रेलवे ट्रैक पर धरना-प्रदर्शन, 10 मीटर करीब आकर रुकी ट्रेन:रेलवे अंडरपास में जलजमाव के बाद लोगों रास्ता बाधित, विरोध जताने के लिए पटरी पर बैठे थे
नालंदा में बख्तियारपुर-राजगीर रेलखंड पर रेलवे के अंडरपास में 15 फीट तक पानी जमा हो गया। 12 से अधिक गांवों का संपर्क एक सप्ताह से पूरी तरह कट चुका है। ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल ले जाने और मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में असमर्थ हैं। सैकड़ों आक्रोशित ग्रामीणों ने शुक्रवार को इमली बिगहा और वेना हॉल्ट के बीच राजगीर-हरिद्वार स्पेशल ट्रेन (गाड़ी संख्या 03223) को रोककर रेलवे ट्रैक पर ही धरना दे दिया, जिससे यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। ट्रेन के लोको पायलट दीपक कुमार ने बताया कि वे अपनी सामान्य गति से ट्रेन चला रहे थे, तभी अचानक उन्होंने देखा कि ट्रैक पर 250 से 300 लोग लाल झंडा लेकर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के इतने लोग अचानक ट्रैक पर आ गए। हम लोग खुद डर गए थे कि कितने लोग कटेंगे। ईश्वर की कृपा से इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को भीड़ से महज 10 मीटर पहले रोकने में कामयाब रहे, नहीं तो समझ नहीं आता कि क्या होता। अंडर पास में पानी भरने के बाद परेशानी ग्रामीणों ने बताया कि पहले वे रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर से आते-जाते थे, लेकिन हाल ही में रेलवे ने उस क्रॉसिंग को बंद कर दिया और नीचे से एक अंडरपास बना दिया। पिछले एक सप्ताह से हो रही बारिश के कारण यह अंडरपास पूरी तरह पानी से भर गया है, जिसमें 15 फीट तक पानी जमा है। इस वजह से इमली बिगहा, सलेमपुर, सुपासंग, पथना, चंदवारा, उफड़ौल और कुतुबपुर समेत सुपासंग पंचायत के लगभग एक दर्जन गांवों का संपर्क मुख्य रास्ते से कट गया है। प्रदर्शन में शामिल इमली बिगहा निवासी श्याम किशोर कुमार ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि "पूरा पंचायत पानी से ग्रसित है। अंडरपास में इतना पानी है कि आदमी तो क्या, गाड़ी भी पार नहीं हो सकती। अगर किसी को कोई परेशानी हो गई, कोई डिलीवरी पेशेंट हो, तो वह रास्ते में ही रह जाएगा। मेन निकास यही था, जो अब बंद है। समाधान निकालने की मांग ग्रामीण महिला मिंकी कुमारी ने कहा कि हम लोग एक सप्ताह से बाजार नहीं गए हैं। बाल-बच्चा पढ़ने नहीं जा रहा है। रातों-रात दीवार बना दी गई, अब हम जाएं तो जाएं कैसे?" ग्रामीणों की एक ही मांग है कि या तो इस अंडरपास को तोड़कर पहले जैसा रास्ता चालू किया जाए या फिर पानी निकासी का कोई स्थायी समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि जब तक सीओ या कोई बड़ा अधिकारी आकर ठोस आश्वासन नहीं देता, वे ट्रैक से नहीं हटेंगे।
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