बाढ़ पीड़ितों ने कहा-सुतला मुहाल हो गईल
रूपसपुर से न्यू बाइपास तक एक जैसा हाल राते से बरखा होईत हई..बईठ के बिहान करे पड़ल...सुतला मुहाल हो गईल हे हमनी के। जहिया-जहिया बरखा होईत हई इहे हाल रहित हई। नकटा दियारा से अपना घर-बार छोड़ दीघा के जनार्दन घाट पर शरण लिये लोगों ने इन्हीं शब्दों में अपना दर्द बताया। नकटा दियारा से अपने मवेशियों और परिजनों के साथ आए ललन राय ने कहा कि बाकी सब तो ठीक है, लेकिन सोने में बहुत दिक्कत है। बारिश नहीं होने पर रोड पर सोते हैं। बारिश होने पर बक्कू पर (जानवरों के चारा वाला बोरा) बैठ कर रतजगा करना पड़ता है। पारस राय, अवधेश राय, ददन देव आदि बाढ़ पीड़ितों ने जिला प्रशासन की व्यवस्था को सराहा। कहा-पीने के पानी का इंतजाम है। जानवरों के लिए चारा और इलाज का प्रबंध है। अस्थायी टॉयलेट लगाए गए हैं। दोनों टाइम भोजन मिल रहा है। लेकिन, यह भी कहा कि दोनों टाइम दाल-भात-सब्जी मिल रहा है। एक टाइम रोटी या पूड़ी मिलती तो अच्छा रहता। उधर बारिश की वजह से जानवरों के लिए बने राहत कैंप में इस कदर कीचड़ हो गया है कि जानवर बैठ भी नहीं पा रहे हैं। ज्यादा समय खड़े रहते हैं। पारस राय ने बताया कि चारा के नाम पर सिर्फ कुट्टी मिल रही है, इसलिए गाय-भैंसों का दूध कम हो गया है। कई जानवरों ने तो दूध देना भी बंद कर दिया है। जो दूध निकल रहा है, वह भी औने-पौने भाव में बेचना पड़ रहा है। गर्दनीबाग अस्पताल में जलजमाव गर्दनीबाग अस्पताल और सिविल सर्जन कार्यालय में दो हफ्तों से जलजमाव है। गंदा और बदबूदार पानी घुटनों तक जमा है, जिससे डॉक्टरों, कर्मचारियों और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक अस्पतालकर्मी ने बताया कि सड़े हुए पानी से गुजरना बहुत मुश्किल है। बदबू के कारण कार्यालय में काम मुश्किल हो गया है। अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. सीमा सिंह ने बताया कि कैंपस में ठेहुने तक पानी जमा है। अस्पताल परिसर में कहीं भी सूखी जगह नहीं है, जहां स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराया जा सके। हर साल पानी बढ़ने पर बिंदटोली घिर जाती है नकटा दियारा के बाढ़ पीड़ितों ने जेपी सेतु के समानांतर बन रहे नए ब्रिज से कनेक्टिविटी की मांग सरकार से की। कहा-इससे बाढ़ आने पर आसानी से सुरक्षित जगह तक जल्दी पहुंच सकते हैं। अभी आने-जाने के लिए एकमात्र जरिया नाव है। अभी गंगा के पानी में इतना करंट है कि नाव चलाना मुश्किल हो रहा है। एलसीटी घाट के सामने जेपी गंगा पथ के दक्षिण सड़क किनारे जिला प्रशासन की ओर से बिंद टोली के लोगों के लिए प्लास्टिक और तिरपाल से बनाए गए राहत शिविर का हाल भी अच्छा नहीं है। वे लोग भी बारिश से परेशान हैं। विनोद महतो ने कहा कि हर साल पानी बढ़ने पर बिंदटोली घिर जाती है। घरों में भी पानी घुस जाता है। जलजमाव : 48 एमएम बारिश से मोहल्लों की सड़कें लबालब राजधानी और इसके आसपास के अधिकतर इलाकों में बुधवार को जमकर बारिश हुई। मंगलवार की रात से बुधवार की रात तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। 48 एमएम बारिश होने से दानापुर से पटना मध्य और न्यू बाइपास तक के बड़े इलाके में जलजमाव का संकट पैदा हो गया। मुख्य सड़कों से तो दो-तीन घंटे में पानी निकल जा रहा है, लेकिन वार्डों की गलियों में चलना मुश्किल हो गया है। दानापुर के सगुना मोड़, गोला रोड, रामजयपाल पथ से मध्य पटना के चांदमारी रोड के साथ ही अधिकतर इलाकों की सड़कें जलमग्न रहीं। घरों से निकलने का रास्ता बंद हो गया है। रामकृष्णानगर में एक सड़क पूरी तरह से बह गई, जो दो महीने पहले ही बनाई गई थी। पटना नगर निगम और दानापुर नगर परिषद द्वारा 82 से अधिक अतिरिक्त पंप लगाकर जलनिकासी का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन, रूपसपुर का नाला ओवरफ्लो हो गया है और चौतरफा इसका असर दिखने लगा है। गोला रोड की लेन नंबर-4 में पहली बार जलजमाव हुआ है। इस लेन में दो अस्पताल हैं, जहां मरीजों को आवाजाही में दिक्कत हो रही है। लोगों के घर के आगे वाले रास्ते में पानी लग गया है। लोगों का घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है। जिन सड़कों में अतिरिक्त पंप लगाए गए हैं, वहां का पानी 3 से 5 घंटे में निकल जा रहा है।
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