कारगिल वीर मेजर चंद्रभूषण द्विवेदी को सिर्फ शब्दों में सम्मान:नाम केवल स्कूल सिर्फ बोर्ड पर; रिकॉर्ड में नहीं; स्मारक तक पक्की सड़क भी नहीं

Aug 14, 2025 - 20:30
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कारगिल वीर मेजर चंद्रभूषण द्विवेदी को सिर्फ शब्दों में सम्मान:नाम केवल स्कूल सिर्फ बोर्ड पर; रिकॉर्ड में नहीं; स्मारक तक पक्की सड़क भी नहीं
सीतामढ़ी में कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले मेजर चंद्रभूषण द्विवेदी को अब तक सिर्फ कागज़ी सम्मान ही मिला है। सीतामढ़ी के कारगिल चौक पर ‘कारगिल द्वार’ और नगर पालिका स्कूल उनके नाम से चल रहे हैं। लेकिन स्कूल का नाम सिर्फ बोर्ड पर लिखा है, सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं। शहीद वीर जवान शिवहर के बखार चंडिहा गांव के निवासी थे। 1970 में सैनिक स्कूल से शुरू हुआ सफर 2 जनवरी 1961 को जन्मे मेजर द्विवेदी ने 1970 में सैनिक स्कूल तिलैया में प्रवेश लिया और 1982 में एनडीए पास कर भारतीय सेना में शामिल हुए। सीमा पर तैनाती के दौरान वे हमेशा अग्रिम मोर्चे पर डटे रहे और कारगिल में शहादत दी। वादे अधूरे, सम्मान अधूरा शहादत के बाद राज्य सरकार ने गांव की सड़क, मध्य विद्यालय का नामकरण, बसतपट्टी चौक पर स्मारक और लड़कियों के लिए हाई स्कूल खोलने का वादा किया था। परिवार ने हाई स्कूल के लिए दो एकड़ जमीन भी देने की पेशकश की थी, लेकिन आज तक कोई योजना पूरी नहीं हुई। स्मारक तक जाने का भी नहीं पक्का रास्ता गांव में बने उनके स्मारक तक पक्का रास्ता नहीं है। उनके नाम पर बना खेल मैदान भी अधूरा पड़ा है। परिवार दिल्ली में, बेटियां सफल करियर में पत्नी भावना द्विवेदी को पेट्रोल पंप आवंटित किया गया। वह वर्तमान में दिल्ली के द्वारका में दोनों बेटियों के साथ रहती हैं। बड़ी बेटी नेहा डॉक्टर हैं और छोटी दीक्षा पत्रकार हैं।

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