बक्सर जिले की 1320 मेगावाट बक्सर थर्मल पावर परियोजना अब बिजली उत्पादन के अंतिम चरण में पहुंच गई है। शुक्रवार को जिले के चौसा रेक पॉइंट पर झारखंड के हजारीबाग से कोयले की पहली खेप पहुंची। इस कोयले को ट्रकों के माध्यम से सीधे परियोजना स्थल भेजा जा रहा है। यह बिजली उत्पादन की पहली इकाई के लिए ईंधन के रूप में इस्तेमाल होगा। पहली कोयला खेप के आगमन पर STPL कंपनी के अधिकारियों ने पारंपरिक पूजा-पाठ कर शुभारंभ किया। इस मौके पर सीएफओ नीरज कुमार, एचआर हेड बलजीत सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि यह कोयला पहली इकाई के ट्रायल संचालन के लिए मंगाया गया है। ट्रायल सफल होने के बाद औपचारिक उद्घाटन के साथ बिजली उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 22 अगस्त को गया दौरा प्रस्तावित है। इसी दिन वे इस केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण परियोजना का उद्घाटन भी कर सकते हैं। वर्ष 2019 में पीएम मोदी ने ही इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। कुल 11 हजार करोड़ की लागत से तैयार इस पावर प्लांट में 660 मेगावाट की दो इकाइयां हैं। 85 प्रतिशत बिजली बिहार सरकार को दी जाएगी बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक पानी आपूर्ति प्रणाली का परीक्षण पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अब कोयले की उपलब्धता के साथ प्लांट संचालन के सभी तकनीकी संसाधन तैयार हो चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से तैयार होने वाली 85 प्रतिशत बिजली बिहार सरकार को दी जाएगी। इससे राज्य ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा। स्थानीय लोगों में भी इस परियोजना को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। उनका मानना है कि इसके शुरू होने से जिले और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति में सुधार होगा। साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। बिजली की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों को मिलेगी राहत बक्सर थर्मल पावर परियोजना को बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के ऊर्जा बुनियादी ढांचे में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।इसके शुरू होने से औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है,साथ ही बिजली की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों को राहत भी मिलेगी। यह परियोजना केंद्र सरकार के उन महत्वाकांक्षी प्रयासों का हिस्सा है, जो देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार किए जा रहे हैं। अब सबकी नजरें 22 अगस्त पर टिकी हैं, जब संभवतः प्रधानमंत्री इसके उद्घाटन के साथ ही बक्सर को बिजली उत्पादन के मानचित्र पर एक नई पहचान देंगे।