3 साल बाद 35 हजार छात्रों को नहीं मिली छात्रवृत्ति:नालंदा में पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप के आवेदन की जांच अधूरी, बीच में पढ़ाई छोड़ने को बच्चे मजबूर
सरकार की महत्वाकांक्षी पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत गरीब परिवारों के छात्रों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का सपना अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ता जा रहा है। बिहार में 35,386 छात्रों का आवेदन तीन साल बाद भी लंबित है, जिससे इन मेधावी छात्रों की शैक्षिक यात्रा बाधित हो रही है। शिक्षा विभाग के सचिव दिनेश कुमार की ओर से सभी जिला मजिस्ट्रेटको को भेजे गए पत्र में इस गंभीर स्थिति की बात कहते हुए 30 अगस्त तक सभी लंबित आवेदनों की जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। नालंदा में सबसे दयनीय स्थिति नालंदा की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, जहां 929 छात्रों के आवेदन लंबित हैं। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के 419 छात्र व अन्य पिछड़ी जातियों के 510 छात्र शामिल हैं। राज्य स्तर पर देखा जाए तो अनुसूचित जाति और जनजाति के 11,695 छात्रों के आवेदन जांच बाकी हैं, जबकि अन्य पिछड़ी जातियों के 23,691 छात्रों की स्थिति और भी गंभीर है। यह संख्या इस योजना की व्यापकता और इसकी विफलता दोनों को दर्शाती है। शिक्षा सचिव ने अपने लेटर में स्पष्ट रूप से जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) की लापरवाही को इसका मुख्य कारण बताया है। उन्होंने कहा कि "दो साल बाद भी इतनी अधिक संख्या में आवेदन लंबित रखना डीईओ व डीपीओ के काम के प्रति लापरवाही दिखाता है। आर्थिक संसाधन उपलब्ध, फिर भी देरी सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकार ने इस योजना के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराए हैं। सचिव ने बताया कि "योजना की जांच, कार्यालय व्यय और आवेदनों के सत्यापन के लिए सभी जिलों को राशि उपलब्ध करा दी गई है। 2022-23 और 2023-24 में कुल 9,03,993 छात्रों ने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था। इसमें से संस्थान स्तर पर 14,082 आवेदन अभी भी लंबित हैं। प्रखंड स्तर पर 4,408 आवेदन, जिला शिक्षा कार्यालय के मेकर स्तर पर 1,549, चेकर स्तर पर 749 और होम डिस्ट्रिक्ट चेकर स्तर पर 2,903 आवेदन लंबित हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति की श्रेणी में स्थिति और भी गंभीर है। 2,79,414 आवेदनों में से संस्थान स्तर पर 6,131, प्रखंड स्तर पर 3,923, जिला स्तर पर मेकर 356, चेकर स्तर पर 297 और होम डिस्ट्रिक्ट लेवल पर 988 आवेदन अभी भी लटके हुए हैं। छात्रों पर मानसिक और आर्थिक दबाव यह देरी न केवल छात्रों की शैक्षिक प्रगति को बाधित कर रही है, बल्कि उनके परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ भी डाल रही है। गरीब परिवारों के लिए, जिन्होंने अपने बच्चों की उच्च शिक्षा का सपना देखा था, यह स्थिति अत्यंत निराशाजनक है। कई छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं। सरकारी निर्देश और समय सीमा सचिव के निर्देश के अनुसार, यदि किसी आवेदन में कमी है और 30 दिनों के अंदर सुधार नहीं किया गया है, तो उन आवेदनों को स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाए। साथ ही, यदि कोई आवेदक निर्धारित अवधि के बाद सुधार करना चाहता है, तो उससे नया आवेदन लेकर आगे की कार्रवाई की जाए।
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