बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी तेज:सुपौल में सेक्टर अधिकारियों की ट्रेनिंग, निष्पक्ष मतदान कराने का संकल्प
बिहार विधानसभा आम चुनाव 2025 को स्वच्छ और शांतिपूर्ण तरीके से कराने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सुपौल के समाहरणालय स्थित DRCC सभागार में शनिवार को सेक्टर पदाधिकारियों और सेक्टर पुलिस पदाधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में हुए इस प्रशिक्षण में चार विधानसभा क्षेत्रों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। पिपरा विधानसभा क्षेत्र के अधिकारियों का प्रशिक्षण सुबह 11 बजे से शुरू हुआ। छातापुर के अधिकारियों को दोपहर 1 बजे, निर्मली क्षेत्र के अधिकारियों को दोपहर 2 बजे और सुपौल विधानसभा क्षेत्र के अधिकारियों को शाम 4 बजे प्रशिक्षण दिया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया में सेक्टर पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मतदान की घोषणा से लेकर मतदान समाप्ति तक वे अपने क्षेत्र में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करेंगे। सेक्टर पदाधिकारी मतदान से पहले हर मतदान केंद्र का दौरा करेंगे। वे वहां की बुनियादी सुविधाओं और संभावित समस्याओं की जानकारी लेंगे। सेक्टर पुलिस पदाधिकारी के साथ मिलकर VM-2 और VM-3 प्रपत्र में विवरण दर्ज करेंगे। यह रिपोर्ट सहायक निर्वाची पदाधिकारी को सौंपी जाएगी। मतदान पूर्व दिवस की जिम्मेदारियां जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदान के एक दिन पूर्व सेक्टर पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी मतदान दल अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुँच चुके हैं और आवश्यक सामग्री उपलब्ध है। सुरक्षा योजना के अनुरूप पुलिस बल की उपस्थिति, मतदान कर्मियों की शंकाओं का समाधान, वीडियो/फोटोग्राफी की व्यवस्था और वेबकास्टिंग हेतु विद्युत की उपलब्धता की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी। मतदान दिवस की जिम्मेदारियां प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि मतदान प्रारंभ होने से पूर्व प्रत्येक मतदान केंद्र पर "मॉक पोल" नियत समय से ठीक पहले अभिकर्ताओं की उपस्थिति में कराया जाएगा। सेक्टर अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि मॉक पोल की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हो। यदि कहीं केवल एक ही अभिकर्ता या कोई भी अभिकर्ता उपस्थित न हो, तो उस स्थिति की जानकारी तुरंत दी जाएगी। मतदान शुरू होने के बाद सेक्टर पदाधिकारी लगातार भ्रमण कर मतदान प्रक्रिया की शुद्धता, पुलिस बल की तैनाती, वोटिंग मशीनों के सही संचालन तथा गड़बड़ी की स्थिति में मशीन बदलने की जिम्मेदारी निभाएंगे। मतदान केन्द्रों पर फोटोयुक्त मतदाता पर्ची वितरण की व्यवस्था की निगरानी भी उन्हीं को करनी होगी। साथ ही यह भी देखना होगा कि राजनीतिक दल अथवा अभ्यर्थियों के बूथ 200 मीटर की दूरी से बाहर स्थापित हों और मतदाताओं को प्रभावित करने की कोई कोशिश न हो। यदि कहीं वाहनों द्वारा मतदाताओं को लाने-ले जाने की सूचना मिलती है, तो सेक्टर पदाधिकारी तत्काल संबंधित पुलिस मोबाइल पार्टी को सूचित करेंगे। मतदान प्रतिशत की जानकारी समय-समय पर रिटर्निंग ऑफिसर को भेजना, मतदान अभिकर्ताओं की उपस्थिति पर निगरानी रखना और प्राप्त शिकायतों का त्वरित निपटारा करना भी उनकी जिम्मेदारी होगी। मतदान समाप्ति के बाद की भूमिका जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि मतदान समाप्त होने पर सेक्टर पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि पीठासीन अधिकारी की डायरी सही ढंग से भरी गई है, सभी मतदान मशीनें मुहरबंद कर दी गई हैं, प्रपत्र 17-सी की प्रतियां मतदान अभिकर्ताओं को दी गई हैं तथा 17-ए रजिस्टर पूरी तरह भरा गया है। इसके अलावा, मतों की संख्या कंट्रोल यूनिट के "टोटल बटन" के आधार पर मिलाई जाएगी।उन्होंने यह भी बताया कि रिजर्व एवं अप्रयुक्त ईवीएम तथा वीवीपैट मशीनों को सुरक्षित रूप से वेयरहाउस में रखवाना, उनकी प्राप्ति रिपोर्ट तैयार करना तथा पीठासीन अधिकारियों से निर्धारित प्रतिवेदन पर्यवेक्षक को उपलब्ध कराना भी सेक्टर अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।
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