बदहाल स्वास्थ्य सेवा:पटना के 21 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं
पटना जिले के 59 में से 21 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (एपीएचसी) में एक भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। प्रत्येक केंद्र में एक एमबीबीएस और एक आयुष डॉक्टर होना चाहिए। लेकिन, एक केंद्र ऐसा है, जहां एक भी डॉक्टर तैनात नहीं है। एपीएचसी रामपुर कोसूत में न तो एमबीबीएस, न ही आयुष डॉक्टर तैनात है। वहीं, एपीएचसी सिरसी, अजगरा, बिहारी बीघा और शाहानौरल में भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है, जिससे इन केंद्रों पर आयुष डॉक्टरों पर ही पूरा बोझ है। राजधानी से सटे एपीएचसी नेउरा और मोर में महज एक आयुष डॉक्टर तैनात है। एपीएचसी दतमल में भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है और वहां तैनात आयुष डॉक्टर को भी कहीं और प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है, जिससे यह केंद्र डॉक्टरविहीन हो गया है। एपीएचसी जमालपुर बिशा, करजान, रामनगर दियारा और सालिमपुर जैसे केंद्रों में एक-एक एमबीबीएस डॉक्टर ही तैनात है। इनके छुट्टी पर जाने पर स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठप हो सकती हैं। इन जगहों पर है डॉक्टरों की कमी छुट्टी और प्रतिनियुक्ति ने बढ़ाई परेशानी डॉक्टरों की कमी का एक बड़ा कारण उनका छुट्टी पर जाना या प्रतिनियुक्ति पर भेजना भी है। एपीएचसी डीह मझौली में एक एमबीबीएस डॉक्टर शैक्षिक छुट्टी पर हैं। केवल एक आयुष डॉक्टर है। एपीएचसी एकदांगा की हालत तो और भी खराब है, जहां के एमबीबीएस और आयुष डॉक्टर दोनों ही शैक्षिक छुट्टी पर हैं। इसी तरह, एपीएचसी धनामा और अरप में भी एमबीबीएस डॉक्टर या तो शैक्षणिक अवकाश पर हैं या प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए हैं, जिससे ये केंद्र एक-एक आयुष डॉक्टर के भरोसे चल रहे हैं। नियुक्त किए जा रहे डॉक्टर : डॉक्टरों की कमी को दूर करने की कोशिश की जा रही है। हाल ही में यहां 28 नए डॉक्टरों को नियुक्त किया गया है और योगदान कराने की प्रक्रिया चल रही है। सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाइयां भी उपलब्ध करा दी गई हैं। सभी आवश्यक जांच की सुविधा भी उपलब्ध है। नए डॉक्टरों की नियुक्ति के बाद यहां लोगों को बेहतर इलाज की सुविधाएं मिलेंगी।-डॉ. अविनाश कुमार सिंह, सिविल सर्जन
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