Patna Nagar Nigam: 10 माह में हटाना है 13 लाख टन Legacy Waste, लेकिन RDF उठान बनी सबसे बड़ी चुनौती

Jan 24, 2026 - 06:30
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Patna Nagar Nigam: 10 माह में हटाना है 13 लाख टन Legacy Waste, लेकिन RDF उठान बनी सबसे बड़ी चुनौती

Patna Nagar Nigam: राजधानी के रामचक बैरिया में करीब 13 लाख टन से अधिक लीगेसी वेस्ट (legacy waste) है. इसमें करीब छह लाख टन का प्रोसेस कर दिया गया है. लेकिन, प्रोसेस के बाद निकलने वाला आरडीएफ डीकंपोज करने की समुचित व्यवस्था नहीं है. इससे बैरिया का बड़ा हिस्सा आरडीएफ से घिरा हुआ है. जानकारी के मुताबिक पटना नगर निगम (पीएमसी) ने नेकॉफ कंपनी को छह लाख टन पुराने कचरे को खत्म करने की जिम्मेदारी दी है. उसने अब तक करीब 22 एकड़ जमीन को खाली कराया है. अगर आरडीएफ के लिए अच्छी व्यवस्था हो जाये, तो करीब 55 एकड़ जमीन आसानी से खाली हो सकती है, क्योंकि करीब 33 एकड़ में आरडीएफ का पहाड़ बन गया है.

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मालूम हो कि केंद्र सरकार ने पुराने कचरे (legacy waste) को खत्म करने के लिए डंप साइट रेमेडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (ड्रैप) शुरू किया है. इसमें देश के 214 प्रमुख डंपसाइट में रामचकबैरिया भी शामिल है. वहीं, पीएमसी (Patna Nagar Nigam) के छह अंचलों के साथ 12 नगर परिषद का भी कचरा रामचक बैरिया में ही डंप किया जाता है. ऐसे में बड़ा सवाल है कि निगम के पास व्यवस्था नहीं, तो 10 माह में 13 लाख टन का कचरा कैसे साफ होगा. वहीं, निगम को लीगेसी वेस्ट को प्रोसेस करने के लिए करीब 51.3 करोड़ रुपये खर्च होंगे, क्योंकि एक टन लीगेसी वेस्ट केवल प्रोसेस करने में करीब 395 रुपये खर्च होते हैं.

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प्रति व्यक्ति हर दिन 600 ग्राम तक कचरा कर रहा उत्पादन

शहर से हर दिन करीब 680 से 1200 टन कचरा निकलता है. एक व्यक्ति औसतन 450 से 600 ग्राम कचरा प्रतिदिन उत्पादन करता है. इसके लिए निगम के छह अंचलों में गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन बनाये जा रहे हैं, जिनकी लागत करीब 53 करोड़ रुपये है. वहीं, नये कचरे के निबटान के लिए बैरिया में इकोस्टन को जिम्मेदारी दी गयी है. लेकिन, नगर परिषद से आ रही गाड़ियां जहां खाली जगह मिले वहीं गिरा रहा है. 86 एकड़ फैले डंपयार्ड में 1.5 एकड़ में पौधारोपण किया गया है. इसके अलावा एनिमल क्रिमिटोरियम, मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट आदि के लिए भी पांच एकड़ से अधिक जमीन दी गयी है. इसके अलावा साइट पर पांच बायो-रेमेडिएशन प्लांट, ट्रोमेल स्क्रीन, बायोमाइनिंग इकाइयां और करीब 120 कंपोस्ट गड्ढे हैं.

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कोट: इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. एक से दो माह में एजेंसी फाइनल कर लिया जायेगा. करीब 514 करोड़ रुपये से 16 सौ टीपीडी कचरा निस्तारण क्षमता वाली आधुनिक इकाइयां स्थापित होंगी. इसे शुरू करने के बाद पटना सहित 13 नगर निकायों के कचरे का प्रोसेस करना आसान हो जायेगा.
– यशपाल मीणा, नगर आयुक्त

तीन चरणों में किया लीगेसी वेस्ट (legacy waste) का उपचार
– ट्रोमेल स्क्रीनिंग से कचरे की छंटाई
– आरडीएफ प्रोसेसिंग से ईंधन निर्माण
– कंपोस्टिंग के जरिए जैविक कचरे का निपटान

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डंपिंग साइट में किया गया है पौधारोपण व कंपोस्ट यूनिट.

प्रभात नॉलेज: लीगेसी वेस्ट में करीब 40 से 60 प्रतिशत तक सड़े-गले जैविक कचरे और धूल से बनी मिट्टी जैसे बारीक कण होते हैं. करीब 15 से 18 प्रतिशत प्लास्टिक, कपड़ा, कागज, गत्ता, लकड़ी के टुकड़ेआदि. लगभग 20 प्रतिशत पत्थर, ईंट, मलबा और टूटे कांच जैसे बेकार पदार्थ होते हैं. वहीं, एक से पांच प्रतिशत तक धातु और कठोर प्लास्टिक जैसे रीसाइक्लिंग योग्य सामान मिलते हैं.

प्रभात इनडेप्थ: आरडीएफ (RDF) हटाने के लिए ठोस व्यवस्था जरूरी है. आरडीएफ को ईंधन के रूप में सीमेंट फैक्ट्रियों और पावर प्लांट में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसी कारण सभी सीमेंट प्लांट व बिहार के पावर प्लांट में आरडीएफ उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी. इससे एक ओर कचरे का निस्तारण होगा, वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक ईंधन का उपयोग भी बढ़ेगा. वर्तमान में पीएमसी केवल एक ही सीमेंट कंपनी को भेज रहा है.

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क्या होता है लीगेसी वेस्ट: सालों तक खुले डंपसाइट पर जमे कचरे को लीगेसी वेस्ट (legacy waste) कहा जाता है. इसमें घरेलू कचरा, प्लास्टिक, निर्माण मलबा और जैविक अपशिष्ट शामिल होता है.लीगेसी वेस्ट को खत्म करने के लिए बायो माइनिंग और बायो रेमेडिएशन तकनीक अपनाई जाती है. इसमें कचरे की छंटाई कर उपयोगी सामग्री निकाली जाती है, जैविक कचरे से कंपोस्ट बनता है और शेष कचरे से ईंधन या ऊर्जा तैयार की जाती है. इससे डंपसाइट खाली होती है और जमीन दोबारा उपयोग लायक बनती है.

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स्वच्छता सर्वेक्षण में वेस्ट मैनेजमेंट की भूमिका सबसे अहम: पीएमसी (Patna Nagar Nigam) के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण में वेस्ट मैनेजमेंट की भूमिका सबसे अहम है. कुल अंकों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और कचरा उठाव परिवहन के लिए करीब 2500 अंक तय हैं. यदि पटना में कचरे का सही तरीके से अलग-अलग संग्रह, प्रोसेसिंग और निस्तारण शुरू हो जाए, तो शहर को गार्बेज फ्री सिटी में फाइव स्टार रेटिंग मिल सकती है. अभी प्रोसेसिंग प्लांट व सिंगल यूज प्लास्टिक पर कमजोर कार्रवाई बड़ी चुनौती है. इन कमियों को दूर कर लिया जाए, तो रैंकिंग में पटना लंबी छलांग लगा सकता है.

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Vikash Kumar Editor-in-chief