गयाजी में बॉयफ्रेंड को गिरफ्तार कराने के लिए परिजन ने बेटी के अपहरण का झूठा केस किया। पुलिस को 6 दिन तक गुमराह किया। पुलिस को शक न हो इसलिए विरोध जताने के लिए 16 अगस्त को सड़क जाम भी किया। लड़की के परिजन ने बेटी के बॉयफ्रेंड और उसके दोस्त को आरोपी भी बनाया। पुलिस के डर के कारण दोनों ने सरेंडर कर दिया, पर कोई सबूत हाथ नहीं लगा। जिसके बाद पुलिस ने 300 कॉल डिटेल, सीसीटीवी और तकनीकी आधार पर जांच की तो पता चला लड़की का अपहरण नहीं हुआ है। सीसीटीवी में लड़की घर से अकेली कहीं जाते देखी गई। जांच के दौरान लड़की का नंबर भी मिला। जिसे ट्रैक करने पुलिस 270 किमी दूर गोपालगंज पहुंची और लड़की को बरामद किया। जिसके बाद दोनों आरोपी निर्दोष पाए गए। युवती ने पुलिस को बताया कि मैं मुस्लिम लड़के से प्यार करती थी। परिवार वाले नहीं चाहते थे कि मैं उससे बात करूं। 14 अगस्त को मेरा घर पर परिवार वालों से झगड़ा हुआ था। शाम में घर छोड़कर निकल गई थी। ये जानकारी इमामगंज अनुमंडल पुलिस अधिकारी कमलेश कुमार पीसी कर दी। पुलिस के डर से आरोपियों ने किया था सरेंडर अनुमंडल पुलिस अधिकारी कमलेश कुमार ने बताया कि मामले में आरती कुमारी (25) के परिजन ने 14 अगस्त को थाने में आवेदन दिया था। 15 अगस्त को पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली थी। उसके बाद से पुलिस अपनी जांच में जुट गई थी। परिजन ने सद्दाम मियां और पहलवान मियां का आरोपी बनाया था। पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही थी। 24 घंटे के अंदर सद्दाम मियां (प्रेमी) ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कुछ ही देर में पहलवान मियां ने भी सरेंडर किया, पर इनसे कोई इनपुट हाथ नहीं लगा। जिसके बाद पुलिस ने दूसरे एंगल से जांच शुरू की। शक के आधार पर एक टनकबार निवासी सूरज पासवान को हिरासत में लिया, कड़ी पूछताछ के बाद भी सूरज पासवान ने अपहरण मामले में अपनी संलिप्तता को अस्वीकार किया। जिसके बाद पुलिस को आरती के परिजन पर शक हुआ। इसी बीच पुलिस को एक नई जानकारी मिली। पुलिस ने आस-पास के सीसीटीवी फुटेज को खंगालते हुए आरती कुमारी को सही सलामत जाते हुए देखा। पुलिस ने यह तय कर लिया कि आरती कुमारी सही सलामत और जीवित है। मां को पता था बेटी का नहीं हुआ अपहरण पुलिस के अनुसार परिजन ने बयान दिया था कि आरती के पास कोई मोबाइल नहीं है। वो अपना मोबाइल घर पर ही छोड़ गई है, पर जब पुलिस को पता चला कि आरती के पास मोबाइल है तो पुलिस ने उस नंबर को ट्रैक किया। आरती के बरामदगी के बाद पुलिस को पता चला कि अपहरण का आरोप झूठा है। आरती पहले किराना और श्रंगार की दुकान पर काम कर चुकी है। आरती कुमारी ही घर चला रही थी। जांच में ये भी पता चला कि आरती के घर से जाने की बात उसकी मां को पता थी। आरती घर के दबाव के कारण पटना और गोपालगंज में दूसरे रोजगार की तलाश कर रही थी। पुलिस को गुमराह करने वालों पर कार्रवाई होगी डीएसपी कमलेश कुमार ने बताया कि जिसने भी पुलिस को गुमराह कर कार्रवाई में बाधा डालने और क्षेत्र में अशांति फैलाने, सड़क जाम करने के उद्देश्य से घृणित मानसिकता फैलाई गई है। वैसे लोगों पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में किसी कांड को लेकर सड़क जाम करने और पुलिस को भ्रामक खबर देकर गुमराह करने वाले दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसी भी घटना को सांप्रदायिक माहौल से जोड़कर न देखने की अपील करते हुए कहा है कि गलत करने वाले चाहे किसी भी धर्म, जाति, वर्ग और समुदाय के हों अगर वह दोषी पाए जाते हैं तो उन पर विधि सम्मत उचित कार्रवाई की जाएगी।