डेंगू के मरीजों को शुरू में ही चिह्नित कर उपचार के बारे में दी जानकारी
हेल्थ रिपोर्टर|मधुबनी डेंगू एवं चिकनगुनिया के इलाज हेतु जिला अंतर्गत सभी चिकित्सा पदाधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन मॉडल अस्पताल में किया गया। कार्यक्रम में सभी प्रखंडो के एमओआईसी ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा पदाधिकारियों को डेंगू एवं चिकनगुनिया के क्लीनिकल मैनेजमेंट से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित चिकित्सकों को डेंगू के मरीज को प्रारंभिक अवस्था में ही चिह्नित कर समुचित इलाज के गुर बताया ताकि चिकित्सक ससमय सही उपचार प्रारंभ कर सके और जटिलताओं को रोका जा सके। निदान के साथ ही रोगियों को प्रतिवेदित करने और व्यापक निरोधात्मक कार्रवाई प्रारंभ करने पर भी बल दिया, ताकि डेंगू के प्रसार को रोका जा सके। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डी.एस सिंह ने बताया कि बरसात के मौसम में डेंगू फैलाने वाले एडिस मच्छर घरों के आसपास बिखरे टूटे फूटे बर्तनों, गमलों, टायर, छोटे छोटे प्लास्टिक या कागज के डिस्पोजेबल कप, नारियल के खोपरे आदि में जमा बारिश के पानी में अंडे देते हैं, जो एक सप्ताह में मच्छर बन जाते हैं। इसे रोकने के लिए घरों के आस पास, छतों पर या घर के अन्दर पानी जमा न होने दें और सप्ताह में दो बार पानी को बदलते रहें। एडिस मच्छर साफ पानी मे पनपता है और दिन मे ही काटता है। विदित होकर वर्ष 2024 में जिले में डेंगू के 58 मरीज प्रतिवेदित हुए थे। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सिंह ने कहा कि डेंगू एवं चिकनगुनिया नियंत्रण के लिए सदर अस्पताल में 10 बेड सभी अनुमंडलीय अस्पतालों में 4 बेड तथा सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 2-2 बेड डेंगू वार्ड के लिए सुरक्षित किया गया है। सभी बेड को मेडिकेटेड मच्छरदानी युक्त किया गया है, साथ ही संबंधित मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त मात्रा में दवा की व्यवस्था सभी अस्पतालों में उपलब्ध रखने का निर्देश दिया गया है। रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है तथा एक नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। जिला में डेंगू नियंत्रण के लिए नोडल चिकित्सा पदाधिकारी एवं फॉगिंग तथा लार्विसाइडल स्प्रे के लिए नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू की जांच के लिए एनएस 1 एंटीजन किट उपलब्ध है। सदर अस्पताल में कंफर्मेटरी डेंगू जांच के लिए एलिजा किट एवं एलिजा रीडर मशीन उपलब्ध है। डेंगू के मरीज के पुष्टि होने पर मरीज के निवास स्थान के 500 मीटर क्षेत्रों मे जिला मलेरिया कार्यालय द्वारा टेक्निकल मालाथियोन द्वारा फागिंग व लार्विसाइडल का छिड़काव कराया जाता है, साथ ही इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों द्वारा एक्टिव सर्विलांस कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि नए मरीजों की खोज की जा सके। वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने कहा कि डेंगू से बचाव के लिए सतर्कता सहित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जन समुदाय से उचित योजना के तहत डेंगू की रोकथाम एवं गतिविधि में सहभागिता ली जाएगी। मौके पर एसीएमओ डॉक्टर एस.के.झा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एस के विश्वकर्मा,डीपीएम पंकज कुमार मिश्रा, जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. जी.एम. ठाकुर, सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन सहित अन्य उपस्थित थे।
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