आज सुहागिन महिलाएं करेंगी तीज व्रत:पूरे दिन पूजा का मुहूर्त, अखंड सौभाग्य की कामना से करेंगी शिव-पार्वती की पूजा

Aug 26, 2025 - 08:30
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आज सुहागिन महिलाएं करेंगी तीज व्रत:पूरे दिन पूजा का मुहूर्त, अखंड सौभाग्य की कामना से करेंगी शिव-पार्वती की पूजा
अखंड सौभाग्य की कामना से सुहागिन महिलाएं आज हरितालिका तीज का व्रत करेंगी। आज हस्त नक्षत्र, साध्य योग, रवियोग, सिद्ध योग, शुभ योग, गर करण के साथ लक्ष्मी योग का संयोग बन रहा है। आज महिलाएं तीज में शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर पौराणिक कथाएं सुनेंगी। एक हजार अवश्मेध यज्ञ के समान हरितालिका तीज व्रत आचार्य राकेश झा ने बताया कि आज पूरे दिन तीज पूजा का शुभ मुहूर्त है। इसलिए सुहागिन महिलाएं आज किसी भी समय पूजा कर सकती हैं। कहा कि हरितालिका तीज व्रत की परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है। माता पार्वती ने पहली बार भगवान शिव की बालू की प्रतिमा बनाकर पूजा की थी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव स्वयं माता पार्वती से कहते हैं कि इस व्रत को करने से व्रती महिला को सब प्रकार के सांसारिक भोग से मुक्ति मिल जाती है। इस व्रत के पौराणिक कथा सुनने से एक हजार अश्वमेध यज्ञ करने जितना पुण्य फल प्राप्त होता है। हरितालिका व्रत करने से स्त्रियों के सभी पाप क्षय हो जाते है और उन्हें सात जन्म तक सुख व सौभाग्य मिलता है। माता-पुत्र योग में हरितालिका तीज आज सुहागिनों का महापर्व हरितालिका तीज पर आज तृतीया तिथि 12:48 बजे तक है। इसके बाद चतुर्थी शुरू हो जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तीज के दिन चौथ की तिथि होने से माता-पुत्रयोग का संयोग बनता है। इस योग को गौरी-गणेश योग भी कहते हैं। तृतीया तिथि माता गौरी की तिथि है, वही चतुर्थी तिथि विध्नहर्ता गणेश को समर्पित है। सभी पूजा में दोनों प्रथमतया और प्रमुखता से पूजित होते हैं। तपस्या और निष्ठा का व्रत है हरितालिका पंडित झा ने लिंग पुराण के हवाले से बताया कि माता पार्वती ने वन में जाकर भोलेनाथ को अपने पति के रूप में पाने के लिए अन्न तथा जल ग्रहण किए बिना सालों तक तप करती रही। तब शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किए थे। महिलाएं इस व्रत को तपस्या और निष्ठा के साथ करेंगी तो सात जन्मों तक शिव स्वरूप में उनके वही पति मिलेंगे। पूजा में दान की महत्ता इन मंत्रों से करें शिव-पार्वती की पूजा भोलेनाथ की पूजा के दौरान पढ़े: ऊँ हराय नम:, ऊँ महेश्वराय नम:, ऊँ शम्भवे नम:, ऊँ शूलपाणये नम:, ऊँ पिनाकवृषे नम:, ऊँ शिवाय नम:, ऊँ पशुपतये नम:, ऊँ महादेवाय नम:। माता पार्वती के पूजन के समय कहे: ऊँ उमायै नम:, ऊँ पार्वत्यै नम:, ऊँ जगद्धात्र्यै नम:, ऊँ जगत्प्रतिष्ठयै नम:, ऊँ शांतिरूपिण्यै नम:, ऊँ शिवायै नम:।

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