भागलपुर- 900 फीट की ऊंचाई से बाढ़ का ड्रोन VIDEO:कमर तक पानी; 6.67 लाख आबादी प्रभावित, बाढ़ पीड़ित बोले- कोई देखने वाला नहीं
भागलपुर में 12 प्रखंड की 110 पंचायत और शहरी क्षेत्र के 4 वार्ड (वार्ड संख्या- 9, 10, 1 और 2) में गंगा का पानी फैल गया है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, 12 प्रखंड में करीब लगभग 6.67 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। कहीं कमर तक पानी है तो कहीं सीने तक। ऐसी स्थिति में कुछ लोग विस्थापित हो गए हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि शिविर में जगह कम है, इस कारण एक छत पर 40 लोग एक साथ रह रहे हैं। कुछ जगह से ऐसी भी तस्वीर आई है कि एक चौकी पर 5 से 6 लोग बैठे हैं, उसी पर कभी-कभी खाना भी बन रहा है, लोग खाना भी खा रहे हैं, आराम भी कर रहे हैं। कुछ इलाकों में तो बाढ़ पीड़ित चूड़ा-सत्तू खाकर रह रहे हैं। बच्चे पानी में बिस्किट डूबो कर खाने को मजबूर हैं। बिजली 10 घंटे से ज्यादा नहीं रहती। मोहल्ले-टोले और घरों में पानी भरा है। जिले में बाढ़ की स्थिति दिखाने के लिए भास्कर ने 900 फीट की ऊंचाई से ड्रोन शॉर्ट लिया है। भागलपुर में बाढ़ की स्थिति जानने से पहले, कुछ ड्रोन तस्वीरें देख लीजिए... अब जानिए बाढ़ पीड़ितों की तकलीफें क्या हैं कई दिनों से नींद पूरी नहीं हुई सबौर लैलख गांव निवासी सुलेखा ने कहा कि '2021 में भी पानी आया था, लेकिन इस बार घर का सामान बर्बाद हो गया। मवेशी मर रही है। रात में नींद नहीं आती है, डर लगा रहा है कि टेंट गिर न जाए। इसके अलावा सांप का भी डर रहता है। इसलिए पूरी रात निगरानी करनी पड़ती है। कई दिनों से हम सो नहीं पाए हैं।' धान रोपनी की थी, बाढ़ में सब बर्बाद बरारी निवासी राहुल ने कहा कि 'खेत में धान की रोपनी की थी। बाढ़ के कारण सब बर्बाद हो गया है। अब दोबारा बुआई नहीं कर पाएंगे। सोचा था फसल अच्छी होगी। बाढ़ के कारण काफी नुकसान हुआ है। उसकी भरपाई अब कैसे होगी। ये सोचकर पूरा दिन निकल जाता है। हम लोग जैसे-तैसे रह रहे हैं।' रात में आने जाने के लिए नाव नहीं दिलदारपुर बिंद टोली के प्रकाश महतो ने कहा कि हम लोग बड़ी परेशानी में है। अब तक किसी ने मदद नहीं की है। कोई अधिकारी देखने तक नहीं आता है। अधिकारी अपनी कुर्सी देख रहे हैं, लेकिन यहां घर पानी में बह रहा, ये उन्हें नहीं दिखता है। सत्तू खाकर रहना पड़ रहा है। इलाके में अगर कोई बीमार हो जाए तो परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है। समय पर नाव नहीं मिले तो मरीज की मौत हो सकती है। दिन में तो किसी तरह नाव उपलब्ध हो जाता है, पर रात में कोई उपाय नहीं है। नाव वाला नहीं आता है। घर के अगल-बगल 20 फीट गहरा पानी संतोष पासवान ने कहा कि घर के बगल में 20 फीट गहरा पानी है। हम लोग छत पर रह रहे हैं। बहुत दिक्कत में हैं। घर में खाना नहीं बन रहा है। चूड़ा, मूढ़ी और सत्तू खाकर किसी तरह रह रहे हैं। एक छत पर 40 से ज्यादा लोग रह रहे हैं। चोरी के डर से घर भी नहीं छोड़ सकते हैं सरबतिया देवी ने कहा कि हमारा घर पूरी तरह से डूब चुका है। छत पर किसी तरह से रह रहे हैं। घर छोड़कर भी नहीं जा सकते हैं। अगर घर छोड़ देंगे तो कीमती सामान कोई ले जा सकता है। चोरी का डर रहता है। कौन देखेगा हमारा सामान ? जलीय जीव आने का डर लगता है। छोटे-छोटे बच्चों को छत पर पॉलिथीन लगाकर रखे हुए हैं। बिजली भी सिर्फ रात में आई थी, उसके बाद से नहीं आई। बीमार होने की स्थिति में नाव से सफर करना पड़ता है। तस्वीरों में देखें लोग किस हालात में रह रहे हैं शौचालय में बाढ़ का पानी, चारों तरफ फैली गंदगी भास्कर टीम बाढ़ वाले इलाके में गई तो देखा लोग गंदगी के बीच रह रहे, क्योंकि शौचालय में बाढ़ का पानी है। लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी भी नहीं मिल रहा है। पंचायत-वार्ड में नाव चल रही है, पर आबादी के अनुसार नाव नहीं है। ऐसी स्थिति लोग लोग कमर भर पानी में निकल पड़ते हैं। झोला सिर पर रखते हैं और आगे बढ़ते रहते हैं। इस दौरान सड़क कहां है और गड्ढ़ा कहां पता ही नहीं चलता। कई बार लोग सड़क नीचे चले जाते हैं तो पानी सिर तक चला जाता है। गंदे पानी में डायरिया, खांसी-बुखार और स्किन संबंधित बीमारियों के फैलने का डर बना है। मेडिकल टीमों को भेजा है, लेकिन दवा और चिकित्सकों की कमी महसूस हो रही है। शिविर में जगह की कमी प्रशासन ने कई स्कूलों और सामुदायिक भवनों में राहत शिविर खोले हैं। यहां विस्थापित परिवारों को अस्थायी ठिकाना, भोजन और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि, शिविरों में जगह और संसाधनों की भारी कमी है। कई जगहों पर लोगों को त्रिपाल के नीचे सोना पड़ रहा है। एग्जिक्यूटिव इंजीनियर आदित्य प्रकाश ने बताया, गंगा का जलस्तर प्रयागराज, वाराणसी और पटना में घटा है। हथीदह और मुंगेर में जलस्तर स्थिर है। ऐसे में उम्मीद है कि अगले दो दिनों में भागलपुर में भी पानी घटने लगेगा। टीएमबीयू, इंजीनियरिंग कॉलेज और रिवर फ्रंट के पास बढ़ रहा जलस्तर भागलपुर में गंगा का जलस्तर सोमवार को 2 सेंटीमीटर बढ़ा था। शाम 6 बजे तक पानी का लेवल 34.65 मीटर था। बाढ़ का पानी बियाडा औद्योगिक क्षेत्र में घुस चुका है। सखीचंद घाट मोहल्ला जलमग्न हो चुका है। यहां घुटनों तक पानी भर गया है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू), भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (बीसीई), बूढ़ानाथ मंदिर का पार्क और रिवर फ्रंट के पास जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यहां आने-जाने वाले लोग नाव का सहारा लेने लगे हैं। भागलपुर शहर में हर 4 घंटे में करीब 2 सेंटीमीटर की वृद्धि हो रही है। कहलगांव में फिलहाल जलस्तर 2021 के उच्चतम स्तर 32.87 मीटर से 7 सेंटीमीटर कम है। हालांकि, स्थानीय लोग सतर्क हैं, क्योंकि पानी की दिशा और गति अचानक बदल सकती है। नाथनगर के दिलदारपुर में सड़कों पर कमर भर पानी नाथनगर प्रखंड के दिलदारपुर का बिना बिंद टोला की ग्रामीण सड़कों पर कमर भर पानी है। लोग अपने छत पर ही त्रिपाल से टेंट बनाए हुए हैं। जहां परिवार के साथ मवेशी भी रह रहे हैं। महिलाएं कई दिनों से नहा नहीं पा रही। सबसे ज्यादा खराब स्थिति सबौर प्रखंड की है सबौर प्रखंड के बरारी, रजंदीपुर, फरका, ममलखा, शंकरपुर और लैलख में बाढ़ का असर सबसे ज्यादा है। इन गांवों में पहुंच मार्ग टूट गए हैं। नाव ही एकमात्र साधन है। कई इलाकों में पशुओं के चारे की भारी किल्लत है, जिससे मवेशी मालिक परेशान हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि पानी का बढ़ना जितना खतरनाक है, उससे ज्यादा डर पानी के उतरने का होता है। बाढ़ का पानी जब उतरता है तो अपने साथ गाद, मलबा, कीचड़ और संक्रामक बीमारियों का खतरा छोड़ जाता है। 660521 लोगों को सामुदायिक किचन में भोजन कराया जा चुका भागलपुर जिले के 6 अंचल नारायणपुर, रंगरा चौक, सुल्तानगंज, शाहकुंड नाथनगर और सबौर सबसे ज्यादा प्रभावित है। कहलगांव, जगदीशपुर और पीरपैंती आंशिक रूप से प्रभावित है। इन प्रखंडों में 186 सामुदायिक किचन चलाए जा रहे हैं। ---------------------------------- ये खबर भी पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट- 'बच्चे मचान पर रहते हैं, हम मवेशियों के बीच':पटना में सड़क किनारे 4000 बाढ़ पीड़ित; बोले-सुबह खाना मिलता है तो रात का ठिकाना नहीं घर बाढ़ में डूब गए हैं। सारा सामान बर्बाद हो गया है। जेपी गंगा पथ पर ऊंची जगह है। हमें यहां शिफ्ट किया गया है। बच्चों को मचान पर बैठा देते हैं। हम लोग मवेशियों के बीच रहते हैं। उन्हें भी तो बचाना है।' 'हर साल हमारा घर डूब जाता है। पहले हमें बारिश से बचने के लिए प्लास्टिक दी जाती थी, लेकिन इस बार वो भी नहीं मिली है।' पूरी खबर पढ़ें
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