'छोटी बेटी की शादी कैंसिल की, इसलिए बेटी-दामाद-नाती को मारा':चेन्नई ट्रिपल मर्डर केस में मृतका की मां का दावा, बोली- रविंद्र ने परिवार उजाड़ दिया
'मकर संक्रांति को मेरी बेटी और नाती घर से जा रहे थे। मैं बेटी को विदा कर रही थी। मुझे नहीं पता था कि बेटी इतनी दूर चली जाएगी। मुझे लगा कि पास में ही कही जा रही होगी। मुझे अगर पता होता कि उन्हें चेन्नई ले जाया जा रहा है, तो मैं उन्हें रोक ही लेती।' ये बातें नालंदा के मानपुर के खुसनानपुर की रहने वाली रीता देवी ने दैनिक भास्कर से कही है। रीता देवी की बेटी 23 साल की मोनी कुमारी, दामाद 28 साल के गौरव यादव और डेढ़ साल के नाती गुड्डू उर्फ वीरमणि की चेन्नई के अडयार थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर में हत्या कर दी गई। गौरव की लाश कई टुकड़ों में बोरे में बंद कचरे के पास से, जबकि वीरमणि की लाश मध्य कैलाश के पास कूउम नदी से बरामद हुई। वहीं, पत्नी मोनी कुमारी के शव की तलाश पेरूंगुडी डंपिंग यार्ड के कचरे के ढेर में की जा रही है। गौरव, उसकी पत्नी मोनी कुमारी और डेढ़ साल के वीरमणि की हत्या किसने की, वारदात को क्यों अंजाम दिया गया, घटना को लेकर मोनी के मां का क्या कहना है? पढ़ें पूरी रिपोर्ट। 3 साल पहले हुई थी शादी गौरव शेखपुरा के पथलाफर, जबकि मोनी कुमारी नालंदा के खुसनानपुर की रहने वाली थी। दोनों की 3 साल पहले यानी 2023 में शादी हुई थी। मोनी के परिवार के लोगों की माने तो चेन्नई में हुए ट्रिपल मर्डर के पीछे सिर्फ लूटपाट या निजी रंजिश नहीं, बल्कि 'अहंकार और टूटी हुई शादी' की एक गहरी साजिश है। शादी से इनकार पर ट्रिपल मर्डर अब तक पुलिस इसे नौकरी का झांसा और हत्या मान रही थी, लेकिन मृतका मोनी कुमारी की मां रीता देवी ने जो खुलासा किया है, उसने जांच की दिशा बदल दी है। परिवार का आरोप है कि यह हत्या 'इनकार' का नतीजा है। दरअसल, मोनी 7 बहनों में तीसरे नंबर पर थी। परिवार पहले ही बचपन में अपने दो बेटों को बीमारी में खो चुका है। मां रीता देवी बताती हैं कि मेरी चौथी बेटी की शादी एक साल पहले शेखपुरा के लोदीपुर गांव में तय हुई थी, लेकिन मेरे दामाद गौरव कुमार (मृतक) ने पता किया और बताया कि लड़का ठीक नहीं है। उनकी सलाह पर हमने वह शादी तोड़ दी। यहीं से रंजिश की शुरुआत हुई। आरोप है कि शादी कैंसिल होने के बाद दहेज के रूप में दिए गए 1 लाख रुपए भी वापस नहीं मिले। लोदीपुर (जहां शादी तय थी) और बहुआरा (जहां का मुख्य आरोपी रविन्द्र उर्फ उपेंद्र यादव है) के लोगों के बीच गहरा संबंध बताया जा रहा है। रीता देवी बोली- बेटी की शादी से इनकार किया, इसी का नतीजा है रीता देवी ने कहा, 'उनलोगों में शादी कैंसिल होने का गुस्सा था। जबकि मेरे दामाद ने सही सलाह दी थी, इसी की सजा रविन्द्र यादव और उसके साथियों ने मेरी बेटी, दामाद और नाती को मारकर दी।' गौरव यादव 14 जनवरी को अपने ससुराल (खुसनानपुर) पहुंचे थे। एक दिन रुकने के बाद, मकर संक्रांति के दिन वे वहां से निकले। परिजनों को लगा कि वे अपने घर जा रहे हैं, लेकिन उन्हें चेन्नई ले जाया गया।' मोनी के पिता नरेश यादव को घटना की जानकारी उनके साढ़ू के बेटे से मिली। आज उस घर में सिर्फ मातम है। दो बेटे पहले ही जा चुके थे, अब तीसरी बेटी और उसका वंश (नाती) भी खत्म हो गया। मोनी के पिता नरेश यादव बताते हैं, ‘चेन्नई पहुंचने के बाद दामाद से आखिरी बार बात हुई थी। आरोपी और मेरी बेटी के बीच पहले से कोई जान-पहचान नहीं थी। सब कुछ दामाद के भरोसे पर हुआ। चेन्नई के अड्यार में नौकरी का सपना दिखाकर उन्हें बुलाया गया, लेकिन 21 जनवरी को साजिश के तहत तीनों को मौत के घाट उतार दिया गया।’ आरोपी का दोहरा चेहरा: गांव में 'सीधा', शहर में 'कातिल' ट्रिपल मर्डर केस का मुख्य आरोपी रविन्द्र यादव (जिसे अब तक उपेंद्र यादव बताया जा रहा था) नालंदा के बहुआरा गांव का है। जब दैनिक भास्कर रिपोर्ट रविन्द्र यादव के गांव पहुंची, तो गांव के लोग अपने अपने काम में व्यस्त दिखे। नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने कहा कि रविन्द्र का स्वभाव बहुत सरल था, वह 6 महीने पहले ही चेन्नई गया था। वो ऐसा कैसे कर सकता है, ये समझ से परे है। लेकिन पुलिस की जांच और सीसीटीवी फुटेज उस 'सरल' चेहरे के पीछे छिपे दरिंदे की कहानी बयां कर रहे हैं। ऑडियार के एक अस्पताल में सिक्योरिटी गार्ड था गौरव गौरव कुमार पिछले 4 सालों से चेन्नई के ऑडियार थाना क्षेत्र के एक अस्पताल में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करता था। परिवार को लेकर गौरव पहली बार चेन्नई गय था। शव मिलने के तीन दिन पहले से गौरव का कोई अता-पता नहीं था। परिजनों के अनुसार, 25 जनवरी को चेन्नई पुलिस ने गौरव के पिता को उनके बेटे की मौत की सूचना दी थी। पिता को सूचना मिलने पर उन्होंने चेन्नई में रह रहे अपने बड़े बेटे को जानकारी दी, जिसने मौके पर पहुंचकर गौरव कुमार की हत्या की पुष्टि की। मृतक के छोटे भाई सुरेंद्र यादव ने बताया, 2-3 दिन से मेरे भाई-भाभी और भतीजा गायब थे। इसके बाद वहां की पुलिस ने मेरे पिता को फोन किया, वो तमिल में बोल रहे थे। इससे पापा समझ नहीं पाए। इसके बाद पापा ने बड़े भइया को पुलिस से बात करने बोला, वो भी 6 साल से चेन्नई में रह रहे है।
गौरव का शव कचरे के ढेर से मिला मृतक के पिता सुरेन्द्र यादव ने बताया, ‘मकर संक्रांति के दूसरे दिन 16 जनवरी को मेरा बेटा अपनी पत्नी को लेकर ऑडियार चला गया था। चेन्नई पुलिस की सूचना पर मुझे बेटा-बहू और पोते के मारे जाने की सूचना मिली है।’ ‘पिता और पुत्र की लाश एक कचरे के ढेर में एक बोरे में बंद मिली, जिसमें बेरहमी से मारकर कई टुकड़ों में काटकर हत्यारों ने फेंक दिया था। बहू के शव की तलाश की जा रही है।’ ‘पकड़ा गया आरोपी उपेन्द्र यादव ही मेरे बेटे को काम कराने के लिए चेन्नई के ऑडियार ले गया था। गौरव वहां एक कंपनी में सिक्यूरिटी गार्ड के रूप में काम करता था।’ आरोपी की निशानदेही पर मिला पिता-बेटे का शव पुलिस अभी तक गौरव कुमार और उनके बेटे की हत्या के कारणों का पता नहीं लगा पाई है। मामले में न तो किसी पुरानी दुश्मनी की पुष्टि हुई है और न ही किसी विवाद की ठोस जानकारी सामने आई है। चेन्नई पुलिस ने उपेंद्र यादव सहित 5 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने गौरव की पत्नी और बेटे की हत्या करने की बात कबूल कर ली है। उनके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर, पुलिस ने पिता और बेटे का शव बरामद किया। पुलिस हत्या का मकसद, घटनाक्रम और हर व्यक्ति की भूमिका का पता लगाने के लिए संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। सीसीटीवी फुटेज में दो लोग बोरी फेंकते दिखे चेन्नई में गौरव कुमार का शव तब मिला जब स्थानिय लोगों ने एक अपार्टमेंट परिसर के पास खून से सना हुआ बोरा लावारिस हालत में देखा और पुलिस को सूचित किया। इलाके से मिले सीसीटीवी फुटेज में दो लोगों को बाइक पर बोरी ले जाते और उसे उस जगह पर फेंकते हुए देखा गया।
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