दरभंगा के गंगेश्वर महादेव स्थान में श्रद्धालुओं ने चढ़ाया जल:सावन की अंतिम सोमवारी पर भक्तों ने किया जलाभिषेक, हर-हर महादेव के लगे नारे

Aug 4, 2025 - 12:30
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दरभंगा के गंगेश्वर महादेव स्थान में श्रद्धालुओं ने चढ़ाया जल:सावन की अंतिम सोमवारी पर भक्तों ने किया जलाभिषेक, हर-हर महादेव के लगे नारे
दरभंगा में सावन की अंतिम सोमवारी पर बाबा कुशेश्वरनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मिथिलांचल का बैद्यनाथ कहा जाने वाले इस तीर्थस्थल पर सोमवार को भक्तों का जनसैलाब देखने को मिला। पूरा इलाका हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंज उठा। रविवार की देर रात से ही भक्त कतार में लगने लगे। इस बार की भीड़ ने पिछले का रिकॉर्ड तोड़ दिया। मंदिर प्रांगण से लेकर शिवगंगा घाट तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखीं। करीब ढाई किलोमीटर दूर तक लंबी कतार लगी हुई है। अभी तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु जलाभिषेक कर चुके हैं। करीब 2 लाख श्रद्धालु जलाभिषेक करेंगे। भक्तों ने रात से ही शिवगंगा में स्नान कर खुद को शुद्ध किया। बाबा कुशेश्वरनाथ के दर्शन के लिए कतार में खड़े हो गए। श्रद्धा और उत्साह का अद्वितीय संगम देखने को मिल रहा है। कई श्रद्धालु दूर-दराज के जिलों और अन्य राज्यों से भी पहुंचे हुए हैं। सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था प्रशासन और स्थानीय समिति सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था कर रखी है। महिलाओं और पुरुषों की कतारें अलग-अलग दिशा में लगाई गईं। इससे दर्शन प्रक्रिया में कोई अव्यवस्था नहीं हुई। महिलाएं एक ओर से, पुरुष दूसरी ओर से मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं। श्रद्धालुओं में बाबा के प्रति अटूट आस्था देखी जा रही है। उनके लिए यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कराती है। सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर रविवार की देर रात से डीएम कौशल कुमार, एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी, ग्रामीण एसपी आलोक कुमार, एसडीएम शशांक राज, एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी, बीडीओ अशोक कुमार जिज्ञासु और सीओ गोपाल पासवान सहित स्थानीय प्रशासन पूरी रात विधि व्यवस्था में लगे देखे गए। 800 साल पहले बना था मंदिर जाले प्रखंड क्षेत्र के रतनपुर गांव में कमतौल थाना क्षेत्र के अंतर्गत अवस्थित पुराना देवालय गंगेश्वर स्थान उत्तर बिहार के प्रमुख शिवालयों में से एक माना जाता है। इतिहासविदों के अनुसार इस मंदिर की स्थापना लगभग 800 साल पहले कर्नाट वंश के राजा नान्यदेव के बेटे गंगदेव ने की थी। पौराणिक मान्यता है कि गंगदेव ने अपने पिता की पराजय का बदला लेने और उन्हें मुक्त कराने के लिए यह देवस्थल बनवाया था। इसी कारण इस स्थान का नाम गंगेश्वर महादेव पड़ा। ग्रंथों और लोककथाओं में वर्णित मान्यता के अनुसार महाभारत काल में वनवास के दौरान पांडवों ने कुछ समय तक यहां निवास किया था । इन्होंने भगवान शिव की आराधना की थी। इसी वजह से इसे महाभारतकालीन स्थल भी माना जाता है। मनोकामना पूर्ति के लिए ये जगह फेमस गंगेश्वरस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित पुराना शिवलिंग हैं, जो विभिन्न आकारों में विद्यमान हैं। प्राकृतिक हरियाली, शांति व आध्यात्मिक वातावरण इसे भक्तों के लिए विशेष स्थान बनाते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि मनोकामना पूर्ति के लिए गंगेश्वर महादेव अत्यंत प्रसिद्ध हैं। भव्य मेला व विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है, जिसमें दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर समेत उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं। उत्सव के दौरान रतनपुर गांव एक धार्मिक नगरी में बदल जाता है। गंगेश्वरस्थान केवल एक मंदिर नहीं बल्कि आस्था, विश्वास और अध्यात्म का केंद्र है। यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि महादेव के दर्शन मात्र से मन की शांति मिलती है। सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह स्थल आज भी उत्तर बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में प्रतिष्ठित है। स्थानीय ग्रामीणों और तीर्थयात्रियों की सालों की मान्यता आज भी इस स्थल को जीवंत बनाती है, जिससे गंगेश्वर महादेव का यह धाम बिहार के महत्वपूर्ण शिव तीर्थों में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। यहां भी करीब 1 लाख श्रद्धालु आज जलाभिषेक करेंगे।

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