समस्तीपुर में सीपीआर पर सेमिनार हुआ:कहा- सीपीआर सही समय पर देने से बचाई जा सकती जान, सभी को आना चाहिए
समस्तीपुर शहर के मूलचंद रोड में सीपीआर को लेकर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में शहर के जाने-माने चिकित्सक डॉक्टर सौमेंदु मुखर्जी ने लोगों को सीपीआर को लेकर जागरूक किया। कहा गया कि कभी-कभी ज़िंदगी बहुत छोटी दूरी पर अटक जाती है। दिल और अगली धड़कन के बीच बहुत कम फासले होते हैं। उसी छोटे से फासले का नाम है सीपीआर। हार्ट अटैक आने के दौरान अगर सही समय पर सही तरीके से मरीज को सीपीआर दी जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि सीपीआर कोई डॉक्टरों की जादूगरी नहीं, यह आम लोगों की हिम्मत, समझ और समय पर उठाया गया कदम है।
जब किसी व्यक्ति का दिल अचानक धड़कना बंद कर दें या वह बेहोश होकर सांस न ले रहा हो, तो CPR दिल और दिमाग तक खून की आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश है। ताकि एम्बुलेंस आने तक ज़िंदगी रुकी न रहे। भारत में अचानक हृदयगति रुकने के ज़्यादातर मामले घर या सड़क पर होते हैं। अस्पताल पहुंचने से पहले 5–7 मिनट सबसे कीमती होते हैं। सही समय पर दिया गया CPR जीने की संभावना 2–3 गुना बढ़ा देता है। इस दौरान एक गुड़िया पर सीपीआर देकर लोगों को सीपीआर देने का तरीका भी बताया। कहा गया कि अगर कोई व्यक्ति बेहोश है, सांस नहीं ले रहा / असामान्य सांस है। पुकारने या हिलाने पर प्रतिक्रिया नहीं दे रहा, तो देर न करें। मदद बुलाइए और CPR शुरू कीजिए।
रुकिए मत, जब तक, एम्बुलेंस न आ जाए। व्यक्ति में हरकत न दिखे। सभी लोगों को सीपीआर सीखना चाहिए कहा कि सीपीआर देने के लिए किसी को डॉक्टर होने की जरूरत नहीं है, सभी लोगों को यह तरीका सीखना चाहिए।
माता-पिता, शिक्षक, ड्राइवर, पुलिस / सुरक्षा कर्मी,
ऑफिस कर्मचारी और हर जागरूक नागरिक इसके तरीके को सीखना चाहिए क्योंकि अगली जरूर किसी अनजान को अपने ही किसी अपने को पड़ सकती है।
CPR कोई पाठ्यक्रम नहीं, यह एक नागरिक संस्कार है।
आपके हाथों में किसी की ज़िंदगी की अगली धड़कन हो सकती है।
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