चंदा देवी ने पूरी की सात दिवसीय कठोर तपस्या:जल पर रहकर किया उपवास, समाज ने किया सम्मान
बिहारीगंज निवासी जैन धर्मावलंबी झुमरमल पुगलिया की धर्मपत्नी चंदा देवी पुगलिया ने सात दिवसीय तपस्या शुक्रवार को सफलतापूर्वक पूरी की। उन्होंने लगातार 7 दिनों तक केवल जल पर उपवास रखा। इस दौरान उन्होंने संयम, तप और आत्मशुद्धि का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। तपस्या के पूर्ण होने पर एक अनुमोदना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों ने हिस्सा लिया। सभी ने तपस्विनी के तप को नमन करते हुए उन्हें बधाई दी। जैन धर्म में उपवास को तपस्या का एक महत्वपूर्ण रूप माना जाता है। इसे "तप" कहा जाता है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में प्रार्थना की कि ऐसा संयम, आत्मबल और आत्मधर्म सभी को प्राप्त हो। चंदा देवी की यह तपस्या व्यक्तिगत आत्मबल का प्रतीक रही। साथ ही यह पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने चंदा देवी के इस तप को अद्भुत बताया। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे आत्मिक प्रयास आज की आवश्यकता हैं। इस अवसर पर कमल पटावरी, नवरत्न सेठिया, बजरंग लाल लखोटिया, विजय कुमार बोथरा, संतोष देवी पटावरी, सुमन बोथरा, विशाल जैन, पुष्पा देवी, संजय पुगलिया, सरिता पुगलिया, अभिषेक जैन सहित कई नागरिकों ने भाग लिया। सभी ने तपस्वी चंदा देवी को उनके अद्वितीय तप के लिए बधाई दी।
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