शेखपुरा में इंटर की परीक्षा को लेकर सख्ती:DM–SP की संयुक्त बैठक, 2 से 13 फरवरी तक परीक्षा, जूता-मोजा और मोबाइल पूरी तरह बैन
शेखपुरा में इंटरमीडिएट परीक्षा के कदाचारमुक्त और सफल संचालन के लिए बुधवार को समाहरणालय स्थित मंथन सभागार में जिला पदाधिकारी शेखर आनंद और पुलिस अधीक्षक बलिराम कुमार चौधरी ने संयुक्त बैठक की। परीक्षा 2 फरवरी से 13 फरवरी तक आयोजित की जाएगी। बैठक में सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया। जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम उपलब्ध कराया जाएगा। वीक्षकों को योगदान के बाद परीक्षा की गोपनीयता और संबंधित निर्देशों से अवगत कराया जाएगा। प्रतिदिन वीक्षकों का रैंडमाइजेशन भी किया जाएगा। कम से कम दो वीक्षक अनिवार्य रूप से रहेंगे
प्रत्येक 25 परीक्षार्थियों पर एक वीक्षक की प्रतिनियुक्ति होगी, लेकिन प्रत्येक कक्ष में कम से कम दो वीक्षक अनिवार्य रूप से रहेंगे। एक बेंच पर अधिकतम दो परीक्षार्थियों को बैठाने की अनुमति होगी, जिसके लिए सीटिंग प्लान तैयार किया जाएगा। परीक्षा केंद्रों पर सघन फ्रिस्किंग की व्यवस्था रहेगी ताकि किसी भी परीक्षार्थी के पास मोबाइल, स्मार्टफोन या कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण न हो। परीक्षार्थियों के बैठने की दूरी कम से कम 3 फीट होनी चाहिए। केंद्रों पर पेयजल, शौचालय, रोशनी और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। जूता पहनकर आने की अनुमति नहीं होगी
परीक्षार्थी केवल अपना प्रवेश पत्र लाएंगे और उन्हें जूता/मोजा पहनकर आने की अनुमति नहीं होगी। प्रवेश गेट पर गहन जांच की जाएगी। आवश्यकतानुसार स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और 500 मीटर की दूरी पर एक फोटोग्राफर नियुक्त किया जाएगा। सभी वीक्षक अपने आवंटित कक्ष में फ्रिस्किंग का कार्य करेंगे। परीक्षा केंद्र के बाहर "CCTV निगरानी" संबंधी प्लेकार्ड लगाना अनिवार्य होगा। केंद्र के बाहर सीटिंग प्लान और सभी कक्षों का रूट चार्ट प्रदर्शित किया जाएगा। प्रत्येक कक्ष में दीवार घड़ी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। परीक्षा प्रारंभ के बाद प्रवेश की अनुमति नहीं होगी
प्रथम एवं द्वितीय पाली के परीक्षा समय और प्रवेश समय को परीक्षा केंद्र के बाहर स्पष्ट रूप से अंकित किया जाएगा। परीक्षा प्रारंभ होने के बाद किसी भी परिस्थिति में परीक्षार्थियों को केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। मुख्य द्वार बंद होने के बाद यदि कोई परीक्षार्थी अवैध रूप से प्रवेश का प्रयास करता है, तो इसे आपराधिक अतिक्रमण (क्रिमिनल ट्रेसपास) माना जाएगा। परीक्षार्थी को दो वर्ष के लिए परीक्षा से निष्कासित किया जाएगा तथा प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। संबंधित परीक्षा केंद्र के कर्मियों की संलिप्तता पाए जाने पर उनके विरुद्ध निलंबन एवं कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। सभी केंद्राधीक्षक प्रश्नपत्र वितरण चार्ट
पालीवार तैयार करेंगे तथा प्रश्नपत्र खोलने संबंधी निर्देशों का पालन करेंगे। कदाचार-मुक्त परीक्षा संचालन की पूर्ण जिम्मेदारी केंद्राधीक्षक एवं वीक्षकों की होगी। सभी केंद्राधीक्षक या विक्षक अपना अपना आईडी कार्ड लगाकर उपस्थित रहेंगे। कदाचार में संलिप्त पाए जाने पर बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम, 1981 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन द्वारा सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण, पारदर्शी एवं निष्पक्ष वातावरण में संपन्न हो सके।
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