संगीत के क्षेत्र में योगदान पर नंदिता व सुरेश सम्मानित
भास्कर न्यूज | ब्रह्मपुर गाजीपुर के लंका मैदान में परंपराओं का पुनः प्रतिष्ठापन: भारत एवं विदेशों में आदिवासी और भोजपुरी संस्कृति विषय पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम जीवनोदय शिक्षा समिति द्वारा आयोजित किया गया था। इस समागम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में मॉरीशस से डॉ. सरिता बुद्धु, तुर्की से प्रो. स्मिता जैसल, अमेरिका से डॉ. माइकल बोलोन तथा लीबिया से प्रो. अनिल प्रसाद शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. रामनारायण तिवारी ने की, जबकि इसका संपन्न संचालन डॉ. जयशंकर सिंह के द्वारा किया गया। सेमिनार के दौरान बक्सर जिले के ब्रह्मपुर प्रखंड की दो प्रमुख प्रतिभाओं को विशेष सम्मान से नवाजा गया। भदवर गांव की शास्त्रीय संगीत की उत्कृष्ट कलाकार कुमारी नंदिता को संगीत के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान हेतु “विदुषी गिरिजा देवी सम्मान” प्रदान किया गया। कुमारी नंदिता ने संगीत की शिक्षा अपने नाना, दिवंगत राधेश्याम तिवारी से ग्रहण की है। कांट गांव के प्रसिद्ध साहित्यकार सुरेश कांटक को भोजपुरी नाटकों और साहित्य जगत में विशिष्ट योगदान के लिए लोहा सिंह सम्मान से सम्मानित किया गया। सेमिनार में प्रो. पुष्कर मिश्रा, प्रो. पीके मिश्रा, हिमांशु उपाध्याय, एस.एन. उपाध्याय तथा साहित्यकार नीरजा माधव समेत अनेक विद्वानों ने परंपराओं के पुनः प्रतिष्ठापन पर अपनी महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। इसी अवसर पर डॉ. नर नारायण राय की पुस्तक ‘शासन से स्वशासन तक-मेयर’ का विमोचन भी हुआ और कई शिक्षकों, शोधार्थियों एवं साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। सेमिनार के दूसरे सत्र में प्रो. आशीष त्रिपाठी, डॉ. सुनील कुमार पाठक, प्रो. विश्वनाथ मिश्र एवं प्रो. प्रभाकर सिंह जैसे विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। सेमिनार के पहले दिन सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें कवि सम्मेलन और लोक सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। बक्सर जिले में कुमारी नंदिता एवं सुरेश कांटक को मिला यह सम्मान स्थानीय लोगों के लिए गर्व का विषय है और इसे क्षेत्रीय संस्कृति की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
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