केंद्रीय बजट की गिरिराज सिंह ने सराहना की:कहा- वैश्विक वस्त्र हब बनने की ओर भारत के बढ़ते कदम, आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय के सांसद गिरिराज सिंह ने बजट 2026-27 को भारतीय वस्त्र उद्योग के लिए एक अच्छा मोड़ बताया है। उन्होंने कहा है कि सरकार ने इस श्रम-प्रधान क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात का केंद्र बनाने के लिए एक व्यापक रणनीति पेश की है। जिसमें रोजगार सृजन, सतत विकास और निर्यात प्रोत्साहन पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार ने प्रतिस्पर्धात्मकता और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए एक एकीकृत कार्यक्रम के पांच प्रमुख स्तंभों की घोषणा की है। राष्ट्रीय फाइबर योजना में रेशम, ऊन, जूट जैसे प्राकृतिक रेशों के साथ-साथ मानव-निर्मित और नई पीढ़ी के रेशों में आत्मनिर्भरता हासिल करने और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना के तहत पारंपरिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए पूंजी सहायता और साझा परीक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। जिससे गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार होगा। राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम से मौजूदा योजनाओं को एकीकृत कर बुनकरों और कारीगरों की आय बढ़ाने और भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का लक्ष्य रखा गया है। टेक्स-ईको पहल का उद्देश्य भारतीय परिधानों को अंतरराष्ट्रीय हरित मानकों के अनुरूप बनाना और उभरते वैश्विक बाजारों में पैठ बनाना है। समर्थ 2.0 में उद्योग और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से उद्योग-तैयार कुशल जनशक्ति तैयार करने के लिए कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र का आधुनिकीकरण किया जाएगा। निर्यात और एमएसएमई को नई शक्ति निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने शुल्क-मुक्त इनपुट का उपयोग करने वाले उत्पादों वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर के लिए निर्यात दायित्व अवधि को 6 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया है। इससे निर्यातकों को बेहतर कार्यशील पूंजी प्रबंधन और परिचालन लचीलापन प्राप्त होगा। वस्त्र क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले एमएसएमई के लिए सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। गिरिराज सिंह ने कहा है कि टीआरईडीएस के विस्तार से एमएसएमई की तरलता बढ़ाने के लिए सरकारी खरीद में इसका अनिवार्य उपयोग और ऋण गारंटी समर्थन सुनिश्चित किया गया है। एसएमई ग्रोथ फंड भविष्य के चैंपियन उद्यम तैयार करने के लिए 10 हजार करोड़ का एक समर्पित फंड शुरू किया गया है। ग्राम स्वराज और मेगा पार्कों से ग्रामीण उत्थान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल की शुरुआत की जाएगी। जो खादी और ग्रामोद्योगों को एक जिला एक उत्पाद (ODOP) के माध्यम से वैश्विक बाजारों से जोड़ेगी। इसके साथ ही चुनौती मोड में मेगा वस्त्र पार्कों की स्थापना की जाएगी, जो बड़े पैमाने पर उत्पादन और चिकित्सा, रक्षा, और बुनियादी ढांचे के लिए उपयोगी तकनीकी वस्त्रों के विकास को गति देंगे। रोजगार सृजन में अभूतपूर्व उछाल गिरिराज सिंह ने आंकड़ों के माध्यम से क्षेत्र की प्रगति को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद भारत के वस्त्र उत्पादन में तीव्र विस्तार हुआ है। कोविड काल के बाद से अब तक 1.8 करोड़ से अधिक सिलाई मशीनें भारतीय उत्पादन तंत्र में जुड़ी हैं। अकेले साल 2024-25 में 61 लाख सिलाई मशीनों का रिकॉर्ड आयात हुआ। प्रत्येक सिलाई मशीन औसतन 1.7 श्रमिकों को रोजगार देती है। जिसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में 3 करोड़ से अधिक रोजगारों का सृजन संभव हुआ है। यह प्रगति 2004-2014 के दशक की तुलना में काफी अधिक है, जब केवल 33 लाख सिलाई मशीनों का आयात हुआ था। बजट 2026-27 के ये प्रावधान भारत को समावेशी विकास और आर्थिक प्रगति के पथ पर एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित करेंगें।
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