जनजातीय समुदाय की परम्परा को सही रूप में समझना आवश्यक: डॉ. आशा

Aug 10, 2025 - 04:30
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जनजातीय समुदाय की परम्परा को सही रूप में समझना आवश्यक: डॉ. आशा
सिटी रिपोर्टर| टिकारी दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में जनजातीय गौरव दिवस पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. आशा लकड़ा, सदस्य, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'विकसित भारत @2047' की बात कर रहे हैं। इसके लिए सभी समुदायों की भागीदारी जरूरी है। जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपरा को समझना आज की जरूरत है। उन्होंने 'आदिवासी' शब्द के बजाय'अनुसूचित जनजाति' शब्द के प्रयोग को सही बताया। कहा कि इन समुदायों के कायाकल्प के लिए सरकारी योजनाओं को शामिल करना जरूरी है। संगोष्ठी की अध्यक्षता कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने की। उन्होंने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा को याद किया। कहा कि वे लचीलेपन और विरोध के प्रतीक थे। उन्हें विधाता, भाग्य विधाता और दाता जैसे विशेषणों से परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। नीति निर्माण में अकादमिक विचारों को शामिल करना जरूरी है।

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