बक्सर में 22 अगस्त से शुरू होगा थर्मल पावर प्रोजेक्ट:660 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू, पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन
बिहार का ऊर्जा इतिहास अब एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। जिले में 2019 से निर्माणाधीन बहुप्रतीक्षित बक्सर थर्मल पावर प्रोजेक्ट कल से बिजली उत्पादन शुरू करने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गया से रिमोट दबाकर वर्चुअल माध्यम से इस परियोजना की पहली यूनिट का शुभारंभ करेंगे। इस दौरान प्लांट के अंदर सांसद, विधायक, जिलाधिकारी समेत जिले के कई गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे। परियोजना के कमीशनिंग इंचार्ज पुलक चंद्र उपाध्याय ने बताया कि यह पल न केवल बक्सर बल्कि पूरे बिहार के लिए गौरवपूर्ण होगा। कल से शुरू होने वाली पहली यूनिट से 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा, जिसे सीधे पटना, कर्मनाशा और डेहरी-ऑन-सोन ग्रिड को भेजा जाएगा। शुक्रवार को इस यूनिट का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। 2019 में हुआ था शिलान्यास, लागत बढ़ी 14,390 करोड़ तक इस परियोजना का शिलान्यास 9 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री मोदी ने ही वर्चुअल माध्यम से किया था। उस समय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह भी मौजूद थे। परियोजना की प्रारंभिक लागत 10,439 करोड़ रुपये थी, लेकिन काम में विलंब और बाधाओं के कारण यह लागत बढ़कर 14,390 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। एसजेवीएन के अधीन है परियोजना यह पावर प्रोजेक्ट नवरत्न कंपनी एसजेवीएन (Satluj Jal Vidyut Nigam Limited) के अधीन है। भारत सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में 1988 में स्थापित एसजेवीएन का मुख्यालय शिमला में है। यह कंपनी नथपा झाकड़ी हाइड्रो पावर स्टेशन (1500 मेगावाट) जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए जानी जाती है। हाल ही में इसे नवरत्न PSU का दर्जा मिला है। वर्तमान में इसकी स्थापित क्षमता करीब 2466 मेगावाट है और लक्ष्य आने वाले वर्षों में 56 हजार मेगावाट तक पहुंचना है। रोजगार और बिजली वितरण कंपनी अधिकारियों के मुताबिक, बक्सर परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 10 हजार लोगों को रोजगार मिला है। उत्पादित बिजली का 85 प्रतिशत हिस्सा बिहार सरकार को और शेष 15 प्रतिशत केंद्र सरकार की व्यवस्था के तहत ओडिशा, असम, सिक्किम सहित अन्य राज्यों को दिया जाएगा। भविष्य की क्षमता 1980 मेगावाट तक फिलहाल प्लांट में दो यूनिट बन रही हैं। पहली यूनिट कल से चालू हो रही है और दूसरी यूनिट अगले साल तक तैयार होगी। इसके बाद संयंत्र की क्षमता 1320 मेगावाट तक पहुंच जाएगी और भविष्य में इसे बढ़ाकर 1980 मेगावाट करने की योजना है। रोजाना 7 हजार टन कोयले की खपत परियोजना से प्रतिदिन लगभग 10 हजार करोड़ रुपये मूल्य की बिजली उत्पादन होने का अनुमान है। इसके लिए रोजाना 7 हजार टन कोयला और 55 क्विशेक पानी की जरूरत होगी। इसकी पूरी व्यवस्था प्लांट के भीतर ही की गई है। बिहार को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाएगा प्रोजेक्ट विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपलब्धि से बिहार ऊर्जा क्षेत्र में और मजबूत होगा। आने वाले दिनों में प्रदेश के घर-घर तक उजियारा पहुंचेगा। कम दर पर बिजली उपलब्ध होने से बड़ी कंपनियां भी बिहार में निवेश करेंगी। इससे औद्योगिकरण को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0