नालंदा में धान खरीद व्यवस्था चरमराई:78 दिन में लक्ष्य का आधा भी नहीं, इंतजार में 40 हजार से अधिक किसान
फोर्टिफाइड राइस कार्नेल्स (एफआरके) की आपूर्ति न होने से पूरी व्यवस्था ठप पड़ गई है। चावल जमा करने की प्रक्रिया रुक जाने से खरीद की चक्रिय व्यवस्था (रोटेशन सिस्टम) पूरी तरह प्रभावित हो गई है। नतीजतन, समितियां धान खरीदने से इनकार कर रही हैं और किसान पैक्स तथा व्यापार मंडलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिले में अब तक 828 टन एफआरके की मांग की गई थी, लेकिन मात्र 33 टन की ही आपूर्ति हुई है। तीन एजेंसियों को एफआरके की आपूर्ति के लिए निबंधित किया गया है, लेकिन उनकी मनमानी के आगे जिम्मेवार अधिकारी भी बेबस नजर आ रहे हैं। 40 हजार से अधिक किसान इंतजार में सरकारी दर पर धान बेचने के लिए अब तक 49 हजार 574 किसानों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन केवल 9027 किसान ही अपनी उपज बेच पाए हैं। शेष 40 हजार से अधिक किसान रोजाना पैक्स और मंडियों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। इस बार साधारण धान पर पिछले साल की तुलना में प्रति क्विंटल 69 रुपए अधिक यानी 2369 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहे हैं। लेकिन बाजार में व्यापारी केवल 2250 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल ही दे रहे हैं।
गोदाम भरे, कैश क्रेडिट खत्म पैक्सों का कहना है कि उन्हें जितना कैश क्रेडिट मिला था, उतना धान खरीद लिया गया है। गोदाम पूरी तरह भर चुके हैं। न तो उनके खाते में कैश क्रेडिट बचा है और न ही धान रखने के लिए जगह। नियमानुसार, गोदाम की क्षमता से अधिक खरीद नहीं की जा सकती। एफआरके की कमी के कारण मिलर धान लेने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में समितियां चाहकर भी किसानों से धान खरीद नहीं कर पा रही हैं। अब तक करीब 1362 लॉट (एक लॉट 247 क्विंटल) धान की खरीद हुई है, लेकिन एसएफसी के गोदाम में केवल 98 टन चावल ही जमा हो पाया है। टैगिंग में गड़बड़ी भी एक वजह नालंदा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के उपाध्यक्ष पंकज कुमार बताते हैं कि इस बार पैक्स और मिलरों की टैगिंग में नियमों का पालन नहीं हुआ। पिछले साल तक पैक्सों से सहमति लेकर टैगिंग की जाती थी, जिससे बेहतर समन्वय रहता था। लेकिन इस बार बिना सहमति के ही टैगिंग कर दी गई। साथ ही, इस बार खरीद का लक्ष्य भी पिछले साल की तुलना में कम रखा गया है।
धान खरीद में तेजी लाने का प्रयास जिला सहकारिता पदाधिकारी धर्मनाथ प्रसाद का कहना है कि धान खरीद में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है। एफआरके आपूर्ति करने वाली एजेंसियों से बातचीत की जा रही है ताकि चावल जमा करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। सभी बीसीओ को लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0