खाजा क्लस्टर की जमीन अटकी... झूला क्लस्टर के लिए बिजली ही नहीं
मेक इन इंडिया में शामिल बिहार के दो उद्योग अटक गए हैं। ये हैं नालंदा जिले के कन्हैयागंज का झूला क्लस्टर और सिलाव का खाजा क्लस्टर। खाजा क्लस्टर जमीन और झूला क्लस्टर बिजली के पेंच में फंस गये हैं। कारण छोटा है, पर इन्हें दूर करने का काम नहीं दिख रहा। मुख्यमंत्री सूक्ष्म लघु क्लस्टर योजना के तहत झूला क्लस्टर की स्वीकृति 2014-15 में मिली थी। कन्हैयागंज के इस उद्योग को विकसित करने के लिए 4 करोड़ 56 लाख रुपए खर्च होने थे। वहीं सिलाव खाजा क्लस्टर का 1 करोड़ 14 लाख रुपए खर्च कर विस्तार करना था। कन्हैयागंज झूला बनाने के लिए प्रसिद्ध है। यहां के बनाए झूले पूरे देश के डिजनीलैंड संचालक व मेले वाले ले जाते हैं। झूला क्लस्टर बन जाता तो यह देश का पहला वो क्लस्टर होता जहां सीएनसी लेंग्थ वाला ऑटोमेटिक झूले का उत्पादन होता। लेकिन यह सपना ही रह गया। पहली बार सीएनसी लेंग्थ वाला ऑटोमेटिक झूला बनेगा, 52 परत वाले सिलाव के खाजे का हर कोई मुरीद क्या है नाइट्रोजन पैकिंग सिलाव के खाजा को नाइट्रोजन पैकिंग कर बाहर भी भेजने की योजना अधर में है। नाइट्रोजन पैकेजिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें खाद्य पदार्थों को पैक करते समय ऑक्सीजन को हटाकर उसमें नाइट्रोजन गैस भर दिया जाता है। यह प्रक्रिया खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक ताजा रखने में मदद करती है, क्योंकि नाइट्रोजन एक अक्रिय गैस है जो प्रतिक्रिया नहीं करती है। क्या है सीएनसी लेंग्थ तकनीक कन्हैयागंज झूला कलस्टर में सीएनसी लेंग्थ तकनीक का इस्तेमाल होना है। सीएनसी लेंग्थ ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिससे मशीनें कंप्यूटर के जरिए अपने आप काम करती हैं। इसमें पहले से प्रोग्राम किया गया सॉफ्टवेयर मशीनों की चाल, गति और सटीकता को नियंत्रित करता है। सीएनसी मशीनों से तैयार झूला सटीक होता है। इससे समय और लागत बचती है। क्लस्टर बनने से होंगे ये फायदे 1. सिलाव के खाजे को जीआई टैग मिल चुका है। 52 परत वाले खाजे की मुरीद हर कोई हैं। नाइट्रोजन पैकेजिंग खाजा को लंबे समय तक ताजा रखेगा। 2. सिलाव में खाजे की करीब 100 दुकानें हैं। सभी दुकानें खुलती हैं। हर दिन करीब 8 से 10 लाख रुपए का कारोबार होता है। सभी कारोबारियों को फायदा होता। 3. कन्हैयागंज और इसके आसपास के गांवों में झूला बनाने वाले 33 से ज्यादा कारखाने हैं। छह हजार से ज्यादा कारोबारी, कारीगर व मजदूर इससे जुड़े हैं। जीएम बोले-बाधा दूर करने की कोशिश की जा रही कन्हैयागंज के निर्मित झूले अहमदाबाद में बनने वाले झूलों की तुलना में अत्याधुनिक होंगे। यह सीएनसी लेंग्थ वाला देश का पहला अत्याधुनिक झूला होगा। ट्रांसफार्मर लगाने और 33 केवी लाइन बनाने के लिए दो बार निविदा निकाली गयी। मगर एक भी एजेंसी नहीं मिली। जबकि जमीन विवाद की वजह से खाजा कलस्टर मशीनें लगाने की प्रक्रिया अटकी हुई है। -विशेश्वर प्रसाद, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, नालंदा 4 20 सीटर तरंगा और 24 सीटर सुनामी जैसे ऑटोमेटिक झूले भी तैयार किए जाते है। बच्चों के लिए झूले, टायर झूले, बुलबुला झूले, लकड़ी के झूले सिर्फ कन्हैयागंज में बनते हैं।
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