पूर्णिया में अनुकंपा कर्मी नियुक्ति के इंतजार में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिले के 198 कर्मी ज्वाइनिंग की मांग को लेकर पिछले 7 साल से डीएम से लेकर डीईओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। 14 अगस्त को परिचारी और लिपिक पद के लिए नियुक्ति पत्र बांटा जाना है। मगर अब तक काउंसिलिंग शुरू नहीं हुई। कर्मियों का आरोप है कि विभाग कागजी कार्रवाई का हवाला देकर लगातार टालमटोल कर रहा है, मगर बहाली की कोई आश नहीं दिख रही। मंगलवार को इससे नाराज अनुकंपा कर्मी डीईओ दफ्तर पहुंचे। कार्यालय में विरोध जताते हुए प्रदर्शन किया। चूनापुर इलाके की रहने वाली अनुकंपा कर्मी विभा कुमारी ने कहा कि पति की जगह पर उनका विद्यालय परिचारी के पद पर नियुक्ति होनी है, मगर इस नियुक्ति को 2018 से ही टाला जा रहा है। पिछले 7 साल से वे विभाग के चक्कर काट रही हैं, मगर इसके बाद भी उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी है। सभी अनुकंपा कर्मियों की नियुक्ति के लिए 14 अगस्त की तारीख निर्धारित है। मगर पूर्णिया में अब तक इसकी काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। डीईओ और स्थापना दोनों ही दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं। कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद आज उन्हें डीईओ दफ्तर का घेराव करना पड़ा। मेधा सूची का भी प्रकाशन नहीं हुआ सीएम नीतीश कुमार का आदेश है कि चुनाव से पहले सभी अनुकंपा धारियों की नियुक्ति करा ली जाए। इसके लिए पिछले 1 महीने से नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। अपनी नियुक्ति को लेकर वे लगातार विभागीय चक्कर काट रहे हैं। मगर अब तक इसका रास्ता साफ नहीं हुआ। 6 से 13 अगस्त तक सभी अभ्यर्थियों को अपना दस्तावेज जमा कराना था। 14 से नियुक्ति करानी है। इसके बावजूद न काउंसलिंग की गई और न ही मेधा सूची का ही प्रकाशन हो सका। ये विभाग की घोर लापरवाही है। बिहार के सभी जिले में अनुकंपा आधारित नियुक्ति हो चुकी है, सिर्फ पूर्णिया जिले में भी इसे लटका कर रखा गया है।