डॉक्टरों ने मरीज को रेयर न्यूरो-मस्कुलर डिसऑर्डर से निकाला:पलक भी नहीं झपका पाते थे, 5 डॉक्टरों ने 30 मिनट तक किया ऑपरेशन, अमिताभ बच्चन भी थे शिकार

Aug 16, 2025 - 16:30
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डॉक्टरों ने मरीज को रेयर न्यूरो-मस्कुलर डिसऑर्डर से निकाला:पलक भी नहीं झपका पाते थे, 5 डॉक्टरों ने 30 मिनट तक किया ऑपरेशन, अमिताभ बच्चन भी थे शिकार
पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में एक ऐसा सफल ऑपरेशन हुआ है, जिस ऑपरेशन के लिए मरीज को न सिर्फ बिहार से बाहर जाना पड़ रहा है बल्कि इसके इलाज में 6 लाख रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इस बीमारी का नाम मायस्थेनिया ग्रेविस (Myasthenia Gravis) है। यही बीमारी अमिताभ बच्चन को थी। मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेंडेंट की अगुआई में 6 डॉक्टरों की टीम ने आधे घंटे तक ऑपरेशन किया और फिर ऐसे ही एक मरीज को न सिर्फ उसे मौत के मुंह से बाहर निकाला, बल्कि उसे एक नई जिंदगी दी। मरीज का नाम अभास कुमार है। जो पूर्णिया जिले के के.नगर क्षेत्र के जवाहर नगर इलाके के रहने वाले हैं। इन्होंने बिहार सेवा सचिवालय में सामान्य प्रशासन में 32 साल अपनी सेवाएं दी। 2013 में रिटायर्ड हो गए। इसके बाद से वो पटना में रह रहे हैं। फरवरी 2022 में अचानक पेट में हुआ था जोरदार दर्द 72 साल के अभास बताते हैं कि साल 2022 के फरवरी महीने में उनके पेट में जोरदार दर्द उठा। इलाज और जांच में पेट में गॉल ब्लैडर की शिकायत सामने आई। इसका इलाज चल ही रहा था। उसी साल अगस्त में अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में मायस्थीनिया ग्रेविस नाम की ऑटोइम्यून बीमारी के बारे में पता चला। डॉक्टरों ने बताया कि ये एक दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी है, जो मांसपेशियों में कमजोरी का कारण बनती है। इस बीमारी के इलाज के लिए वे पटना के कई बड़े अस्पतालों में गए और डॉक्टरों से ऑपरेशन को लेकर सलाह ली। डॉक्टर खुद ऑपरेशन से घबराने लगे, बिहार से बाहर जाने की सलाह दी कुछ डॉक्टरों ने मेडिसिन के जरिए इलाज का दावा किया मगर बीमारी के बढ़ते चले जाने पर डॉक्टर ऑपरेशन से घबराने लगे और बिहार से बाहर जाने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने इस बीमारी के बेहतर इलाज के बारे में पता किया। इस दौरान उन्हें बैंगलोर के एक बड़े अस्पताल के बारे में पता चला। हॉस्पिटल के ऑथोरिटी ने इलाज में 6 लाख का खर्च आने की बात बताई साथ ही बीमारी की गंभीरता बताते हुए पेशेंट के रिकवर न हो पाने की स्थिति में किसी भी प्रकार की जिम्मेवारी लेने से अपना पल्ला झाड़ लिया। ऑपरेशन के बाद 72 घंटे तक डॉक्टरों के ऑब्जर्वेशन में रहे आभास आगे कहते हैं कि वो गॉल ब्लैडर का ऑपरेशन कराने GMCH पूर्णिया पहुंचे। जहां मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने रिपोर्ट देखा। उन्हें डॉक्टरों की एक टीम उन्हें 2 से 3 दिनों तक अपने ऑब्जर्वेशन में रखा और ऑपरेशन की तारीख बताई गई। ये ऑपरेशन 12 अगस्त को हुआ। इसके बाद से वे 72 घंटे तक डॉक्टरों के ऑब्जर्वेशन में रहे। वे पहले से काफी बेहतर मसूद कर रहे हैं। उन्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा कि जिस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए बड़े बड़े हॉस्पिटल और डॉक्टर ने इनकार कर दिया। बिहार से बाहर जाने की सलाह दी थी। 5 डॉक्टरों की टीम ने आधे घंटे तक ऑपरेशन किया, मौत के मुंह से निकाला सुपरिटेंडेंट डॉ संजय कुमार ने आगे बताया कि उन्होंने मामले की गंभीरता समझी और डॉक्टरों से बातचीत के बाद मेडिकल टीम का गठन किया गया। टीम ने 12 अगस्त को मेरी अगुआई में 5 डॉक्टरों की टीम ने करीब आधे घंटे तक ऑपरेशन किया और मरीज को मौत के मुंह से बाहर निकाल कर और एक नया जीवन दिया। इस तरह के ऑपरेशन का सफल होना पूर्णिया मेडिकल कॉलेज के लिए बड़ी बात है। ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों की टीम ने लाजवाब काम किया है। मेडिकल सर्जन बोले- बीमारी को हमने चैलेंज के तौर पर लिया मेडिकल कॉलेज के सर्जन तारकेश्वर कुमार और एनेस्थीसिया के एचओडी डॉ अज़ीज़ अहमद और एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट डॉ विकास कुमार ने बताया- मायस्थेनिया ग्रेविस नाम की ऑटोइम्यून बीमारी को हमने एक चैलेंज के तौर पर लिया। मायस्थीनिया ग्रेविस एक ऑटोइम्यून न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर है। न्यूरोमस्कुलर जंक्शन पर स्टैक कूलिंग रिलीजेपेटर होता है। जो इस हद तक डिस्टर्ब हो जाता है कि मांसपेशियां काफी कमजोर हो जाती हैं। इस तरह के मरीज को ऑपेशन के दौरान जेनरल एनेस्थीसिया दिए जाने पर मरीज का दोबारा होश में आना काफी कंप्लीकेटेड होता है। इसमें मरीज की जान सकती हैं। जिस वजह से डॉक्टर ऐसे मरीज के साथ कोई रिस्क नहीं लेते। इस ऑपरेशन की सफलता पर काफी खुशी हो रही है। डॉक्टर विकास ने आगे बताया कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को मायस्थीनिया ग्रेविस नामक बीमारी थी। 1980 के दशक में कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान, उन्हें इस बीमारी के बारे में पता चला था। टीनू आनंद के मुताबिक इस बीमारी ने उन्हें बहुत हद तक मौत के करीब पहुंचा दिया था। ये एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसका मतलब है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी ही मांसपेशियों पर हमला करती है। इससे मांसपेशियों में कमजोरी होती है, जो समय के साथ बढ़ जाती है। ये कमजोरी आंखों, चेहरे, हाथों, पैरों और सांस लेने वाली मांसपेशियों को प्रभावित करती है। मायस्थेनिया ग्रेविस का कोई इलाज नहीं है, लेकिन दवाएं और अन्य उपचार लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। अमिताभ बच्चन ने इस बीमारी से जूझते हुए फिल्म दुनिया में अपना काम जारी रखा और आज भी वे सक्रिय हैं।

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