दिल्ली में आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजने का विवाद:बक्सर के पशु प्रेमी का विरोध, कहा- 'चूहों और बंदरों की बढ़ेगी समस्या'

Aug 15, 2025 - 16:30
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दिल्ली में आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजने का विवाद:बक्सर के पशु प्रेमी का विरोध, कहा- 'चूहों और बंदरों की बढ़ेगी समस्या'
दिल्ली में आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजने के आदेश का बक्सर के पशु प्रेमी हरिओम चौबे ने विरोध किया है। चौबे ने इस फैसले को क्रूर बताया है। उसका कहना है कि यह इंसान के सबसे वफादार जानवर के साथ अन्याय है। हरिओम चौबे ने कहा कि, 'कुत्तों को शेल्टर में कैद करना उचित नहीं है।' उसने फैक्ट्स के साथ अपनी बात रखी। उसके अनुसार, कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों की तुलना में रेप की घटनाएं दस गुना ज्यादा होती हैं। 'वायु प्रदूषण से 20 लाख लोगों की मौत' चौबे ने कई अन्य मुद्दों की ओर भी ध्यान खींचा। उसने कहा, 'हर साल देश में वायु प्रदूषण से 20 लाख लोगों की मौत होती है। तंबाकू से 15 लाख लोग मरते हैं। लेकिन उसका एड टीवी पर दिखाया गया है। सुप्रीम कोर्ट में 15 करोड़ मामले लंबित हैं।' चूहों की बढ़ेगी संख्या उसने चेतावनी दी कि दिल्ली की गलियों से कुत्ते हटने से चूहों की संख्या बढ़ेगी। इससे 17 प्रकार की महामारियां फैल सकती हैं। बंदरों का आतंक भी बढ़ सकता है। उसने चीन का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां गौरैया को मारने से महामारी फैली थी। हरिओम का सुझाव है कि समस्या का समाधान खोजा जाए। उन्होंने विदेशी हाइब्रिड कुत्तों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। बीमार जानवरों का किया जाता है उपचार हरिओम चौबे बक्सर में अपनी निजी जमीन पर एक छोटा सा वेलफेयर सेंटर चलाता है। चाहे सुबह का समय हो या आधी रात, अगर उसे किसी कुत्ते, बिल्ली, बंदर या बछड़े के घायल होने की सूचना मिलती है, तो वो तुरंत मौके पर पहुंचता है और जानवर को अपने सेंटर लाकर उसका इलाज करता है। अब तक वो 2 हजार से अधिक घायल या बीमार जानवरों का उपचार कर चुका है। 4,000 से ज्यादा जहरीले सांपों का रेस्क्यू सिर्फ इतना ही नहीं, हरिओम चौबे एक अनुभवी स्नेक रेस्क्यूअर भी है। अब तक वो 4,000 से ज्यादा जहरीले सांपों को पकड़कर सुरक्षित रूप से जंगल और झाड़ियों में छोड़ चुके हैं। उनका मानना है कि हर जीव को जीने का अधिकार है, और इंसान का कर्तव्य है कि वह उसकी रक्षा करे। दिल्ली में आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजने का आदेश जहां प्रशासनिक नजरिए से समाधान माना जा रहा है, वहीं चौबे जैसे पशु प्रेमियों की नजर में यह एक अमानवीय कदम है, जिस पर समाज और सरकार को गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए।

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