पटना में सोमवार को बिहार राज्य योग प्रशिक्षक संघ की ओर से बीजेपी कार्यालय का घेराव किया गया। कार्यालय के पास बड़ी संख्या में जुटे प्रशिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी पांच सूत्रीय मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी ओर ध्यान नहीं दिया गया। योग प्रशिक्षकों ने बताया कि राज्य सरकार ने हाल ही में कई वर्गों के लोगों की मांगें पूरी कीं और कई का वेतन भी दोगुना किया, लेकिन योग प्रशिक्षकों को अनदेखा कर दिया गया। “हमारी स्थिति बेहद दयनीय है। हमें एक दिन का मात्र 250 रुपए मिलता है। अगर पूरे महीने काम करें तो 7,500 रुपए से अधिक आय नहीं होती,” एक प्रदर्शनकारी ने कहा। उन्होंने बताया कि कई प्रशिक्षकों को तो सिर्फ 10 क्लास का भुगतान मिलता है, जिससे उनकी मासिक कमाई बेहद कम हो जाती है। संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से अपील की कि योग प्रशिक्षकों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि योग सेहत और जीवनशैली सुधारने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसे बढ़ावा देने वाले प्रशिक्षक खुद आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। संघ ने अपनी पांच सूत्रीय मांगें स्पष्ट रूप से सामने रखीं 1. राज्य में योग आयोग का गठन किया जाए। 2. योग प्रशिक्षकों का स्थायीकरण किया जाए। 3. स्वास्थ्य विभाग में योग प्रशिक्षकों को पार्टटाइम की जगह फुलटाइम किया जाए और उन्हें सम्मानजनक वेतन दिया जाए। 4. आयुष विभाग में योग प्रशिक्षकों के रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए। 5. शिक्षा क्षेत्र के सभी शिक्षण संस्थानों में योग विषय को अनिवार्य किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उनका कहना है कि योग प्रशिक्षक राज्य में स्वास्थ्य जागरूकता और मानसिक-शारीरिक संतुलन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए सरकार को उन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए।