औरंगाबाद में टीचर्स कॉन्क्लेव 2025 का आयोजन:बिहार विधान परिषद के सभापति बोले- शिक्षक गढ़ते हैं देश का भविष्य
औरंगाबाद के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित नगर भवन में रविवार को टीचर्स कॉन्क्लेव 2025 आयोजित किया गया। जिसमें बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि शिक्षक का पद सबसे बड़ा पद है। आप ही मेधा तैयार करते हैं। शिक्षक समाज को सम्मानित करना हम सबका दायित्व है। आयोजन का उद्घाटन मुख्य अतिथि बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि हर गुरु चाहता है कि उसका शिष्य उससे आगे बढ़े और बिहार की शिक्षा को गौरवान्वित करे। राजनीति और सामाजिक जीवन में ढलने की सीख भी शिक्षा से ही मिलती है। आप अपनी समस्याओं के साथ हमारे पास आएं, हमारे दरवाजे हमेशा खुले हैं। शिक्षकों का वेतन महंगाई के अनुरूप बढ़ना चाहिए ताकि वे आत्मनिर्भर रह सकें। सभापति अवधेश नारायण सिंह के साथ आयोजन समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह, उपाध्यक्ष बसंत दुबे, प्रधानाध्यापिका रेनू राय, वैदेही कुमारी, प्रधानाध्यापक श्रीनिवास मंडल, राजेश कुमार तिवारी और प्रमोद कुमार रवि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अंबुज को मिला सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का सम्मान इस अवसर पर औरंगाबाद, गया और रोहतास से आएं 75 नवनियुक्त प्रधानाध्यापकों को मुख्य अतिथि ने सम्मानित किया। इनमें 30 प्रधानाध्यापिकाएं भी शामिल थीं। शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण कार्य, नवाचार, प्रभावी शिक्षण पद्धतियों के प्रयोग और लेखन में उत्कृष्ट योगदान के लिए उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय अहियापुर, हसपुरा के प्रधानाध्यापक अंबुज कुमार को वर्ष 2025 का ‘सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार’ प्रदान किया गया। उन्हें अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न और 21 हजार रुपए का चेक सम्मानस्वरूप दिया गया। बता दें कि अंबुज कुमार ने पुरस्कार की केवल एक रुपए की राशि स्वीकार की और शेष राशि शिक्षक संघर्ष में सहयोग के लिए आयोजन समिति को समर्पित कर दी। प्रधानाध्यापकों को मिलेगी प्राचार्य की उपाधि टीचर्स कॉन्क्लेव 2025 में बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यक्रम एक नई शुरुआत है। जिसका उदाहरण अन्यत्र देखने को नहीं मिलता। कहा कि आपकी मांगों से हम पूरी तरह अवगत हैं। पहले की तरह अब प्रधानाध्यापक को ‘प्राचार्य’ की उपाधि दी जाएगी। साथ ही प्रधानाध्यापकों का वेतन बढ़ाया जाए। इसके लिए सरकार के पास वे अपनी बात रखेंगे। उन्होंने कहा, “शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने और विद्यालय शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए यह पहल अत्यंत सराहनीय है। शिक्षकों के इस समागम ने एक नई दिशा और नई ऊर्जा दी है। मैं आयोजकों को बधाई देता हूं और आश्वस्त करता हूं कि शिक्षकों की इस पहल में जो भी आवश्यक सहयोग होगा, मैं उसे उपलब्ध कराने के लिए सदैव तैयार हूं।” जिले में शिक्षकों के लिए गेस्ट हाउस का निर्माण कराया जाएगा। आप जमीन उपलब्ध कराइए, निर्माण की जिम्मेदारी मेरी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुर्सी के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। “आपके सम्मान के लिए जो भी करना होगा, मैं करूंगा। आयोजन समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि शिक्षक आज कृतसंकल्पित होकर छात्रहित में कार्य कर रहे हैं। पिछले दो वर्षों में स्कूली शिक्षा में सकारात्मक बदलाव आया है और यह क्रम आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को समाज के लिए आधारभूत स्तंभ बताते हुए उनके योगदान की सराहना की। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां शैक्षणिक विमर्श के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी सभी का मन मोह लिया। नृत्य शिक्षिका सौम्या श्री ने अपनी कत्थक नृत्य प्रस्तुति से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, शिक्षक सनोज सागर, शिक्षिका तेजस्विनी सिंह, मंजू पन्ना, मुन्नी कुमारी और नेहा आर्या ने गायन से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। संगीत शिक्षक चंदन कुमार, वेद प्रकाश और कुशलेश समदर्शी ने भी लोकगायन प्रस्तुत कर सभागार में उत्साह का माहौल बना दिया। संचालन और उपस्थिति कार्यक्रम का सफल संचालन उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय बैराव के प्रधानाध्यापक विनय कुमार गुप्ता ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक विवेक कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया। इस मौके पर प्रधानाध्यापक कुंदन कुमार सिंह, रामाकांत प्रसाद, शब्बीर आलम, अलका कुमारी, मंजीत कुमार, देवेंद्र कुमार सिंह, सचिंद्र प्रताप सिंह, शशिकांत चौबे, जयप्रकाश सिंह, ओमप्रकाश, सुरेंद्र राम सहित अन्य मौजूद रहे।
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