EWS आवेदन रद्द करने पर बताना होगा कारण:फ्री कोचिंग पर हुआ विमर्श, उच्च जातियों के विकास के लिए हुई बैठक
उच्च जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों (EWS) की स्थिति पर अब सरकार और आयोग की नजर बेहद गंभीर है। इस कड़ी में शुक्रवार को गयाजी में उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग, बिहार की प्रमंडलीय समीक्षा बैठक हुई। अध्यक्षता आयोग के चेयरमैन डॉ. महाचन्द्र प्रसाद सिंह ने की। उपाध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद, सदस्य जयकृष्ण झा, राजकुमार सिंह, मगध प्रमंडल आयुक्त और गया के डीएम भी बैठक में शरीक रहे। आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि गया, जहानाबाद, अरवल, नवादा और औरंगाबाद के समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के साथ विमर्श हुआ। EWS वर्ग के उत्थान की रणनीति तैयार करने के लिए सुझाव लिए गए। डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य सरकार हर वर्ग के विकास को लेकर संकल्पित है। EWS के लिए विशेष कार्य योजना तैयार की जा रही है। दावा किया इस आरक्षण का लाभ गरीब घराने वाले युवकों को मिल रहा है। प्रदेश में कहीं-कहीं इस योजना का लाभ पहुंचाने के क्रम में सरकारी दफ्तरों में डंडी मारी जा रही है। लोगों को परेशान किया जा रहा है। इस तरह की शिकायत मिली है। इस पर आयोग ने सख्ती से पेश आते हुए जिला स्तरीय अधिकारियों को चेतावनी दी है। ठीक से काम करने को कहा गया है। साथ ही ईडब्ल्यूएस के सर्टिफिकेट में तेजी लाने की बात कही गई है। साथ में यह भी कहा कि यदि किसी वजह से सरकारी विभाग किसी भी आवेदक का आवेदन निरस्त करते हैं तो उसका डाटा आयोग के समक्ष दें और निरस्तीकरण का कारण भी बताएं। सहकारी समितियों से लोन की सुविधा का सुझाव उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि EWS लोगों को सरकारी योजनाओं का कितना लाभ मिल रहा है, इसका अलग से डाटा संधारित किया जाए। तभी ठोस नीति बन सकेगी। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि EWS प्रमाण-पत्र बनाने में आ रही परेशानियों को लेकर प्रमंडल और जिले के अफसर कार्रवाई करें। ऐसा वाजिब हक वालों के साथ नहीं होना चाहिए। बैठक में यह सुझाव भी आए कि EWS वर्ग को भी छात्रवृत्ति, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, चयन शुल्क में छूट और सहकारी समितियों से लोन की सुविधा मिले। आयोग को मानवाधिकार मामलों में जांच का अधिकार देने की मांग उठी। इसके अलावा उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग की व्यवस्था से जुड़े प्रस्ताव आयोग के समक्ष आए हैं। इस पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जहानाबाद से जुड़ा एक मसला आयोग के समक्ष आया है। मसला जमीन से जुड़ा है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनकी जमीन सरकार ने विकास के नाम पर कई बार कई टुकड़ों में लिए। अब थोड़ी सी जमीन बची है। उसे भी सरकार विभिन्न सरकारी योजनाओं के नाम पर लेने की कवायद कर रही है। ऐसे में पीड़ित पक्ष का कहना है कि यही सिलसिला रहा तो उनके पास जमीन ही नहीं बचेगी। वहीं आयोग के अध्यक्ष ने सभी को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार से सभी जरूरी अनुशंसाएं की जाएंगी।
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