार सड़क किनारे अस्थायी रूप से अपना व्यवसाय चला रहे हैं। स्थानीय दुकानदार गोलू कुमार ने बताया कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो घाट पूरी तरह जलमग्न हो जाएगा और शवदाह की कोई जगह नहीं बचेगी। "अभी ही लोग बहुत परेशान हैं, पानी और बढ़ा तो लोगों को घाटों तक पहुंचना ही नामुमकिन हो जाएगा।

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