मगध विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों के खातों का ऑडिट होगा:विवि ने ऑडिटर नियुक्त किया, विद्यार्थियों से प्राप्त नामांकन शुल्क का सत्यापन होगा
मगध विश्वविद्यालय प्रशासन ने वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत समन्वय को मजबूत करने की दिशा में निर्णय लिया है कि विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले सभी अंगीभूत महाविद्यालयों के खातों का व्यापक ऑडिट कराया जाएगा। जिसके लिए विश्वविद्यालय से ऑडिटर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा विद्यार्थियों से प्राप्त नामांकन शुल्क का सत्यापन किया जाएगा और प्रत्येक महाविद्यालय को उसका निर्धारित हिस्सा पारदर्शी और निष्पक्ष रूप से वितरित किया जाएगा। इस कार्य को सुचारु, निष्पक्ष और तकनीकी दृष्टि से सुसंगत रूप में संपन्न करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति समस्त लेन-देन की जांच कर यह सुनिश्चित करेगी कि हर महाविद्यालय को उसके हिस्से की राशि सही समय और सही प्रक्रिया से प्राप्त हो। पारदर्शिता, तात्कालिकता और तकनीकी सटीकता को प्राथमिकता दी जा रही कुलपति प्रो. एसपी शाही ने कहा कि मगध विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक गुणवत्ता में ही नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता में भी पूरे बिहार में एक उदाहरण बनना चाहता है। छात्रों से ली गई फीस केवल आंकड़े नहीं, बल्कि महाविद्यालयों के जीवन संचालन का आधार होती है। ऐसे में प्रत्येक संस्थान को उसका उचित अधिकार बिना किसी विलंब और संशय के मिलना चाहिए। हम इस प्रक्रिया को भरोसे की बहाली और सुधारित व्यवस्था की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। यह कदम केवल एक वित्तीय सुधार नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की नई कार्यसंस्कृति का प्रतीक है। जहां पारदर्शिता, तात्कालिकता और तकनीकी सटीकता को प्राथमिकता दी जा रही है। इस पहल से न केवल महाविद्यालयों में वित्तीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा, बल्कि यह विश्वविद्यालय प्रशासन और महाविद्यालयों के बीच आपसी विश्वास, सहयोग और जवाबदेही की भावना को भी सशक्त करेगा। कुलसचिव ने कहा कि विश्वविद्यालय आपके साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ा है। आप लोग पूरी तन्मयता के साथ महाविद्यालय में काम करें। विश्वविद्यालय का पूरा सहयोग रहेगा और मैं कुलसचिव के नाते सारी संचिकाओं का ससमय निष्पादन करूंगा।
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