गर्ल्स हॉस्टल की 8/10 के कंपार्टमेंट में 6 लड़कियां:कमरा इतना सटा कि ऑक्सीजन न पहुंचे, छात्रा बोली-पापा को नो-एंट्री, लेकिन ऑनर का बेटा कमरे में घुसता है
'मैं एक छोटे से गांव से सपना लिए पटना में पढ़ाई करने के लिए आई हूं। मैं यहां एक हॉस्टल में रह रही थी। वहां सिक्योरिटी के नाम पर मेरे पापा और भैया को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं थी। लेकिन हॉस्टल ओनर का बेटा बिना नॉक किए कभी भी हमारे कमरे में घुस जाता था। वह हर समय लड़कियों के रूम के आसपास भटकता रहता था।' 'जब मैंने शिकायत की तो मुझे हॉस्टल से बाहर निकालने की धमकी दी गई। मैं काफी घर डर गई और खुद ही हॉस्टल छोड़ दिया। अब मैं किसी दूसरे हॉस्टल में रह रही हूं।' यह कहना है बहादुरपुर के एक गर्ल्स हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही एक छात्रा का। पटना में बोरिंग रोड, कंकड़बाग, राजेंद्र नगर, मुसल्लहपुर हाट, भिखना पहाड़ी में हजारों की संख्या में हॉस्टल खुले हुए हैं। यहां लड़कियां डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस बनने का सपना लिए पढ़ाई करती हैं। लेकिन इन हॉस्टलों में उन्हें बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही। सबसे पहले देखिए पटना में गर्ल्स हॉस्टल की तस्वीरें... पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के साथ हुई घटना के बाद भास्कर ने पटना के अलग-अलग हॉस्टलों की पड़ताल की। इस दौरान कई लड़कियों ने हमें अपनी समस्याएं बताई तो कुछ ने दबी जुबान अपने डर को हमारे सामने रखा। इस ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए पटना के गर्ल्स हॉस्टल का हाल...। पटना में किराए पर देने के लिए सिर्फ दो कमरों में ही गर्ल्स हॉस्टल चल रहा है। 8/10 के कंपार्टमेंट में पांच लड़कियां एक साथ रह रही हैं। कहीं, सीसीटीवी की सुविधा नहीं है तो कहीं पर बेहतर खाना नहीं मिल रहा है। कई हॉस्टल में तो पुरुषों के एंट्री पर भी रोक नहीं है। पटना में निजी छात्रावास का व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। साल 2014 के बाद निजी छात्रावासों के संचालन में काफी इजाफा हुआ है। एक जानकारी के अनुसार शहर में छात्रावास से 1000 करोड़ का व्यवसाय हो रहा है। इसमें से अधिकतर छात्रावास बिना रजिस्ट्रेशन के ही चल रहे हैं। पटना नगर निगम के मुताबिक, पटना में कुल 3035 रजिस्टर्ड हॉस्टल हैं। वहीं, वर्तमान में 15 हजार से ज्यादा निजी छात्रावास संचालित हो रहे हैं। छात्रावासों की सुरक्षा ऑडिट भी जिला प्रशासन की ओर से नहीं कराई जाती है, इसीलिए बेफ्रिक होकर इसका संचालन हो रहा है। मेल स्टाफ गलत नजर से देखते, लड़कियां असहज हो जाती हमने बोरिंग रोड के पास स्थित एक हॉस्टल में रहने वाली छात्रा अनुष्का से बात किया तो उसने बताया कि, 'मैं औरंगाबाद से अपने सपने को पूरा करने के लिए पटना आई हूं। हॉस्टल में रहने के दौरान मुझे कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रॉपर तरीके से खाना और हाइजीन नहीं मिलता है।' गर्ल्स हॉस्टल के कैमरा का एक्सेस महिला थाना को मिले- छात्रा अनुष्का ने आगे बताया कि, मेरे हॉस्टल में सिक्योरिटी के नाम पर कैमरे तो लगे हुए हैं, मगर वह प्रॉपर तरीके से काम नहीं करता है। मेरा ये मानना है कि किसी भी गर्ल्स हॉस्टल के सीसीटीवी कैमरा का एक्सेस महिला थाना के पास होना चाहिए। ताकि किसी तरह के अप्रिय घटना होने पर फुटेज से छेड़छाड़ न हो और उपलब्ध रहे, क्योंकि हॉस्टल वाले डिलीट कर देते हैं। उनका कहना है कि, 'अभी कई सारी घटनाएं सुनने को मिल रही है, जिसमें लड़कियां सुसाइड कर रही हैं, उनका रेप हो जाता है, लेकिन कोई भी वैलिड कारण नहीं मिल पाता है।' अनुष्का के मुताबिक, आजकल हॉस्टल के नाम पर एक छोटे से कमरे में ही पार्टीशन करके रूम दिया जाता है। उस पार्टीशन का हाइट 5 से 6 फिट रहता है। अगर कोई चाहे तो बाहर से कमरे में झांक भी सकता है। यहां तक की हॉस्टल में रहने के दौरान लेट से आने वाली लड़कियों की खोज खबर भी नहीं ली जाती है। ऐसे में कोई घटना होने की भी आशंका रहती है। सड़ी-गली सब्जी पकाकर देते खाना मुसल्लहपुर हाट के पास गर्ल्स हॉस्टल में रह रही छात्रा खुशबू पाठक ने कहा कि, हम जैसी लड़कियां छोटे-छोटे गांव से सपना लेकर पटना जैसे बड़े शहर में पढ़ने आती हैं। हमारे परिजनों को लगता है कि हॉस्टल सेफ है। बेटी को अच्छा खाना मिलेगा। लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है।' कमरा इतना सटा है कि ऑक्सीजन भी न पहुंचे- छात्रा छात्रा खुशबू पाठक ने आगे बताया कि, 'हमें जो बुक रखने के लिए अलमीरा दिया जाता है, वह भी काफी छोटा होता है। 5 फ्लोर के हॉस्टल बने हैं, मगर एक रूम में पार्टीशन कर कमरा इतना सटा हुआ बनाया गया है कि वहां ऑक्सीजन भी नहीं पहुंच पाता है। लेकिन रूम का रेंट 8-10 हजार तक रहता है। लड़कियों को एक बेड, थाली और उसमें ऐसा खाना दिया जाता है, जिसे खाकर वह कुपोषण की शिकार हो जाती है। यहां तो टाइफाइड, जॉन्डिस आम बात हो गई है।' होटल मालिक का बेटा खुलेआम घूमता- छात्रा बहादुरपुर गर्ल्स हॉस्टल में रह रही एक छात्रा ने बताया कि उसके हॉस्टल ओनर का बेटा बिना नॉक किए कभी भी कमरे के अंदर आ जाता था। गर्ल्स हॉस्टल में सिक्योरिटी के नाम पर पापा और भैया को जाने नहीं दिया जाता था, लेकिन हॉस्टल ओनर का बेटा खुलेआम घूमते रहता था। इसलिए उसने हॉस्टल छोड़ दिया। सिंगल सीटर के 8000, सुविधा के नाम पर चूहे घूमते राजापुल स्थित हॉस्टल के पास रह रही प्रिया (बदला हुआ नाम) ने कहा कि, 'मैं दसवीं के बाद से ही पटना में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही हूं। मैं सिंगल सीटर वाले रूम में रह रही हूं। उसकी कीमत 8000 रुपए है, लेकिन इतना पैसा देने जैसा वहां कुछ स्पेशल नहीं है। यहां ना प्रॉपर स्पेस है और ना ही बुनियादी सुविधा। यहां तक की चूहे भी बहुत घूमते रहते हैं। एक रूम में प्लाई से घेरकर बना दिए जाते 3-4 कमरे- छात्रा प्रिया (बदला हुआ नाम) ने बताया कि, 'एक बार जब मेरे हॉस्टल में खाना परोसा जा रहा था तो वार्डन ने कपड़े को लेकर ताना मारा कि टाइट कपड़े पहनी हुई है। मेरा यह मानना है कि हम लड़कियां क्या कपड़े पहनते हैं, यह हमारा राइट है। उस समय गर्मी का समय था, तो सभी लोगों ने अपने हिसाब से कंफर्टेबल कपड़े ही पहने हुए थे। उसमें कुछ भी गलत नहीं था।' किसी भी लड़की का प्राइवेसी इंपॉर्टेंट होता है। हॉस्टल में एक रूम को छोटे-छोटे कंपार्टमेंट में बना दिए गए हैं। आधे दूरी तक ही प्लाईवुड-टीन लगाकर कंपार्टमेंट बनाए जाते हैं। उसे ऊपर तक घेरा भी नहीं जाता है। यह हमारे लिए सेफ नहीं होता है, क्योंकि कई लोग हॉस्टल में घूमते रहते हैं। - प्रिया, छात्रा छात्रा ने आगे बताया कि, 'कुछ लड़कियों का नेचर अच्छा नहीं होता है, ऐसे में वह ब्लैकमेल करने के नाम पर कोई कैमरा भी लगा सकती हैं। इसलिए मेरा यही मानना है कि अगर प्लाईवुड लगाकर रूम दिया जा रहा है तो उसे पूरी तरह से कवर किया जाए। दूसरे राज्यों में गर्ल्स हॉस्टल की सिक्योरिटी पटना से ज्यादा अच्छी - छात्रा छात्रा अंजलि (बदला हुआ नाम) ने कहा कि, 'घर छोड़कर हॉस्टल में रहना, खासकर लड़कियों के लिए अपने आप में ही एक बहुत बड़ा डिसीजन होता है। यहां खाना भी मां के हाथ के जैसा नहीं मिलेगा। मैं पटना से पहले दिल्ली और कोटा के हॉस्टल में भी रही हूं, लेकिन वो सब यहां से काफी अलग है।' छात्रा ने आगे बताया कि, 'दूसरे राज्यों में लड़की के घर जाने से पहले एप्लिकेशन दिखाया जाता है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि लड़की अपने घर पहुंची है या नहीं। मगर पटना में ऐसा कोई कल्चर नहीं है। लड़कियां कहां जा रही है, कब वापस आ रही है। इससे हॉस्टल वाले को कोई भी मतलब नहीं होता है, जो की सिक्योरिटी के लिहाज से काफी खतरनाक बात है। खाने का बड़ा सा मेन्यू दिखाते हैं, लेकिन वह जाल होता है- छात्रा आस्था (बदला हुआ नाम) ने कहा कि, 'जब हम हॉस्टल लेने जाते हैं तो हमें खाने के नाम पर एक बड़ा सा मेन्यू दिखा दिया जाता है, लेकिन उसे फॉलो नहीं किया जाता है। बस इंप्रेस करने और पैसा कमाने के लिए वह एक जाल होता है।'
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