आज से दर्शकों के लिए खुल जाएगा पटना म्यूजियम:बच्चों के लिए 25 और बड़ों के लिए 50 रुपए का टिकट, सोमवार को रहेगा बंद
आज से पटना म्यूजियम दर्शकों के दीदार के लिए खोल दिया जाएगा। इसके टिकट का रेट बिहार म्यूजियम से आधा है। पटना म्यूजियम में आने वाले दर्शकों में बड़ों के लिए 50 रुपए और बच्चों को 25 रुपए का टिकट लगेगा। वहीं, म्यूजियम सोमवार को बंद रहेगा। दो साल से बंद पड़ा पटना म्यूजियम दर्शकों को नए रूप में दिखेगा। 7 अगस्त से बिहार म्यूजियम बिनाले का आयोजन हो रहा है, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे। इस बिनाले के तहत कुछ विदेशी प्रदर्शनी पटना म्यूजियम के टेंपररी गैलरी में लगाई जाएगी। म्यूजियम में दो गैलरी पटना म्यूजियम के नए भवन का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 27 जुलाई को किया था। इसे 158 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। इस नए भवन में लोग गंगा गैलरी, पाटली गैलरी और स्कल्पचर गार्डन का दीदार कर सकेंगे। इसे ऑडियो-विजुअल माध्यम से 3D इफेक्ट की मदद से दर्शाया गया है। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर आचार्य चाणक्य का एक होलोग्राम तैयार किया गया है, जिससे लोग सवाल पूछ सकते हैं। दुबई के टेक्नीशियन ने इसे खास तरह के सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल कर तैयार किया है। गंगा गैलरी में दिखेगी शाहाबाद से संथाल तक गंगा की यात्रा गंगा गैलरी में गंगा नदी का उद्गम कैसे हुआ, गंगा का बिहार के जीवन और कला संस्कृति पर क्या प्रभाव है, ये देखने को मिलेगी। गंगा गैलरी में शाहाबाद से संथाल तक गंगा की 445 किलोमीटर की यात्रा को दर्शाया गया है। जैसे ही आप गंगा गैलरी में इंटर करेंगे, सबसे पहले भगवान शिव की जटाओं से निकलती गंगा नदी को दर्शाया गया है। इसे ऑडियो विजुअल के माध्यम से 3D इफेक्ट दिया गया है। वहीं, फ्लोर पर भी गंगा का डिजिटल इफेक्ट दिया गया है, जिसपर लोग चल सकते हैं। 7 सांस्कृतिक क्षेत्रों से दिखाई गई गंगा की यात्रा इसके साथ ही गंगा गैलरी में खूबसूरत कलाकृतियों के माध्यम से बिहार में गंगा की यात्रा को 7 सांस्कृतिक क्षेत्रों से जाते हुए दिखाया गया है। इसमें शाहाबाद, मगध, कोसी, अंग, तिरहुत, मिथिला और सीमांचल के विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्र की भी जानकारी मिलेगी। बिहार के अलग-अलग सांस्कृतिक क्षेत्र में अलग-अलग त्योहार, उसकी मान्यता भी बताई गई है। वहीं, फ्लोर पर बिहार में बंटती गंगा की धारा को डिजाइन किया गया है। इस गैलरी में विभिन्न प्रतिकृति जैसे केसरिया स्तूप तथा राम रेखा घाट प्रदर्शित है। इनके अलावा विभिन्न प्रकार के नृत्य कला जैसे झिझिया, जट जतिन, बिदेसिया और सोहर को आकृति और चित्र के माध्यम से दर्शाया गया है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के चित्रकला जैसे मंजूषा, मधुबनी और टिकुली भी प्रदर्शित है। 20 करोड़ साल पुरानी 53 फीट लंबा फॉसिल पेड़ मौजूद इस गैलरी का मुख्य आकर्षण 53 फीट लंबा जीवाश्म वृक्ष है, जो 20 करोड़ वर्ष पुराना है। इसे 1927 में बंगाल के आसनसोल से पटना लाया गया था जिसके बाद यह पटना म्यूजियम में रखा गया था। अब इसे फिर से मोडिफाई कर नए भवन में प्रदर्शित किया गया है। इसके साथ ही चिरांद और पांड़ जैसे बिहार के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल के अवशेष भी प्रदर्शित किए गए हैं। इसमें QR कोड भी लगे हैं, जिसे स्कैन कर दर्शक सभी तरह की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अष्टाध्यायी पाणिनि की डिजिटल किताब भी है। इसके टच करते ही आप पन्ने भी पलट सकते हैं और आगे के अध्याय को पढ़ सकते हैं। यह किताब महर्षि पाणिनि द्वारा रचित संस्कृत व्याकरण का एक अत्यंत प्राचीन ग्रंथ है। इसे व्याकरण की पहली पुस्तक माना गया है। पाटली गैलरी में बनाया गया एक विशाल द्वार पाटली गैलरी इस म्यूजियम का दूसरा भाग है, जो मगध क्षेत्र की उत्पत्ति और विकास को दर्शाती है। मगध क्षेत्र में एंट्री लेते ही सबसे पहले एक विशाल द्वार मिलेगा। इसमें अंदर जाते हज आगंतुक एक अनोखे वातावरण में प्रवेश करते हैं, जो उसे राजगीर से शुरू होने वाले गौरवशाली मगध साम्राज्य की पूरी यात्रा पर ले जाती है। पाटली गैलरी में उस समय पटना कैसा था, यहां का जनजीवन, इतिहास कैसा था, यह देखने को मिलेंगे। पाटलिपुत्र शहर की 16 फीट डिजिटल रिप्लिका बनाई गई पाटली गैलरी में पाटलिपुत्र के पूरे वैभव के बारे में मेगास्थनीज और फाह्यान जैसे यात्रियों के उदाहरणों को खूबसूरत कलाकृतियों और चित्रण के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इसमें राजगीर की गौरवशाली यात्रा से मगध साम्राज्य की भव्यता तक का दर्शन कराया जाएगा। वहीं, पाटलिपुत्र शहर की एक 16 फीट रिप्लिका भी बनाई गई है, जो कि डिजिटल मैप के माध्यम से पुराने पाटलिपुत्र शहर की जानकारी दे रहा है। दुबई के टेक्नीशियन ने बनाया आचार्य चाणक्य का AI होलोग्राम पाटली दीर्घा में आचार्य चाणक्य का होलोग्राम लगाया गया है, जो दर्शकों के सवालों का जवाब देंगे। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसे दुबई के टेक्नीशियन ने तैयार किया है। AI की मदद से लोगों के पूछे गए सवालों का जवाब आचार्य चाणक्य चार से पांच लाइन में देंगे। इस तकनीक में हिंदी और अंग्रेजी भाषा में लोग सवाल पूछ सकते हैं। बाद में मैथिली और भोजपुरी को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसमें बाहर से आने वाले विदेशी पर्यटकों की फॉरेन भाषा को भी जोड़ा जाएगा। दो स्कल्पचर गार्डन का हुआ है निर्माण वहीं, स्कल्पचर गार्डन या मूर्ति वाटिका में 102 मूर्तियां लगाई गई है। इसे दो भागों हिंदुइज्म और बुद्धिज्म में बांटा गया है। हिंदू गैलरी में शक्ति, शिव, विष्णु, ब्रह्मा, सूर्य, नाग आदि की मूर्तियां हैं। वहीं, बौद्ध खंड में बुद्ध की प्रतिमा को केंद्र में रखकर उसके चारों ओर देवी-देवताओं को दर्शाया गया है। इस स्कल्पचर गार्डन में पाषाण मूर्तियां, देवी-देवता के चित्र उत्कीर्ण मंदिर के खंड, स्तूप के खंड, बुद्ध काल की मूर्तियां, अलग-अलग धर्म से जुड़ी मूर्तियों, आदि को प्रदर्शित किया गया है। इस नव निर्मित भवन में तीन ब्लॉक शामिल है जो। इसके दक्षिणी ब्लॉक के प्रवेश द्वार पर कैफेटेरिया, स्वागत कक्ष, कार्यक्रम कक्ष, अस्थायी टेंपररी गैलरी क्षेत्र और 105 लोगों की बैठने की क्षमता वाला एक सभागार है। उत्तरी ब्लॉक में प्रशासनिक खंड है, जिसमें म्यूजियम कार्यालय, पटना म्यूजियम के विशाल संग्रह के लिए भंडार कक्ष, संरक्षण प्रयोगशाला और उपकरण कक्ष शामिल हैं।
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