ऑनलाइन पिंडदान का गयाजी में पंडा समाज ने किया विरोध:कहा- शास्त्र में ऐसा नहीं है, लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा
गयाजी में पितृपक्ष मेला 6 सितंबर से शुरू होने वाला है, लेकिन शुरुआत से पहले ही गयाजी के तीर्थ पुरोहित समाज में गुस्सा देखने को मिल रहा है। वजह सरकार की ओर से ऑनलाइन पिंडदान का प्रचार है। पंडा समाज का कहना है कि ऑनलाइन पिंडदान का कोई शास्त्रीय और सैद्धांतिक आधार नहीं है। यह सिर्फ लोगों को गुमराह करने और ठगने का जरिया है। उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जो कि गलत हैं। पंडा समाज के प्रतिनिधियों ने साफ कहा कि वायु और आग पुराण दोनों में लिखा है कि गया जी आकर, अपने क्षेत्र पुरोहित का गुरु वर्ण करने और यथाविधि श्राद्ध कराने के बाद ही पितरों की मुक्ति संभव है। बिना तीर्थ पुरोहित के आशीर्वाद के कोई भी कर्मकांड अधूरा है। ऐसे में ऑनलाइन पिंडदान आस्था पर सीधा प्रहार है। सिर्फ कॉरिडोर क्षेत्र में खर्च हो राशि प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंडा समाज ने सिर्फ ऑनलाइन पिंडदान ही नहीं, बल्कि विष्णुपद कॉरिडोर का मुद्दा भी उठाया। आरोप लगाया कि केंद्र सरकार से कॉरिडोर के नाम पर धन शहर के दूसरे कामों में खर्च किया जा रहा है। यह पूरी तरह गलत है। आवंटित राशि सिर्फ कॉरिडोर क्षेत्र में खर्च होनी चाहिए। विष्णुपद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल बिट्ठल ने तो इसे सनातन पर हमला करार दिया। उनका कहना है कि पर्यटन विभाग देश-विदेश के लोगों से ऑनलाइन पिंडदान के नाम पर ठगी कर रहा है। भगवान श्रीराम, युधिष्ठिर, भीष्म पितामह तक गयाजी आए थे और यहां पिंडदान किया था। शास्त्रों में भी प्रमाण है कि बगैर गया जी आए और तीर्थ पुरोहित की आज्ञा लिए पितरों की मुक्ति संभव नहीं। ब्रह्माजी ने दिया पिंडदान कराने का अधिकार उन्होंने साफ कहा कि गया के तीर्थ पुरोहित ब्रह्म कल्पित ब्राह्मण हैं और पिंडदान कराने का अधिकार सिर्फ इन्हें ही ब्रह्माजी ने दिया है। बावजूद इसके विभाग आस्था से खिलवाड़ कर रहा है। यहां तक कि ऑनलाइन पिंडदान कराने वाले खुद को पंडा समाज का बताकर जनता को उलझन में डाल रहे हैं। सभा में मौजूद प्रतिनिधियों ने कहा- घर बैठे-बैठे पितरों का पिंडदान कभी संभव नहीं है। यह सनातन, धर्म और गयाजी की पवित्रता- तीनों पर हमला है। मौके पर महेश गुप्त, राजन सिजुआर, मणिलाल बारीक, गजाधर पाठक और गजु कटारियार भी मौजूद थे।
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