पटना में रैली की जगह पदयात्रा करेंगे राहुल गांधी:कार्यक्रम का नाम बदलकर अंबेडकर रखा, गांधी मैदान में रात गुजारने की नहीं मिली इजाजत
15 दिन का सफर तय करके महागठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा अब अपनी समापन पर है। 1 सितंबर को राहुल गांधी सहित अन्य नेता गांधी मैदान के गांधी मूर्ति से शुरू होकर हाई कोर्ट के अंबेडकर स्मारक तक 4 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे। इस वोटर अधिकार यात्रा के समापन कार्यक्रम का नाम 'गांधी से अंबेडकर' रखा गया है। इस पदयात्रा के जरिए राहुल गांधी आंदोलन के जरिए संविधान बचाने का संदेश देना चाहते हैं, साथ ही सड़क की सियासत को सत्ता तक ले जाना चाहते हैं। गांधी मैदान उपलब्ध नहीं होने पर लिया गया फैसला हालांकि, इस पदयात्रा से पहले रैली का कार्यक्रम था, जिसे बाद में बदल दिया गया। कांग्रेस की ओर से रैली के दिन 1 सितंबर को गांधी मैदान नहीं उपलब्ध हो पाने के कारण यह फैसला लेने की बात कही गई है। वह समय रहते गांधी मैदान को आवंटित नहीं करा पाए। मगर इसके बावजूद उन्होंने पटना के अन्य मैदान जैसे वेटनरी कॉलेज ग्राउंड या मिलर ग्राउंड को आवंटित न करके सीधे पदयात्रा का ऐलान कर दिया। आखिर इस बदलाव का क्या कारण है। इस पदयात्रा से राहुल क्या मैसेज देना छह रहे हैं। पढ़िए इस रिपोर्ट में... 4 पॉइंट में समझिए कि आखिर पटना में राहुल की रैली क्यों पदयात्रा में बदली सीनियर जर्नलिस्ट प्रवीण बागी ने कहा कि राहुल गांधी इस पदयात्रा से संविधान के रक्षक होने का संदेश देना चाहते हैं। वह महात्मा गांधी का आंदोलन और अंबेडकर के संविधान को साथ लेकर चलना चाहते हैं। वोट चोरी को मुद्दा बनाकर वह गांधी से अंबेडकर तक पदयात्रा करके अब यह मैसेज देना चाहते हैं कि वोट की चोरी को बचाकर वह लोकतंत्र को बचा रहे हैं और अंबेडकर के संविधान की रक्षा कर रहे हैं। 2. भीड़ कम होने का डर सीनियर जर्नलिस्ट अरुण पांडे कहते हैं की राहुल इस वोटर अधिकार यात्रा में 1300 किलोमीटर से ज़्यादा की यात्रा कर रहे हैं। इस दौरान वह अलग-अलग जिलों में गए हैं। ऐसे में अब जब पटना में रैली होगी तो उन्हीं जिलों से भीड़ को फिर से जुटा पाना संभव नहीं हो पाएगा। इससे रैली में भीड़ कम होने का डर है और अगर ऐसा हुआ तो नेगेटिव मैसेज जाएगा। 3.गांधी मैदान के अन्य रैलियों से तुलना होगी प्रवीण बागी कहते हैं गांधी मैदान में रैलियों का इतिहास रहा है। यहीं से जेपी ने संपूर्ण क्रांति की शुरुआत की थी। इस रैली में जेपी की एक आवाज पर गांधी मैदान में पांच लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ जुट गई थी। वहीं, लालू यादव ने गांधी मैदान में 1994 से 2004 के बीच कई रोचक नामों वाली रैलियां की और खूब भीड़ जुटाई थी। इसमें गरीब रैला, महागरीब रैली, चेतावनी रैली शामिल है। ऐसे में अब जब राहुल गांधी यहां कोई रैली करते तो इसकी तुलना पिछली रैलियों में आए भीड़ से जरूर होती। ऐसे में अगर उतनी भीड़ नहीं जुटती तो राहुल उस तुलना में पिछड़ जाते। 4. भाजपा का प्रदर्शन वोटर अधिकार यात्रा के दौरान दरभंगा में मंच से प्रधानमंत्री को लेकर अपशब्द कहने का मामला तेज हो गया है। बीते दिनों कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर भिड़ंत हुई। भोजपुर में भी यात्रा के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी को काले झंडे दिखाए। ऐसे में अगर रैली होती तो बीजेपी के द्वारा बवाल होने के चांस रहते। हल्ला-हंगामा, नारेबाजी होती और महौल ख़राब होता। पटना में पदयात्रा का रूट गांधी मैदान गेट नंबर- 1→ एसपी वर्मा रोड→ डाकबंगला चौराहा→ कोतवाली थाना→ इनकम टैक्स गोलंबर→ नेहरू पथ→ आंबेडकर मूर्ति महागठबंधन के नेता की भूमिका सिर्फ गेस्ट आर्टिस्ट की सीनियर जर्नलिस्ट प्रवीण बागी कहते हैं कि इस यात्रा को लेकर राहुल गांधी का मूल मकसद बिहार में कांग्रेस को स्थापित और मजबूत करना का है। यह बस कहने के लिए महागठबंधन की यात्रा है, मगर हकीकत में यह यात्रा का आइडिया कांग्रेस की ब्रेन चाइल्ड है। महागठबंधन के नेता की भूमिका सिर्फ इसमें गेस्ट आर्टिस्ट की है और वह उतना ही कर रहे हैं। जो मूल कार्यक्रम कांग्रेस तय करती है उसके हिसाब से ही वह एक्ट करते हैं। राहुल गांधी सड़क की सियासत को सत्ता तक ले जाना चाहते हैं। अपने ऊपर लगे शहजादे के भ्रम को तोड़ेंगे उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी पर आरोप लगाता रहा है कि वह शहजादे हैं, राजकुमार हैं, बड़े घर के हैं तो खानदानी राजनीति कर रहे हैं, उनका कोई खुद का जनाधार नहीं है, तो इस आरोप को भी वह इससे झुठलाएंगे कि वह तो जनता के बीच घूम रहे हैं, सड़कों पर घूम रहे हैं। इसलिए वह आम आदमी है और आम आदमी की लड़ाई लड़ना चाहते हैं। राहुल के हाथ में कमान राजद के लिए चुनौती प्रवीण बागी ने आगे कहा कि इस पूरी यात्रा में भले ही महागठबंधन साथ दिखी हो, मगर यह राजद के लिए बड़ी चुनौती है। सबसे बड़ा मामला सीट शेयरिंग का है। कांग्रेस ने पिछले चुनाव में अच्छा परफॉर्मेंस नहीं दिया था। इसके चलते राजद यह आरोप लगाती है की उनकी सरकार नहीं बन पाई। दूसरी ओर इस चुनाव में कांग्रेस 70 सीट की डिमांड कर रही है, जिसे राजद 50-55 में ही निपटाना चाहती है। ऐसे में इस पदयात्रा में राहुल ने कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन किया है।
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