म्यांमार में 17 हजार की AK-47,बिहार आते-आते रेट 7 लाख:UP में चाहिए तो 8 लाख लगेंगे; मणिपुर-नागालैंड के रास्ते हथियार तस्करी का पूरा रूट

Aug 21, 2025 - 12:30
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म्यांमार में 17 हजार की AK-47,बिहार आते-आते रेट 7 लाख:UP में चाहिए तो 8 लाख लगेंगे; मणिपुर-नागालैंड के रास्ते हथियार तस्करी का पूरा रूट
नागालैंड से बिहार में AK-47 की तस्करी के मामले में NIA ने वैशाली और मोतिहारी में रेड की है। ये छापेमारी वैशाली में राजू राय और राजू सिंह के घर चली। ये पूरी कार्रवाई जेल में बंद मुजफ्फरपुर के देवमुनि राय के इनपुट पर हुई। देवमुनि राय ने पूछताछ में बताया था कि मैंने राजू राय और राजू सिंह के घर भी हथियार रखे थे। देवमुनि राय को एजेंसी ने दिसंबर 2024 में उठाया था। कोर्ट में सब्मिट पुलिस की केस डायरी में देवमुनि राय उर्फ अनीश और हथियार तस्कर विकास-सत्यम के बीच की बातचीत भी है। जिसमें वो कहता है- ‘यार, रुतबा बढ़ाना है। बड़ा हथियार (AK-47) चाहिए। कुछ व्यवस्था करो। उधर से जवाब आता है ठीक है, हो जाएगा। पैसा तैयार रखो। बस इतनी बात हुई और 7 लाख रुपए में AK-47 हथियार घर आ गया।’ तीनों इस वक्त पटना की बेऊर जेल में बंद हैं। दरअसल, बिहार-UP सहित देश के कई राज्यों में नगालैंड से AK-47 की तस्करी हो रही है। AK-47 को अलग–अलग पार्ट्स में ट्रेन से नगालैंड से बिहार लाया जाता है। यहां असेंबल कर हथियार तैयार किया जाता है। भारत में आते ही इसकी कीमत बढ़ जाती है। म्यांमार में 17 हजार रुपए (भारतीय) में बिकने वाला हथियार नगालैंड की राजधानी दीमापुर में 5 लाख रुपए का हो जाता है। बिहार में 7 लाख, तो UP में 8 लाख रुपए में बिकता है। कीमत डिमांड और सप्लाई पर तय होती है। बिहार में AK-47 के मामले में दिसंबर 2024 में NIA की रेड के बाद भास्कर ने भी हथियार तस्करी को लेकर पड़ताल की शुरू की। हमें मुजफ्फरपुर पुलिस की केस डायरी, आर्मी इंटेलिजेंस, BSF और पुलिस के टॉप अथॉरिटी से मुलाकात के बाद AK-47 की अवैध तस्करी के मामले में तमाम इनपुट मिले। हालांकि, सभी अधिकारियों ने नाम छापने से इनकार कर दिया, लेकिन अहम जानकारियां साझा की हैं। पढ़िए ,भास्कर की 20 दिनों की पड़ताल…। पड़ताल की शुरुआत में हमारे सामने तीन अहम सवाल थे… पहला : भारत में AK-47 की तस्करी कहां से हो रही है? दूसरा : भारत में कौन से संगठन और लोग तस्करी में शामिल हैं? तीसरा : इस अवैध हथियार का रूट मैप क्या है, और कितने में बिक रहा है? अब चलिए पहले सवाल से आगे बढ़ते हैं… भारत में AK-47 की तस्करी कहां से हो रही है? BSF की इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, ‘म्यांमार-चीन बॉर्डर से भारत में AK-47 की सप्लाई हो रही है। ये नार्थ ईस्ट के उग्रवादी संगठनों के साथ-साथ देश के नामी बाहुबलियों तक पहुंच रही है। इसका ट्रांजिट रूट बिहार बन गया है।’ आर्मी इंटेलिजेंस और NIA के सोर्सेज के मुताबिक, ‘खरीदने वाले और तस्करों के बीच रुपए का लेनदेन हवाला के जरिए होता है। बिटकॉइन से भी हो रहा है। भारत के अंदर तस्करों के बीच लेनदेन कैश में होता है।’ हालांकि, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में हथियारों की तस्करी के मामले की जांच में एक अलग ही मोड सामने आया था। तस्करों ने डार्क वेब के जरिए ऑर्डर किए थे और इस मामले में रुपए का लेनदेन बिटकॉइन के जरिए हुआ था। इस केस में NIA की टीम ने बिहार समेत 5 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की थी। इसमें पाकिस्तान के हथियार तस्करों का हाथ सामने आया था। कालादान नदी के रास्ते भारत में आती हैं AK-47 BSF और आर्मी इंटेलिजेंस के सोर्सेज के मुताबिक, ‘ भारत में अवैध हथियारों की पहली एंट्री मणिपुर के मोरेह में होती है, जो मणिपुर की राजधानी इंफाल से करीब 110 किलोमीटर दूर और म्यांमार इंटरनेशनल बॉर्डर के पास है। एंट्री दोनों देशों के तस्करों के बीच कैरियर के रूप में काम करने वाले करवाते हैं।’ AK- 47 की तस्करी के मामले में बेऊर जेल में बंद तस्कर अहमद अंसारी ने पूछताछ में जांच एजेंसी को बताया, ‘हथियार तस्करी के मामले में नगालैंड के स्थानीय नागा इन्वॉल्व हैं। बॉर्डर के आसपास के लोग ही कैरियर होते हैं। इन्हें नदी और जंगल से होकर गुजरने वाले आसान और कठिन रास्तों की पूरी जानकारी होती है। इसके एवज में इन्हें मोटी रकम मिलती है।’ मणिपुर के मोरेह और म्यांमार के बीच कालादान नदी बहती है। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हथियारों की तस्करी सबसे अधिक इसी नदी के रास्ते से होती है। दीमापुर में होता है स्टॉक, फिर होती है सप्लाई हथियारों की खेप जब मणिपुर पहुंच जाती है तो उसे तस्कर ऑर्डर के हिसाब से अलग-अलग जगहों पर पहुंचाते हैं। इसके बाद नेशनल हाईवे (NH) से ही अलग-अलग गाड़ियों में छिपाकर AK-47 के पार्ट्स को नगालैंड के दीमापुर पहुंचाया जाता है। यहां तस्कर स्टॉक करते हैं। फिर UP-बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान या फिर जिन राज्यों से डील हो जाए, वहां सप्लाई करते हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर पुलिस की केस डायरी के मुताबिक, ‘दीमापुर में म्यांमार से आई AK-47 की कीमत बढ़ जाती है। तस्कर एक हथियार को 5 लाख रुपए में बेचते हैं। बिहार-UP या फिर दूसरे राज्यों में छोटे हथियार तस्कर इसे 7 लाख रुपए तक में बेच डालते हैं।’ पैरा मिलिट्री फोर्स के अधिकारी ने बताया.. म्यांमार में AK-47 की शुरुआती रेंज 12 हजार रुपए (भारतीय रुपए) है। इसमें अच्छी क्वालिटी वाले हथियार की कीमत 17 हजार रुपए तक है। किस्तों में ट्रेन से भेजते हैं AK-47 के पार्ट्स AK-47 की लंबाई 34.3 इंच होती है। इसका वजन 4 किलो 300 ग्राम है। अलग-अलग तरह के कुल 15 पार्ट्स से बना होता है। इस कारण इस हथियार को भारत के अंदर समूचे तौर पर एक जगह से दूसरे जगह नहीं पहुंचाया जा सकता है। आर्मी इंटेलिजेंस के मुताबिक, ‘तस्कर सप्लाई के लिए एक-एक पार्ट्स को अलग-अलग पैक कर किस्तों में ट्रेनों की पार्सल बुकिंग से भेजते हैं, क्योंकि पार्सल को चेक करने का कोई मैकेनिज्म रेलवे के पास नहीं है। सिर्फ पार्सल बुक कराने वाले का पहचान पत्र देखा जाता है।’ हथियार को असेंबल करने में अधिक वक्त नहीं लगता है। अगर कोई इस हथियार को चलाने में एक्सपर्ट और उसके पास पूरी जानकारी है तो उसे सारे पार्ट जोड़कर AK-47 को असेंबल करने में महज डेढ़ से दो मिनट लगता है। बिहार के हथियार तस्कर विकास और सत्यम भी AK-47 के पार्ट्स के साथ ही मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन के पास से पकड़ाए थे। इस से भी इस बात की पुष्टि होती है कि AK-47 को अलग–अलग पार्ट्स में भेजा जाता है। 2. भारत में कौन से संगठन और लोग तस्करी में शामिल हैं? आर्मी इंटेलिजेंस के मुताबिक, ‘असम, नगालैंड और मणिपुर में एक्टिव उग्रवादी संगठन ही हथियारों की तस्करी बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। इसमें प्रमुख रूप से 8 संगठनों के नाम सामने आ चुके हैं। इनके पास 3 तरीकों से रुपए आते हैं।’ 1. इन संगठनों को गुप्त तरीके से फंडिंग की जाती है। 2. म्यांमार से ड्रग्स का कारोबार कर रुपए कमाते हैं। 3. अपने इलाके में भी ये सरकार की तरह टैक्स वसूलते हैं। तीनों तरीकों से जो रुपए आते हैं, उसका इस्तेमाल म्यांमार से अवैध हथियारों, गोली और विस्फोटकों की खरीदारी में करते हैं। फिर इनकी खेप भारत के अलग-अलग ठिकाने पर भेजते हैं और कम लागत में बड़ा मुनाफा कमाते हैं। बिहार में हुई दो तस्करों की गिरफ्तारी से पता चलता है कि, नए लड़के इस काम से जुड़े हुए हैं। बिहार के विकास और सत्यम दोनों सालों से नगालैंड में रहने वाले अहमद अंसारी के जरिए तस्करी में शामिल थे। अहमद अंसारी नागाओं के संपर्क में था। नागाओं की लिंक म्यांमार से है। बिहार के मोतिहारी का रहने वाले अहमद अंसारी नगालैंड के दीमापुर में गैरेज चलाता था। इस केस से तस्करी में शामिल लोगों के नेटवर्क का पता चलता है। 3. इस अवैध हथियार का रूट मैप क्या है ? हमने इस मामले में NIA से पक्ष जानने के लिए फोन और मैसेज किया, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है। जवाब आते ही एजेंसी का पक्ष भी स्टोरी में शामिल किया जाएगा। ग्राफिक्सः सौरभ कुमार

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